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कोड डिवीजन मल्टीपल एक्सेस

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अगस्त 2021 अगस्त 2021 English yes अगस्त 2021 कोड डिवीजन मल्टीपल एक्सेस (IS-95 सीडीएमए) एक चैनल एक्सेस विधि है जिसका उपयोग विभिन्न रेडियो संचार तकनीकों में होता है। सीडीएमए मल्टीपल एक्सेस का एक उदाहरण है जिसमें कई ट्रांसमीटर एक ही संचार चैनल से एक साथ सूचना भेज सकते हैं। इससे कई उपयोगकर्ता आवृत्तियों के एक ही बैंड को साझा कर सकते है (बैंडविड्थ देखें)। उपयोगकर्ताओं के बीच अनुचित हस्तक्षेप के बिना इसे सम्भव होने देने के लिए, सीडीएमए स्प्रेड स्पेक्ट्रम तकनीक और एक विशेष कोडिंग योजना (जहां प्रत्येक ट्रांसमीटर को एक कोड दिया जाता है) का प्रयोग करता है।Principles of Spread-Spectrum Communication Systems, 4th ed. 2018 Torrieri Don enPrinciples of Mobile Communication, 4th ed. 2017 Stuber Gordon L. en सीडीएमए उपलब्ध बैंडविड्थ के उपयोग को अनुकूलित (इष्टतम) करता है क्योंकि यह संपूर्ण आवृत्ति रेंज पर प्रसारित होता है और उपयोगकर्ता की आवृत्ति रेंज को सीमित नहीं करता है। सीडीएमए का उपयोग कई मोबाइल फोन मानकों में एक्सेस विधि के रूप में किया जाता है। आईएस-९५ (IS-95), जिसे "cdmaOne" भी कहा जाता है, और इसके ३जी प्रारूप सीडीएमए२००० (CDMA2000), को अक्सर "सीडीएमए" के नाम से उल्लेख किया जाता है, लेकिन UMTS (GSM वाहकों द्वारा उपयोग किया जाने वाला ३जी मानक) इसकी रेडियो प्रौद्योगिकियों के रूप में "वाइडबैंड CDMA" (W-CDMA), साथ ही साथ टीडी-सीडीएमए और टीडी-एससीडीएमए, का भी उपयोग करता है। इसका उपयोग चैनल या माध्यम (मीडियम) एक्सेस तकनीक के रूप में (जैसे ALOHA) या स्थायी पायलट/संकेतन चैनल के रूप में भी किया जा सकता है जिससे उपयोगकर्ता अपने स्थानीय दोलक (ऑसीलेटर) को एक सामान्य प्रणाली की आवृत्ति में तुल्यकाल कर सकते हैं, जिससे कि चैनल मापदंड का स्थायी रूप से अनुमान लगाया जा सकता है। इन व्यवस्थाओं में, संदेश को लंबे समय तक प्रसारित अनुक्रम, जिसमें कई चिप्स (0es और 1es) मिली होती हैं, पर संशोधित किया जाता है। उनके बहुत ही फायदेमंद स्व (ऑटो)- और विभिन्न (क्रॉस)-सहसंबंध विशेषताओं के कारण, इन प्रसार अनुक्रमों का उपयोग कई दशकों से रडार अनुप्रयोगों के लिए भी किया जाता है, जहां उन्हें बार्कर-कोड कहा जाता है (आमतौर पर 8 से 32 की एक बहुत ही कम अनुक्रम लंबाई के साथ)। अंतरिक्ष आधारित संचार अनुप्रयोगों के लिए भी उपग्रह गति के कारण होने वाले बड़े पाथ लॉस और डॉप्लर प्रभाव के कारण कई दशकों से इसका उपयोग किया जाता है। आमतौर पर उन अनुप्रयोगों में, इस प्रभाव के कारण, न तो FDMA और न ही TDMA का उपयोग एकल मॉडुलन के रूप में किया जाता है। सीडीएमए अक्सर बीपीएसके के साथ अपने सरलतम रूप में प्रयोग किया जाता है, लेकिन यह किसी भी मॉडुलन व्यवस्था के साथ जोड़ा जा सकता है जैसे उन्नत मामलों में क्यूएएम या ओएफडीएम, जो आम तौर पर इसे बहुत मजबूत और कुशल बनाता है (और उन्हें सटीक रेंज क्षमताओं से लैस करता है, जो सीडीएमए के बिना मुश्किल है)। अन्य योजनाएं बाइनरी ऑफ़सेट कैरियर (बीओसी) पर आधारित उप-वाहकों का उपयोग करती हैं, जो मैनचेस्टर कोड से प्रेरित है और वर्चुअल सेंटर आवृत्ति और उप-वाहकों के बीच एक बड़ा अंतर सक्षम करती है, जो ओएफडीएम उप-वाहकों के मामले में सम्भव नहीं है। इतिहास कोड-डिवीजन मल्टीपल एक्सेस चैनलों की तकनीक लंबे समय से जानी जाती है। सोवियत संघ (यूएसएसआर) में पहली बार इस विषय के लिए समर्पित कार्य दिमित्री एजेव द्वारा 1935 में प्रकाशित किया गया था।Ageev D. V. Bases of the Theory of Linear Selection. Code Demultiplexing Proceedings of the Leningrad Experimental Institute of Communication 1935 3–35 सीडीएमए की तकनीक का इस्तेमाल 1957 में किया गया था, जब मॉस्को में युवा सैन्य रेडियो इंजीनियर लियोनिद कुप्रियानोविच ने एक बेस स्टेशन के साथ एलके-1 नामक पहनने योग्य स्वचालित मोबाइल फोन का एक प्रयोगात्मक मॉडल बनाया था। Soviet Union 115494 Устройства вызова и коммутации каналов радиотелефонной связи (Devices for calling and switching radio communication channels) 1957-11-04 Куприянович (Leonid Kupriyanovich) https://patents.su/7-115494-ustrojjstva-vyzova-i-kommutacii-kanalov-radiotelefonnojj-svyazi.html 2020-07-08 ru एलके-१ का वजन ३ किलोग्राम, २०-३० किमी की परिचालन दूरी, और २०-३० घंटे की बैटरी लाइफ है।