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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

तुलसी घाट

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मई 2015 250px|अंगूठाकार|तुलसी घाट, वाराणसी तुलसी घाट का पुराना नाम "लोलार्क घाट" था। यह बाद में संत तुलसी दास जी के नाम पर सोलहवीं सदी इसका नाम बदल दिया। भाद्रपद महिने में यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है। संत तुलसी दास जी द्वारा इस घाट पर श्रीकृष्ण लीला का आरम्भ किया गया ,जो अभी तक कायम है। जो कार्तिक कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथी से आरम्भ होकर अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथी तक होती है। जिसमे नागनथैया (चार-लखी मेला ) , दशावतार झाकी , रास लीला मशहूर है। काशी नरेश द्वारा नागनथैया में स्वर्ण मुद्रा दी जाती है। इस घाट पर संत तुलसी दास जी द्वारा एक हनुमान जी का मंदिर स्थापित है। यहाँ नियमित रूप से संकट मोचन मंदिर की राम नाम संकृर्तन के बाद कीर्तन करने वाले भक्त गण तुलसी घाट स्थित हनुमान मंदिर में कीर्तन करते है,ऐवं महन्त संकट मोचन( विश्वम्भर नाथ मिश्र ) से प्रसाद ग्रहण करते हैं। श्रेणी:वाराणसी के दर्शनीय स्थल तुलसी घाट के गोलेन्द्र पटेल, हिन्दी साहित्य की नई पीढ़ी के प्रमुख स्तम्भों में से एक एवं कवि हैं। तुलसी घाट का पुराना नाम "लोलार्क घाट" था, और यह वाराणसी (काशी) के प्रमुख घाटों में से एक है। लोलार्क घाट का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत गहरा है। इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी इस प्रकार है:https://www.bundelkhand24x7.com/ Bundelkhand News Bundelkhand 24x7 2025-03-22 लोलार्क सूर्य पूजा: प्राचीन समय में इस घाट पर विशेष रूप से सूर्य देवता की पूजा की जाती थी। "लोलार्क" शब्द का अर्थ होता है "अल्प सूर्य" और यह घाट सूर्य देवता के पूजन के लिए प्रसिद्ध था। माना जाता है कि यहां सूर्य को विशेष रूप से पूजा जाता था, खासकर सूर्य ग्रहण के समय। तुलसीदास जी का संबंध: तुलसी घाट का नाम बाद में तुलसीदास जी से जुड़ने के कारण "तुलसी घाट" पड़ा। हालांकि, यह घाट पहले "लोलार्क घाट" के नाम से जाना जाता था। तुलसीदास जी ने यहां पर रामचरितमानस की रचना की थी, जिससे इस घाट का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया। सम्भावित इतिहास: कहा जाता है कि इस घाट का नाम लोलार्क सूर्य पूजा से जुड़ा हुआ था, और यह घाट उस समय के एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में प्रतिष्ठित था। जब तुलसीदास जी ने यहां पर रामायण का लोकप्रिय रूप रामचरितमानस लिखा, तब इस घाट को उनका नाम मिला। भूतकाल और वर्तमान: लोलार्क घाट को अब तुलसी घाट के नाम से जाना जाता है, और यह काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यहां पर श्रद्धालु स्नान करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। यह घाट विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। तो, लोलार्क घाट का नाम एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल और तुलसीदास जी से जुड़े होने के कारण अब तुलसी घाट के नाम से प्रसिद्ध है।