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411 समाचार
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झपकी

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thumb|right|345px|एक झपकी लेते हुए एक जवान औरत का चित्र.(झूला, गस्टेव कुर्बेट (1844).) झपकी दोपहर की शुरूआत, अक्सर दोपहर के भोजन के बाद थोड़ी देर के लिए उंघने को कहते हैं। नींद का इस तरह का समय कुछ देशों, खासकर जहां मौसम गर्म होता है, में एक आम परंपरा है। सियेस्ता शब्द लातिन होरा सेक्स्ता - "छठा घंटा" (भोर से दोपहर तक की गिनती, इसलिए दोपहर यानी "दोपहर का आराम"). से निकला स्पेनिश शब्द है। झपकी स्पेन में और स्पेनिश प्रभाव के कारण कई लैटिन अमेरिकी देशों में परंपरागत दिन में सोने को कहते हैं। इसके भौगोलिक वितरण के कारकों को मुख्य रूप से उच्च तापमान और दोपहर के भारी और बहुत भारी भोजन का सेवन करना है। संयुक्त रूप से ये दो कारक दोपहर के भोजन के बाद उनींदापन लाते हैं। दोपहर के भोजन के बाद की नींद अल्बानिया अज़ोरेस, बांग्लादेश, बोस्निया और हर्ज़ेगोविना, ब्राजील, चीन, क्रोएशिया, साइप्रस, ग्रीस, भारत, ईरान, इराक, इटली (दक्षिण), मैसेडोनिया, माल्टा, मॉरिटानिया, मोंटेनेग्रो, उत्तर अफ्रीका पाकिस्तान फिलीपींस, सर्बिया, ताइवान और वियतनाम में एक सामान्य व्यवहार है।June 2008 इन देशों में, दोपहर की शुरूआत में गर्मी असहनीय हो जाती है और घर में दोपहर को विश्राम करना आदर्श होता है। इस आदत के साथ कई क्षेत्रों में दिन का सबसे बड़ा भोजन दोपहर शुरू होते ही लेना देखा जाता है और खेती में यह व्यावहारिक और आम है। May 2010 ऐसा लगता है कि झपकी की मूल अवधारणा सिर्फ इसलिए है कि दोपहर के विश्राम का मकसद लोगों को अपने मित्रों और परिवार के साथ समय बिताने का मौका देना है। यह बताया गया है कि आधुनिक झपकी का लंबा छोर स्पेनिश नागरिक युद्ध से जुड़ा है, जब गरीबी के कारण स्पेन के लोग अनियमित घंटों तक कई-कई काम किया करते थे और उनके भोजन का समय दोपहर के आखिर और शाम तक खिंच जाता था।एंडरसन, जॉन वार्ड और जेनिफर ग्रीन. "शेकिंग स्पेन आउट ऑफ़ इट्स सिएस्ट" https://web.archive.org/web/20121110224846/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2006/04/22/AR2006042201123.html 10 नवंबर 2012 , वॉशिंगटन पोस्ट, 23 अप्रैल 2006, पृष्ठ ए12 (A12). हालांकि, यह सोचकर इस परिकल्पना की संभावना नहीं लगती कि झपकी लेने की परंपरा लैटिन अमेरिका और स्पैनिक प्रभाव वाले अन्य देशों में आम थी, बल्कि यह परंपरा स्पेन के गृह युद्ध से पहले बहुत मौजूद थी। May 2010 धूप से सुरक्षा thumb|250px|उआगडूगू में आम के पेड़ के छाया में सिएस्ट झपकी तब आती है, जब सूरज अपने उच्चतम बिंदु पर होता है। इसी समय जब सूर्य की पराबैंगनी विकिरण दोपहर में अपने चरम पर होता है। लंबे समय तक पराबैंगनी विकिरण से त्वचा झुलस सकती है, खासकर तब जब किसी की त्वचा गोरी हो। पराबैंगनी विकिरण से ज्यादा प्रभाव की पुनरावृत्ति त्वचा कैंसर के कुछ रूप पैदा कर सकता है। सूरज के अवरक्त विकिरण के कारण दोपहर के बाद से हवा का तापमान उच्च हो जाता है और दोपहर के प्रारंभ में यह उच्चतम स्तर पर होता है। उच्च तापमान थकान या अधिक गंभीर मामलों में गर्मी से थकावट या हाइपरथर्मिया (लू) तक का कारण बन सकता है। झपकी के लिए जैविक आवश्यकता ज्यादा उम्र वाले, किशोरवय से पहले बच्चे आमतौर पर झपकी लेने में असमर्थ होते है, लेकिन किशोरावस्था में पहुंचते ही उनमें झपकी लेने की क्षमता आ जाती है।