:en:Nauka i Zhizn 8, 1957, p. 49.Yuniy technik 7, 1957, p. 43–44. लेखक के अनुसार बेस स्टेशन कई ग्राहकों द्वारा प्रयोग किया सकता था। 1958 में कुप्रियानोविच ने मोबाइल फोन का नया प्रयोगात्मक "पॉकेट" मॉडल बनाया। इस फोन का वजन 0.5 किलो था। अधिक ग्राहकों द्वारा काम में लेने के लिए कुप्रियानोविच ने इस डिवाइस का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने "कोरिलेटयर" (सहसंबंधक) कहा।"Nauka i Zhizn 10, 1958, p. 66.:en:Tekhnika Molodezhi 2, 1959, p. 18–19. १९५८ में यूएसएसआर ने "अल्ताई" का विकास भी शुरू किया जोकि सोवियत एमआरटी-1327 मानकों पर आधारित कारों के लिए एक राष्ट्रीय नागरिक मोबाइल फोन सेवा थी। फोन सिस्टम का वजन 11 किलो (24 एलबी) था। इसे उच्च स्तर के अधिकारियों के वाहनों के ट्रंक में रखा जाता था और एक सामान्य हैंडसेट को यात्री डिब्बे में इस्तेमाल किया जाता था। अल्ताई प्रणाली के मुख्य डेवलपर्स वीएनआईआईएस (वोरोनिश साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशंस) और जीएसपीआई (स्टेट स्पेशलाइज्ड प्रोजेक्ट इंस्टीट्यूट) थे। 1963 में यह सेवा मॉस्को में शुरू हुई थी और 1970 में 30 यूएसएसआर शहरों में अल्ताई सेवा का उपयोग किया गया था।http://englishrussia.com/2006/09/18/first-russian-mobile-phone/ First Russian Mobile Phone September 18, 2006 उपयोग thumb|एक सीडीएमए2000 मोबाइल फोन सिंक्रोनस सीडीएम (कोड-डिवीजन 'मल्टीप्लेक्सिंग', सीडीएमए की एक प्रारंभिक पीढ़ी) को वैश्विक स्थान-निर्धारण प्रणाली (जीपीएस) में लागू किया गया था । यह मोबाइल फोन में इसके इस्तेमाल से पहले का है और अलग है। क्वालकॉम मानक IS-95, जिसे cdmaOne के नाम से जाना जाता है। क्वालकॉम मानक IS-2000 , जिसे CDMA2000 के नाम से जाना जाता है, का उपयोग ग्लोबलस्टार नेटवर्क सहित कई मोबाइल फोन कंपनियों द्वारा किया जाता है।nb ग्लोबलस्टार सीडीएमए, टीडीएमए और एफडीएमए के अंशों का सैटेलाइट मल्टीपल बीम एंटेना के साथ संयोजन करके उपयोग करता है।M. Mazzella, M. Cohen, D. Rouffet, M. Louie and K. S. Gilhousen, "Multiple access techniques and spectrum utilisation of the GLOBALSTAR mobile satellite system," Fourth IEE Conference on Telecommunications 1993, Manchester, UK, 1993, pp. 306-311. यूएमटीएस 3 जी मोबाइल फोन के मानक में, जो डब्ल्यू-सीडीएमए का उपयोग करता है।nb यूएमटीएस नेटवर्क और अन्य सीडीएमए आधारित सिस्टम एक प्रकार के हस्तक्षेप-सीमित सिस्टम के रूप में भी जाने जाते हैं।Holma H. Toskala A. 2007 https://books.google.com/books?id=7m-MnwW_o7AC&q=lte+umts+are+interference+limited&pg=PT439 WCDMA for UMTS: HSPA Evolution and LTE John Wiley & Sons 9781119991908Laiho J. Wacker A. Novosad T. 2002 https://books.google.com/books?id=9RE32TlXZBQC&q=is+umts+interference+limited+systems&pg=PA303 Radio Network Planning and Optimisation for UMTS (Vol. 2) New York John Wiley & Sons 303 9780470031391 यह सीडीएमए प्रौद्योगिकी के गुणों से संबंधित है: सभी उपयोगकर्ता एक ही आवृत्ति रेंज में काम करते हैं जो एसआईएनआर को प्रभावित करता है और इस प्रकार, कवरेज और क्षमता को कम करता है। Walke B.H. Seidenberg P. Althoff M.P. 2003 https://books.google.com/books?id=KRlUvPWeTYQC&q=interference+limited+systems&pg=PA18 UMTS: The Fundamentals John Wiley & Sons 18–19 9780470845578 सीडीएमए का उपयोग परिवहन संभार-तंत्र के लिए ओमनीट्रैक्स उपग्रह प्रणाली में किया गया है। सीडीएमए मॉडुलन की कार्य प्रणाली सीडीएमए एक स्प्रेड-स्पेक्ट्रम मल्टीपल-एक्सेस तकनीक है। एक स्प्रेड-स्पेक्ट्रम तकनीक एक-समान संचरित शक्ति के लिए डेटा की बैंडविड्थ को समान रूप से फैलाती है। एक स्प्रेडिंग कोड एक छद्म-यादृच्छिक कोड होता है जिसमें एक संकीर्ण एम्बीग्युएटी फंक्शन (Ambiguity function) होता है, अन्य संकीर्ण पल्स कोड के विपरीत। सीडीएमए में एक स्थानीय रूप से उत्पन्न कोड संचरित किए जाने वाले डेटा की तुलना में बहुत अधिक दर से चलता है। ट्रांसमिशन वाले डेटा को बिटवाइज़ XOR (एक्सक्लूसिव OR) से जल्दी चलने वाले कोड के साथ जोड़ा जाता है। यह तस्वीर दिखाती है कि स्प्रेड-स्पेक्ट्रम सिग्नल कैसे उत्पन्न होती है। (प्रतीक अवधि) की पल्स अवधि के डेटा सिग्नल को (चिप अवधि) की पल्स अवधि के कोड सिग्नल के साथ XOR कर दिया जाता है। (नोट: बैंडविड्थ का आनुपातिक है, जहाँ = बिट टाइम होता है।) इसलिए, डेटा सिग्नल की बैंडविड्थ है और स्प्रेड स्पेक्ट्रम सिग्नल की बैंडविड्थ है। क्योंकि बहुत छोटा है से इसलिए स्प्रेड-स्पेक्ट्रम सिग्नल की बैंडविड्थ बहुत बडी है मूल सिग्नल की बैंडविड्थ से। का अनुपात प्रसार कारक या प्रसंस्करण लाभ कहलाता है। यह अनुपात एक कुछ हद्द तक बेस स्टेशन द्वारा एक ही समय में सप्पोर्टेड उपयोगकर्ताओं की कुल संख्या की ऊपरी सीमा निर्धारित करता है। thumb|500px|center|सीडीएमए सिग्नल का निर्माण सीडीएमए सिस्टम में प्रत्येक उपयोगकर्ता अपने सिग्नल को संशोधित करने के लिए एक अलग कोड का उपयोग करता है। सीडीएमए सिस्टम के पर्फोर्मेंस में सिग्नल को मॉड्यूलेट करने के लिए इस्तेमाल किए गए कोड का चयन करना बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे अच्छा पर्फोर्मेंस तब होता है जब वांछित उपयोगकर्ता के सिग्नल और अन्य उपयोगकर्ताओं के सिग्नल के बीच काफी दूरी होती है। सिग्नल का पृथक्करण वांछित उपयोगकर्ता के स्थानीय रूप से उत्पन्न कोड के साथ प्राप्त सिग्नल को सहसंबंधित करके किया जाता है। यदि सिग्नल वांछित उपयोगकर्ता के कोड से मेल खाता है, तो सहसंबंध फ़ंक्शन उच्च हो जायेगा और सिस्टम उस सिग्नल को निकाल सकेगा। यदि वांछित उपयोगकर्ता के कोड और सिग्नल में कुछ भी मेल नहीं खाता है, तो सहसंबंध जितना संभव हो उतना शून्य के करीब होना चाहिए (इस प्रकार सिग्नल समाप्त होता है); इसे क्रॉस-सहसंबंध के नाम से जाना जाता है। यदि कोड शून्य के अलावा किसी भी समय ओफ्सेट में सिग्नल के साथ सहसंबंध होता है, तो सहसंबंध यथासंभव शून्य के करीब होना चाहिए। इसे ऑटो-सहसंबंध के नाम से जाना जाता है और इसका उपयोग बहु-पथ हस्तक्षेप को अस्वीकार करने के लिए किया जाता है। Digital Communications: Fundamentals and Applications, 2nd ed. 2014 Sklar Bernard Ray Pabitra K.Wireless Communications, 2nd ed. 2010 Molisch Andreas मल्टीपल एक्सेस की समस्या का एक सादृश्य एक कमरा (चैनल) है जिसमें लोग एक-दूसरे से एक साथ बात करना चाहते हैं। दुविधा से बचने के लिए, लोग बारी-बारी से बोल सकते हैं (टाइम डिवीजन), अलग-अलग तारत्वों पर बोल सकते हैं (आवृत्ति डिवीजन), या विभिन्न भाषाओं में बोल सकते हैं (कोड डिवीजन)। सीडीएमए अंतिम उदाहरण के अनुरूप है जहां एक ही भाषा बोलने वाले लोग एक-दूसरे को समझ सकते हैं, लेकिन अन्य भाषाओं को शोर के रूप में माना जाता है और अस्वीकार कर दिया जाता है। इसी तरह रेडियो सीडीएमए में उपयोगकर्ताओं के प्रत्येक समूह को एक साझला कोड दिया जाता है। कई कोड एक ही चैनल का प्रयोग कर लेते हैं, लेकिन केवल एक विशेष कोड से जुड़े उपयोगकर्ता ही संचार कर सकते हैं। सामान्य तौर पर, सीडीएमए दो बुनियादी श्रेणियों से संबंधित है: सिंक्रोनस (ऑर्थोगोनल कोड) और एसिंक्रोनस (छद्म यादृच्छिक कोड)। कोड-डिवीजन मल्टीप्लेक्सिंग (सिंक्रोनस सीडीएमए) डिजिटल मॉडुलन विधि उनके अनुरूप है जो साधारण रेडियो ट्रांसीवर में उपयोग की जाती हैं। रेडियो ट्रांसीवर मामले में, एक कम-आवृत्ति के डेटा सिग्नल को उच्च-आवृत्ति के शुद्ध ज्या तरंग वाहक के साथ समय-गुणा किया जाता है और प्रेषित किया जाता है। यह प्रभावी रूप से दो संकेतों का एक आवृत्ति कनवल्शन (वीनर-खिनचिन प्रमेय) है, जिसके परिणामस्वरूप एक संकीर्ण साइडबैंड वाला वाहक बनता है। डिजिटल मॉडुलन विधि के मामले में, ज्या तरंग वाहक के स्थान पर वॉल्श फ़ंक्शन का प्रयोग किया जाता है। ये द्विआधारी (बायनरी) वर्ग तरंगें हैं जो एक पूर्ण ऑर्थोनॉर्मल सेट बनाती हैं। डेटा सिग्नल भी बाइनरी है और एक साधारण एक्सओआर (XOR) फ़ंक्शन से समय गुणन प्राप्त किया जाता है। यह आमतौर पर परिपथ में गिल्बर्ट सेल मिश्रण होता है। सिंक्रोनस सीडीएमए डेटा स्ट्रिंग्स का प्रतिनिधित्व करने वाले वैक्टर के बीच ओर्थोगोनालिटी के गणितीय गुणों का प्रयोग करता है। उदाहरण के लिए, बाइनरी स्ट्रिंग 1011 को वेक्टर (1, 0, 1, 1) द्वारा दर्शाया जाता है। वेक्टरों (सदिशों) को उनके डॉट उत्पाद लेकर उनके संबंधित घटकों के उत्पादों को जोड़कर