Dement William The Promise of Sleep https://archive.org/details/promiseofsleep00will Dell Publishing 1999 113–115 0-440-50901-7 मानवों में सोने का समय होम्योस्टेटिक (मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा दिमाग की शांतता) नींद की प्रवृत्ति, अंतिम पर्याप्त नींद के प्रकरण के बाद से गुजरने वाले समय में कार्य के आधार पर नींद की जरूरत और जीवचक्रीय ताल, जो एक सही ढंग से संरचित और पुन: प्रतिष्ठा‍पित नींद प्रकरण के बीच संतुलन पर निर्भर करता है। सोने के लिए होम्योस्टेटिक दबाव जागने के बाद से ही शुरू हो जाता है। जागने के लिए जीवचक्रीय संकेत दोपहर (आखिरी दौर) में उभरने शुरू हो जाते हैं। जैसा कि नींद की दवाओं के विशेषज्ञ व हार्वड के प्रोफेसर चार्ल्स ए जीसलर ने दावा किया है, "जीवचक्रीय प्रणाली का निर्माण इतने सुंदर तरीके से होता है कि वह नींद की होम्योस्टेटिक प्रेरणा को पूरी तरह ढंक (ओवरराइड) लेती है।"Lambert Craig, PhD July–August 2005 Deep into Sleep. While researchers probe sleep's functions, sleep itself is becoming a lost art Harvard Magazine http://harvardmagazine.com/2005/07/deep-into-sleep.html 2008-02-25 https://web.archive.org/web/20101203132815/http://harvardmagazine.com/2005/07/deep-into-sleep.html 3 दिसंबर 2010 dead इस प्रकार, बहुत से लोगों में तब एक सुस्ती दिखाई देती है, जब घंटों तक सोने के लिए मजबूर होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और जागने के मजबूर होने की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई होती है। फिर जीसलर के हवाले से यह "झपकी के लिए एक अच्छा समय होता है". जागने के लिए मजबूर होने की प्रक्रिया शाम को तेज होती है, जिससे जब जागने की प्रक्रिया बहाल रखने का समय खत्म हो जाता है, किसी व्यक्ति के सोने के समान्य समय से 2-3 घंटे पहले सोना मुश्किल हो जाता है। कुछ व्यक्तियों में, "भोजन के बाद सुस्ती", जब एक भारी भोजन के बाद शरीर के सामान्य इंसुलिन द्वारा रक्त में शर्करा की मात्रा हल्की कम होती है की वजह से भोजन कि बाद झपकी को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, सुस्ती की उपस्थिति प्राथमिक तौर पर जीवचक्रीय है, क्योंकि यह भोजन के अभाव में भी पैदा हो सकती है। अन्य संस्कृतियों में झपकी thumb|लिपसी, ग्रीस के द्वीप में दंत चिकित्सक और औषध विक्रेता एकसा व्यापार पर चर्चा कर रहे हैं दोपहर की झपकी की अवधारणा उन अन्य उष्णकटिबंधीय या उप-उष्णकटिबंधीय देशों में प्रमुखता से मौजूद है, जहां दोपहर बाद की गर्मी नाटकीय रूप से काम की उत्पादकता को कम कर देती है। 13 फ़रवरी 2007 की वॉशिंगटन पोस्ट की एक िरपोर्ट में यूनान में हुए काफी गहरे अध्ययन में संकेत दिया गया है कि जो झपकी लेते हैं, उनहें दिल के दौरे का खतरा कम होता है।