गुणा किया जा सकता है (उदाहरण के लिए, यदि u = (a, b) और v = (c, d) है, तो उनका डॉट उत्पाद u·v = ac + bd बना)। यदि डॉट उत्पाद शून्य है, तो दो वैक्टरों (सदिशों) को एक दूसरे से ओर्थोगोनल (लंबकोणीय) कहा जाता है। डॉट उत्पाद के कुछ गुण यह समझने में मदद करते हैं कि W-CDMA कैसे काम करता है। यदि सदिश a और b लंबकोणीय हैं, तो तथा: सिंक्रोनस सीडीएमए में प्रत्येक उपयोगकर्ता अपने सिग्नल को मॉडुलन (संशोधित) करने के लिए दूसरों के कोड से ऑर्थोगोनल कोड का उपयोग करता है। नीचे दिए गए चित्र में 4 परस्पर ओर्थोगोनल डिजिटल सिग्नल का एक उदाहरण दिखाया गया है। ऑर्थोगोनल कोड का क्रॉस-सहसंबंध शून्य के बराबर होता है; दूसरे शब्दों में, वे एक दूसरे के साथ हस्तक्षेप नहीं करते हैं। IS-95 के मामले में, 64-बिट वॉल्श कोड अलग-अलग उपयोगकर्ताओं को अलग करने के लिए सिग्नल को एन्कोड करने में उपयोग किए जाते हैं। चूंकि 64 वॉल्श कोड में से प्रत्येक अन्य सभी के लिए ऑर्थोगोनल है, इसलिये सिग्नल 64 ऑर्थोगोनल सिग्नल में चैनलाइज़ किए जाते हैं। निम्न उदाहरण दर्शाता है कि प्रत्येक उपयोगकर्ता के सिग्नल को कैसे एन्कोड और डीकोड किया जा सकता है। उदाहरण thumb|right|4 परस्पर ओर्थोगोनल डिजिटल सिग्नल का एक उदाहरण वैक्टर के एक सेट से शुरू करें जो परस्पर ओर्थोगोनल हैं। (हालांकि पारस्परिक ऑर्थोगोनैलिटी ही एकमात्र शर्त है, किंतु ये वैक्टर आमतौर पर डिकोडिंग में आसानी के लिए बनाए जाते हैं, उदाहरण के लिए वॉल्श मैट्रिसेस से कॉलम या पंक्तियाँ) ऑर्थोगोनल फ़ंक्शंस का एक उदाहरण दाईं ओर चित्र में दिखाया गया है। इन वैक्टर को अलग-अलग उपयोगकर्ताओं को सौंपा जाएगा और इन्हें कोड, चिप कोड या चिपिंग कोड कहा जाता है। संक्षिप्तता के लिये इस उदाहरण के बाकी हिस्सों में केवल दो बिट्स वाले कोड v का उपयोग किया गया है । प्रत्येक उपयोगकर्ता एक अलग कोड से जुड़ा होता है, जैसे मान लो v से। एक 1 बिट को एक धनात्मक कोड v संचारित करके दर्शाया गया है, और एक 0 बिट को एक नकारात्मक कोड −v द्वारा दर्शाया गया है। उदाहरण के लिए, यदि v = (v0, v1) = (1, −1) और उपयोगकर्ता जो डेटा संचारित करना चाहता है वह (1, 0, 1, 1) है, तो संचरित प्रतीक होंगे: (v, −v, v, v) = (v0, v1, −v0, −v1, v0, v1, v0, v1) = (1, −1, −1, 1, 1, −1, 1, −1). इस लेख के लिए, हम इस निर्मित वेक्टर को संचरित वेक्टर कहते हैं । प्रत्येक प्रेषक (सेन्डर) के पास उस सेट से चुना गया एक अलग, अद्वितीय वेक्टर v होता है, लेकिन संचरित वेक्टर की निर्माण विधि समान होती है। अब, हस्तक्षेप के भौतिक गुणों के कारण, यदि किसी बिंदु पर दो संकेत चरण (फेज़) में हैं, तो वे प्रत्येक संकेत के आयाम को दोगुना करने के लिए जुड़ते हैं, लेकिन यदि वे चरण में नहीं हैं, तो वे घटते हैं और एक संकेत देते हैं जो कि उन आयामों का अंतर होता है। डिजिटल रूप से, इस व्यवहार को घटक-घटक जोड़कर ट्रांसमिशन वैक्टरों के जोड द्वारा ठीक किया जा सकता है। यदि प्रेषक0 के पास कोड (1, -1) और डेटा (1, 0, 1, 1) है, और प्रेषक1 के पास कोड (1, 1) और डेटा (0, 0, 1, 1) है, और दोनों प्रेषक एक साथ संचारण करते हैं, तो यह तालिका कोडिंग चरणों का वर्णन करती है: चरण एनकोड प्रेषक0 एनकोड प्रेषक1 0 कोड0 = (1, −1), डेटा0 = (1, 0, 1, 1) कोड1 = (1, 1), डेटा1 = (0, 0, 1, 1) 1 एनकोड0 = 2(1, 0, 1, 1) − (1, 1, 1, 1) = (1, −1, 1, 1) एनकोड1 = 2(0, 0, 1, 1) − (1, 1, 1, 1) = (−1, −1, 1, 1) 2 सिग्नल0 = एनकोड0 ⊗ कोड0= (1, −1, 1, 1) ⊗ (1, −1)= (1, −1, −1, 1, 1, −1, 1, −1) सिग्नल1 = एनकोड1 ⊗ कोड1= (−1, −1, 1, 1) ⊗ (1, 1)= (−1, −1, −1, −1, 1, 1, 1, 1) क्योंकि सिग्नल0 और सिग्नल1 एक ही समय में वायु में प्रसारित होते हैं, वे जुडकर कच्चे सिग्नल बनाते हैं (1, −1, −1, 1, 1, −1, 1, −1) + (−1, −1, −1, −1, 1, 1, 1, 1) = (0, −2, −2, 0, 2, 0, 2, 0). इस कच्चे सिग्नल को इंटरफेरेंस (हस्तक्षेप) पैटर्न कहा जाता है। रिसीवर तब किसी भी ज्ञात प्रेषक के लिए प्रेषक के कोड को हस्तक्षेप पैटर्न के साथ जोड़कर एक उचित संकेत निकालता है। निम्न तालिका दर्शाती है कि यह कैसे काम करता है और दिखाती है कि सिग्नल एक दूसरे के साथ हस्तक्षेप नहीं करते हैं: चरणडिकोड प्रेषक0 डिकोड प्रेषक10कोड0 = (1, −1), सिग्नल = (0, −2, −2, 0, 2, 0, 2, 0)कोड1 = (1, 1), सिग्नल = (0, −2, −2, 0, 2, 0, 2, 0)1डिकोड0 = पैटर्न.वेक्टर0डिकोड1 = पैटर्न.वेक्टर12डिकोड0 = ((0, −2), (−2, 0), (2, 0), (2, 0)) · (1, −1)डिकोड1 = ((0, −2), (−2, 0), (2, 0), (2, 0)) · (1, 1)3डिकोड0 = ((0 + 2), (−2 + 0), (2 + 0), (2 + 0))डिकोड1 = ((0 − 2), (−2 + 0), (2 + 0), (2 + 0))4डेटा0=(2, −2, 2, 2), अर्थ (1, 0, 1, 1)डेटा1=(−2, −2, 2, 2), अर्थ (0, 0, 1, 1) इसके अलावा, डिकोडिंग के बाद, 0 से अधिक के सभी मानों की व्याख्या 1 के रूप में की जाती है, जबकि शून्य से कम के सभी मानों की व्याख्या 0 के रूप में की जाती है। उदाहरण के लिए, डिकोडिंग के बाद, डेटा0 (2, -2, 2, 2) है, लेकिन रिसीवर इसकी व्याख्या करता है (1, 0, 1, 1)। ठीक 0 के मान का अर्थ है कि प्रेषक ने कोई डेटा संचारित नहीं किया, जैसा कि निम्न उदाहरण में है: मान लें कि सिग्नल0 = (1, −1, −1, 1, 1, −1, 1, -1) अकेले प्रेषित होता है। निम्न तालिका रिसीवर का डीकोड दिखाती है: चरणडिकोड प्रेषक0डिकोड प्रेषक10कोड0 = (1, −1), सिग्नल = (1, −1, −1, 1, 1, −1, 1, −1)कोड1 = (1, 1), सिग्नल = (1, −1, −1, 1, 1, −1, 1, −1)1डिकोड0 = पैटर्न.वेक्टर0डिकोड1 = पैटर्न.वेक्टर12डिकोड0 = ((1, −1), (−1, 1), (1, −1), (1, −1)) · (1, −1)डिकोड1 = ((1, −1), (−1, 1), (1, −1), (1, −1)) · (1, 1)3डिकोड0 = ((1 + 1), (−1 − 1), (1 + 1), (1 + 1))डिकोड1 = ((1 − 1), (−1 + 1), (1 − 1), (1 − 1))4डेटा0 = (2, −2, 2, 2), अर्थ (1, 0, 1, 1)डेटा1 = (0, 0, 0, 0), जिसका अर्थ है कोई डेटा नहीं जब रिसीवर प्रेषक 1 के कोड का उपयोग करके सिग्नल को डीकोड करने का प्रयास करता है, तो डेटा सभी शून्य होता है, इसलिए क्रॉस-सहसंबंध शून्य के बराबर होता है और यह स्पष्ट होता है कि प्रेषक 1 ने कोई डेटा संचारित नहीं किया। एसिंक्रोनस सीडीएमए डायरेक्ट-सीक्वेंस स्प्रेड स्पेक्ट्रम निकट-दूर की समस्या जब मोबाइल-टू-बेस लिंक को ठीक से समन्वित नहीं किया जा सकता हो, विशेषकर हैंडसेट की गतिशीलता के कारण, तब एक अलग तरीके की आवश्यकता होती है। चूंकि ऐसा हस्ताक्षर अनुक्रम बनाना गणितीय रूप से संभव नहीं है जो मनमाने ढंग से यादृच्छिक प्रारंभिक बिंदुओं के लिए ओर्थोगोनल हो और जो कोड स्थान का पूर्ण उपयोग करते हो, इसलिये अद्वितीय "छद्म-यादृच्छिक" या "छद्म-शोर" अनुक्रमों को (जिनको स्प्रेडिंग (फैलाने वाले) अनुक्रम कहा जाता है को) एसिंक्रोनस (अतुल्यकालिक) सीडीएमए सिस्टम में उपयोग किया जाता है। एक प्रसार अनुक्रम (स्प्रेडिंग अनुक्रम) एक द्विआधारी (बायनरी) अनुक्रम है जो यादृच्छिक प्रतीत होता है लेकिन इच्छित रिसीवर द्वारा नियतात्मक तरीके से पुन: उत्पन्न किया जा सकता है। इन प्रसार अनुक्रमों का उपयोग एसिंक्रोनस सीडीएमए में उपयोगकर्ता के सिग्नल को उसी तरह से एन्कोड और डीकोड करने के लिए किया जाता है जैसे सिंक्रोनस सीडीएमए में ऑर्थोगोनल कोड का किया जाता है (उपरोक्त उदाहरण में दिखाया गया है)। ये प्रसार अनुक्रम सांख्यिकीय रूप से असंबंधित हैं, और बड़ी संख्या में प्रसार अनुक्रमों के योग के परिणामस्वरूप बहु अभिगम हस्तक्षेप (MAI) होता है जो एक गाऊसी शोर प्रक्रिया (आंकड़ों में केंद्रीय सीमा प्रमेय के बाद) द्वारा अनुमानित किया जाता है। गोल्ड कोड इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त प्रसार अनुक्रम का एक उदाहरण है, क्योंकि इन कोड के बीच कम सहसंबंध है। यदि सभी उपयोगकर्ताओं को समान शक्ति स्तर के साथ लिया जाता है, तो MAI का प्रसरण (जैसे, शोर शक्ति) उपयोगकर्ताओं की संख्या के प्रत्यक्ष अनुपात में बढ़ता है। दूसरे शब्दों में, तुल्यकालिक सीडीएमए के विपरीत, अन्य उपयोगकर्ताओं के संकेत आवश्यक संकेत के लिए शोर के रूप में दिखाई देंगे और उपयोगकर्ताओं की संख्या के अनुपात में वांछित संकेत के साथ थोड़ा हस्तक्षेप करेंगे। सीडीएमए के सभी रूप रिसीवर्स को अवांछित संकेतों के खिलाफ आंशिक रूप से भेदभाव करने देने के लिए स्प्रेड-स्पेक्ट्रम प्रसार कारक का उपयोग करते हैं । निर्दिष्ट प्रसार अनुक्रमों के साथ एन्कोड किए गए सिग्नल प्राप्त हो जाते हैं, जबकि दूसरे अनुक्रमों (या समान अनुक्रम लेकिन अलग-अलग समय ऑफसेट) वाले सिग्नल प्रसार कारक द्वारा कम किए गए वाइडबैंड शोर के रूप में दिखाई देते हैं। चूंकि प्रत्येक उपयोगकर्ता एमएआई (MAI) उत्पन्न करता है, इसलिये सीडीएमए ट्रांसमीटरों का सिग्नल शक्ति को नियंत्रित करना एक महत्वपूर्ण समस्या