स्टीन, रॉब. "मिडडे नैप्स फाउंड टू हेल्प फ़ंड ऑफ़ हार्ट डिसीज़" https://web.archive.org/web/20110216085333/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2007/02/12/AR2007021200626.html 16 फ़रवरी 2011 , वॉशिंगटन पोस्ट, 13 फ़रवरी 2007, पृष्ठ ए14 (A14). मिसाल के तौर पर सर्बिया और स्लोवेनिया में झपकी जैसी आदत का एक उदाहरण देखा जा सकता है। विशेष रूप से उम्रदराज नागरिकों के बीच, तथाकथित "घर के राज" का पालन करना आम है, जिसमें लोगों को फोन करना या अपराह्न 2 बजे और 5 बजे के बीच एक दूसरे के यहां आने-जाने से बचा जाता है, क्योंकि यह माना जाता है कि लोग आराम कर रहे हैं; विशेष रूप से सर्बिया और स्लोवेनिया में दोपहर का भोजन, आम तौर पर अपराह्न 1 बजे और 2 बजे के बीच किया जाता है, दिन का मुख्य भोजन होता है। कुछ दक्षिणी जर्मन भाषी क्षेत्रों में, मिट्टागसपौस :de:Mittagspause या मिट्टागरूह :de:Mittagsruhe अभी भी प्रथा में है और इस दौरान दुकानें बंद रहती हैं और बच्चों से उम्मीद की जाती है कि वे घर के भीतर चुपचाप खेलें. दक्षिण एशिया में, दोपहर के भोजन के बाद झपकी लेने का विचार एक आम बात है और औद्योगीकरण से पहले उनींदापन लाने के लिए सरसो तेल की हल्की मालिश के बाद सोने का विचार देखा जाता था। इस अनुष्ठान में हल्का नाश्ता करने भी बहुत लोकप्रिय था और यह सोचा जाता था कि ऐसा करने से व्यक्ति बेहतर बन सकता है।April 2007 बंगाल में भात घूम अवधारणा वाले शब्द का शाब्दिक अर्थ "भात नींद", यानी दोपहर के भोजन के बाद की झपकी है। दोपहर के भोजन के बाद दोपहर के बाद की नींद चीन और ताइवान में भी एक आम आदत है। इसे चीनी में "वूजियाओ (午觉)" कहा जाता है।" चीन और ताइवान के लगभग सभी मुख्य स्थानों के सभी स्कूलों में लंच के बाद आधा घंटे की झपकी लेने की अवधि होती है। यह ऐसा समय होता है, जब सभी तरह की रोशनी बुझा दी जाती हैं और किसी को आराम करने या सोने के अलावा कोई अन्य काम करने की अनुमति नहीं होती. जापान के कुछ कार्यालयों में कुछ खास कमरे होते हैं, जिन्हें झपकी के कमरे कहा जाता है, जिसमें दोपहर के भोजन के अवकाश या अतिरिक्त समय काम करने के बाद श्रमिक झपकी लेते हैं। इस्लाम में दुहुर (दोपहर) और असर (दोपहर बाद) की नमाज के बाद झपकी लेने को प्रोत्साहित किया जाता है, जिसका मकसद बा में रात में तहज्जुद लेना होता है।October 2010 संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों, जिनकी संख्या बढ़ रही है, में एक छोटी नींद को "पावर नैप" के रूप में संदर्भित किया जाता है, जिस शब्‍द को कॉर्नेल विश्वविद्यालय सामाजिक मनोवैज्ञानिक जेम्स मासमॉस, जेम्स बी. (1998) मिरकेल स्लिप क्योर : लंदन: थौर्संस द्वारा गढ़ा गया और लोकप्रिय मीडिया तथा सारा मैडनिकhttp://www.nih.gov/news/pr/jul2002/nimh-02.htm The National Institute of Mental Health Power Nap Study 2002-07-01 2002-07-01 https://web.archive.org/web/20020802060144/http://www.nih.gov/news/pr/jul2002/nimh-02.htm 2 अगस्त 2002 live जैसे अनुसंधान वैज्ञानिकों द्वारा मान्यता प्राप्त है।http://www.foxnews.com/story/0,2933,295677,00.html Researchers: Power Nap Better than Caffeine to Fight Afternoon Fatigue 2007-09-04 Fox News 3 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20121025075620/http://www.foxnews.com/story/0,2933,295677,00.html 25 अक्तूबर 2012 live सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ व्हाई वी कूड ऑल डो विद अ सीएस्ट - मैनचेस्टर विश्वविद्यालय से रिसर्च के परिणामों के बारे में एक लेख श्रेणी:निद्रा श्रेणी:स्पैनिश लोनवर्ड