है। एक सीडीएम (सिंक्रोनस सीडीएमए), टीडीएमए, या एफडीएमए रिसीवर सैद्धांतिक रूप से इन प्रणालियों की ऑर्थोगोनैलिटी के कारण अलग-अलग कोड, टाइम स्लॉट या फ़्रीक्वेंसी चैनलों का उपयोग करके मनमाने ढंग के मजबूत संकेतों को पूरी तरह से अस्वीकार कर सकता है। यह अतुल्यकालिक सीडीएमए के लिए सम्भव नहीं है; अवांछित संकेतों की अस्वीकृति केवल आंशिक होती है। यदि कोई या सभी अवांछित संकेत वांछित संकेत से अधिक मजबूत हैं, तो वे इसे अभिभूत कर देंगे। यह नतीजतन किसी भी एसिंक्रोनस सीडीएमए सिस्टम की उस आवश्यकता को उभारता है कि रिसीवर पर देखे गए विभिन्न सिग्नल पावर स्तरों से यह लगभग मेल खाए। सीडीएमए सेल्युलर में, बेस स्टेशन प्रत्येक मोबाइल की ट्रांसमिट पावर को सख्ति से नियंत्रित करने के लिए एक तेज़ बंद-लूप पावर-कंट्रोल स्कीम का उपयोग करता है। 2019 में डॉपलर की निर्भरता और देरी की विशेषताओं के आधार पर कोड की आवश्यक लंबाई का सटीक अनुमान लगाने के लिए योजनाएं विकसित की गई। इसके तुरंत बाद मशीन लर्निंग पर आधारित तकनीकें, जो वांछित लंबाई और प्रसार गुणों के अनुक्रम उत्पन्न करती हैं, को भी प्रकाशित किया गया। ये पुराने गोल्ड और वेल्च अनुक्रमों के साथ अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हैं। ये लीनियर-फीडबैक-शिफ्ट-रजिस्टरों द्वारा उत्पन्न नहीं होते हैं, बल्कि इन्हें लुकअप टेबल में संग्रहित किया जाता है। अन्य तकनीकों की तुलना में अतुल्यकालिक सीडीएमए के लाभ निश्चित आवृत्ति स्पेक्ट्रम का योग्य व्यावहारिक उपयोग सिद्धांत रूप में सीडीएमए, टीडीएमए और एफडीएमए में बिल्कुल समान वर्णक्रमीय दक्षता (स्पेक्ट्रल ऐफिशीयेन्सी) है, लेकिन, व्यवहार में, प्रत्येक की अपनी-अपनी चुनौतियां हैं - सीडीएमए के मामले में शक्ति नियंत्रण, टीडीएमए के मामले में समय, और एफडीएमए के मामले में आवृत्ति उत्पादन/फ़िल्टरिंग। टीडीएमए सिस्टम को सभी उपयोगकर्ताओं के ट्रांसमिशन समय को सावधानीपूर्वक सिंक्रनाइज़ करना होता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सही समय स्लॉट में प्राप्त हों और एक दुसरे से हस्तक्षेप नहीं करें। चूंकि इसे मोबाइल वातावरण में पूरी तरह से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है, इसलिये प्रत्येक समय स्लॉट में एक गार्ड समय अवश्य होना चाहिए, जिससे उपयोगकर्ताओं के हस्तक्षेप की संभावना कम हो जाती है, लेकिन इससे वर्णक्रमीय दक्षता कम हो जाती है। इसी तरह, एफडीएमए सिस्टम को उपयोगकर्ता की गतिशीलता से हुए सिग्नल स्पेक्ट्रम के अप्रत्याशित डॉपलर शिफ्ट के कारण आसन्न चैनलों के बीच एक गार्ड बैंड का उपयोग अवश्य करना होता है। गार्ड बैंड इस संभावना को कम कर देंगे कि आसन्न चैनल आपस में हस्तक्षेप करें, लेकिन ये स्पेक्ट्रम के उपयोग को कम कर देंगे। संसाधनों का लचीला आवंटन एसिंक्रोनस सीडीएमए संसाधनों के लचीले रूप से आवंटन अर्थात सक्रिय उपयोगकर्ताओं के लिए प्रसार अनुक्रमों का आवंटन में एक प्रमुख लाभ प्रदान करता है। सीडीएम (सिंक्रोनस सीडीएमए), टीडीएमए और एफडीएमए के मामले में क्रमशः एक साथ ऑर्थोगोनल कोड, टाइम स्लॉट और फ़्रीक्वेंसी स्लॉट की संख्या निर्धारित होती है, इसलिए इकट्ठे उपयोगकर्ताओं की संख्या के संदर्भ में इनकी क्षमता सीमित है। सीडीएम, टीडीएमए और एफडीएमए सिस्टम के लिए निश्चित संख्या में ऑर्थोगोनल कोड, टाइम स्लॉट या फ़्रीक्वेंसी बैंड आवंटित किए जा सकते हैं, जो टेलीफोनी और पैकेटयुक्त डेटा ट्रांसमिशन की फटी प्रकृति के कारण कम उपयोग में आते हैं। एसिंक्रोनस सीडीएमए सिस्टम में उपयोगकर्ताओं की संख्या की कोई सख्त सीमा नहीं है, केवल वांछित बिट त्रुटि संभावना द्वारा नियंत्रित एक व्यावहारिक सीमा है क्योंकि एसआईआर (सिग्नल-टू-इंटरफेरेंस अनुपात) उपयोगकर्ताओं की संख्या के साथ विपरीत रूप से बदलता है। मोबाइल टेलीफोनी जैसे वातावरण में, एसिंक्रोनस सीडीएमए द्वारा वहन किया जाने वाला लाभ यह है कि पर्फोर्मेंस (बिट त्रुटि दर) को बेतरतीब ढंग से उतार-चढ़ाव करने की अनुमति दी जाती है, जिसमें औसत मूल्य उपयोगकर्ताओं की संख्या और उपयोग के प्रतिशत के गुणा द्वारा निर्धारित किया जाता है। मान लीजिए कि 2N उपयोगकर्ता जो केवल आधा समय बात करते हैं, तो 2N उपयोगकर्ताओं को उसी समान औसत बिट त्रुटि संभावना के साथ समायोजित किया जा सकता है जिससे N उपयोगकर्ता जो हर समय बात करते हैं उनका किया जाता है। यहां मुख्य अंतर यह है कि N उपयोगकर्ता जो हर समय बात करते हैं उनके लिए बिट त्रुटि संभावना स्थिर है, जबकि 2N उपयोगकर्ता जो आधा समय बात करते हैं उनके लिए यह एक यादृच्छिक मात्रा (उसी माध्य के साथ) है। दूसरे शब्दों में, एसिंक्रोनस सीडीएमए उन मोबाइल नेटवर्क के लिए आदर्श रूप से अनुकूल है जहां बड़ी संख्या में ट्रांसमीटर हैं और प्रत्येक ट्रांसमीटर अनियमित अंतराल पर अपेक्षाकृत कम मात्रा में ट्रैफिक उत्पन्न करते हैं। सीडीएम (सिंक्रोनस सीडीएमए), टीडीएमए, और एफडीएमए सिस्टम ऑर्थोगोनल कोड, टाइम स्लॉट या फ़्रीक्वेंसी चैनलों की निश्चित संख्या के कारण बर्स्ट ट्रैफ़िक में निहित कम संसाधनों को पुनर्प्राप्त नहीं कर सकते हैं जिन्हें प्रत्येक ट्रांसमीटरों को सौंपा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी टीडीएमए सिस्टम में N टाइम स्लॉट हैं और 2N उपयोगकर्ता हैं जो आधे समय बात करते हैं, तो आधे समय के लिये N से अधिक उपयोगकर्ताओं को N से अधिक समय स्लोट का उपयोग करने की आवश्यकता पडेगी। इसके अलावा, ऑर्थोगोनल-कोड, टाइम-स्लॉट या फ़्रीक्वेंसी-चैनल संसाधनों को लगातार आवंटित करने और हटाने के लिए इसे बहुत ओवरहेड की आवश्यकता होगी। तुलना करें तो, अतुल्यकालिक सीडीएमए ट्रांसमीटर केवल तब सिग्नल भेजते हैं जब उनके पास कहने के लिए कुछ होता है और जब नहीं होता तो वे हवा में लुप्त हो जाते हैं, जब तक वे सिस्टम से जुड़े होते हैं, तब तक उसी अनुक्रम को बनाए रखते हैं। सीडीएमए की स्प्रेड-स्पेक्ट्रम विशेषताएं अधिकांश मॉडुलन योजनाएं इस सिग्नल की बैंडविड्थ को कम करने का प्रयास करती हैं क्योंकि बैंडविड्थ एक सीमित संसाधन है। हालांकि, स्प्रेड-स्पेक्ट्रम तकनीक एक ट्रांसमिशन बैंडविड्थ का उपयोग करती है जो न्यूनतम आवश्यक सिग्नल बैंडविड्थ से कई अधिक ज़्यादा हैं। ऐसा करने के शुरुआती कारणों में से एक, मार्गदर्शन और संचार प्रणालियों सहित, सैन्य अनुप्रयोग थे। इन प्रणालियों को स्प्रेड स्पेक्ट्रम की सुरक्षा और जाम के प्रतिरोध के कारण स्प्रेड स्पेक्ट्रम का उपयोग करके डिजाइन किया गया था। एसिंक्रोनस सीडीएमए में कुछ स्तर की गोपनीयता अंतर्निहित है क्योंकि सिग्नल एक छद्म-यादृच्छिक कोड का उपयोग करके फैलता है; यह कोड स्प्रेड-स्पेक्ट्रम संकेतों को यादृच्छिक रूप जैसा या शोर जैसे गुण जैसा दर्शाता है। एक रिसीवर डेटा को एन्कोड करने के लिए उपयोग किए जाने वाले छद्म-यादृच्छिक अनुक्रम के ज्ञान के बिना इस संचरण को डिमॉड्यूलेट नहीं कर सकता है। सीडीएमए जैमिंग के लिए भी प्रतिरोधी है। जैमिंग सिग्नल में सिग्नल को जाम करने के लिए केवल सीमित मात्रा में शक्ति उपलब्ध होती है। जैमर या तो सिग्नल की पूरी बैंडविड्थ पर अपनी ऊर्जा फैला सकता है या पूरे सिग्नल के केवल एक हिस्से को जाम कर सकता है। सीडीएमए संकीर्ण-बैंड हस्तक्षेप (नैरो-बैंड इंटरफेरेंस) को भी प्रभावी ढंग से अस्वीकार कर सकता है। चूंकि नैरो-बैंड इंटरफेरेंस स्प्रेड-स्पेक्ट्रम सिग्नल के केवल एक छोटे से हिस्से को प्रभावित करता है, इसलिए इसे बिना ज्यादा जानकारी खोए नॉच फिल्टरिंग के जरिए आसानी से हटाया जा सकता है। इस खोए हुए डेटा को पुनर्प्राप्त करने में सहायता के लिए कनवल्शन एन्कोडिंग और इंटरलीविंग का उपयोग किया जा सकता है। सीडीएमए सिग्नल मल्टीपाथ फ़ेडिंग के लिए भी प्रतिरोधी हैं। चूंकि स्प्रेड-स्पेक्ट्रम सिग्नल एक बड़े बैंडविड्थ पर कब्जा करता है, इसलिये इसका केवल एक छोटा सा हिस्सा ही किसी समय मल्टीपाथ के कारण लुप्त होगा। नैरो-बैंड हस्तक्षेप की तरह, इसके परिणामस्वरूप केवल थोडा ही डेटा का नुकसान होगा और इसे भी ठीक किया जा सकता है। एक अन्य कारण कि सीडीएमए मल्टीपाथ हस्तक्षेप के लिए प्रतिरोधी है ये है कि प्रेषित छद्म-यादृच्छिक कोड के विलंबित संस्करणों का मूल छद्म-यादृच्छिक कोड के साथ खराब सहसंबंध होता है, और इस प्रकार वह एक अन्य उपयोगकर्ता के रूप में दिखाई देता है, जिसे रिसीवर पर अनदेखा किया जाता है। दूसरे शब्दों में, जब तक मल्टीपाथ चैनल कम से कम एक चिप की देरी को प्रेषित करेगा, तब तक मल्टीपाथ सिग्नल रिसीवर तक कुछ इस तरह पहुंचेंगे कि वे इच्छित सिग्नल से कम से कम एक चिप के समय पर स्थानांतरित होंगे। छद्म-यादृच्छिक कोड के सहसंबंध गुण ऐसे हैं कि यह थोडी-सी देरी मल्टीपाथ को इच्छित सिग्नल से असंबंद्धित प्रतीत करवाती है, और इस कारण से इसे अनदेखा कर दिया जाता है। कुछ सीडीएमए डिवाइस रेक रिसीवर का उपयोग करते हैं, जो सिस्टम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए मल्टीपाथ विलंब घटकों का प्रयोग करता है। एक रेक रिसीवर कई सहसंबंधकों से जानकारी को जोड़ता है, प्रत्येक सहसंबंधक एक अलग पथ देरी पर ट्यून किया जाता है, जिससे एक साधारण रिसीवर, जिसमें सबसे मजबूत सिग्नल के पथ विलंब को एक ही सहसंबंध से ट्यून किया जाता है, की तुलना में सिग्नल का एक मजबूत संस्करण तैयार होता है। फ़्रिक्वेंसी पुन: उपयोग एक सेलुलर सिस्टम के भीतर अन्य सेल साइटों पर उसी रेडियो चैनल आवृत्ति का पुन: उपयोग करने की क्षमता है। एफडीएमए और टीडीएमए प्रणालियों में आवृत्ति नियोजन एक महत्वपूर्ण चीज़ है। विभिन्न सेल में उपयोग की जाने वाली आवृत्तियों की सावधानीपूर्वक योजना बनाई जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विभिन्न सेल से संकेत एक दूसरे के साथ हस्तक्षेप न करें। सीडीएमए प्रणाली में प्रत्येक सेल में समान आवृत्ति का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि इसमें छद्म-यादृच्छिक कोड का उपयोग करके चैनलीकरण किया जाता है। प्रत्येक सेल में समान आवृत्ति का पुन: उपयोग करने से सीडीएमए प्रणाली में आवृत्ति नियोजन की आवश्यकता समाप्त हो जाती है; हालांकि, विभिन्न छद्म-यादृच्छिक अनुक्रमों की योजना यह सुनिश्चित करने के लिए की जानी चाहिए कि एक सेल से प्राप्त सिग्नल पास के दुसरे सेल से सिग्नल से सहसंबंधित न हों। चूंकि आसन्न सेल समान आवृत्तियों का उपयोग करते हैं, इसलिये सीडीएमए सिस्टम में सॉफ्ट हैंड-ऑफ करने की क्षमता होती है। सॉफ्ट हैंड-ऑफ मोबाइल टेलीफोन को दो या दो से अधिक सेल के साथ एक साथ संचार करने की अनुमति देते हैं। हैंड-ऑफ़ पूर्ण होने तक सर्वोत्तम सिग्नल गुणवत्ता का चयन किया जाता है। यह अन्य सेलुलर सिस्टम में उपयोग किए जाने वाले हार्ड हैंड-ऑफ से अलग है। हार्ड-हैंड-ऑफ की स्थिति में, जैसे-जैसे मोबाइल टेलीफोन हैंड-ऑफ के करीब पहुंचता है, सिग्नल की शक्ति अचानक बदल सकती है। इसके विपरीत, सीडीएमए सिस्टम सॉफ्ट हैंड-ऑफ का उपयोग करते हैं, जो कि डिटेक्ट नहीं किये जा सकते और अधिक विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाला संकेत प्रदान करता है। सहयोगात्मक सीडीएमए अपलिंक के लिए सहयोगात्मक सीडीएमए नामक एक नयी सहयोगी बहु-उपयोगकर्ता संचरण और पहचान योजना Indu L. Shakya 2011 High User Capacity Collaborative CDMA IET Communications की जांच की गई है जो एमएआई-सीमित वातावरण में उपयोगकर्ता क्षमता को प्रसारण लंबाई से बहुत परे बढ़ाने के लिए उपयोगकर्ताओं के लुप्त होती चैनल सिग्नेचरों के अंतर का प्रयोग करती है। कुछ लेखक बताते हैं कि इस वृद्धि को हैफ्लैट फ़ेडिंग चैनलों में कम जटिलता और उच्च बिट त्रुटि दर पर प्राप्त करना संभव है, जो अतिभारित सीडीएमए सिस्टम के लिए एक प्रमुख शोध चुनौती है। इस तकनीक में, पारंपरिक सीडीएमए की तरह प्रति उपयोगकर्ता को एक अनुक्रम का देने के बजाय, लेखक समान प्रसार अनुक्रम को साझा करने और समूह प्रसार और वि-प्रसार संचालन को सक्षम करने के लिए उपयोगकर्ताओं की एक छोटी संख्या का समूह बनाते हैं। नए सहयोगी बहु-उपयोगकर्ता रिसीवर में दो चरण होते हैं: समूहों के बीच एमएआई को दबाने के लिए समूह बहु-उपयोगकर्ता पहचान (एमयूडी) चरण और एक कम-जटिलता वाले अधिकतम-संभावना का पता लगाने का चरण ताकि संयुक्त रूप से सह-प्रसार उपयोगकर्ताओं के डेटा को न्यूनतम यूक्लिडियन-दूरी माप और उपयोगकर्ताओं के चैनल-लाभ गुणांक का उपयोग करके पुनर्प्राप्त किया जा सके। एक उन्नत सीडीएमए संस्करण जिसे इंटरलीव-डिवीजन मल्टीपल एक्सेस (आईडीएमए) के रूप में जाना जाता है, सीडीएमए सिस्टम में उपयोग किए जाने वाले हस्ताक्षर अनुक्रम के स्थान पर ऑर्थोगोनल इंटरलीविंग का उपयोग उपयोगकर्ता पृथक्करण के एकमात्र साधन के रूप में करता है। सीडीएमए नेटवर्क ऑपरेटर ऑलटेल, वेरिज़ोन वायरलेस, अमेरिका सेलुलर और क्वेस्ट संचार संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर सीडीएमए नेटवर्कों पर कार्य करते हैं। विश्व भर में, वहाँ से 60 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं को सेवा उपलब्ध करा रहे हैं। इन्हें भी देखें जीएसएम सीडीएमए2000 ऑर्थोगोनल वेरिएबल स्प्रेडिंग फैक्टर (OVSF), सीडीएमए का कार्यान्वयन छद्म-यादृच्छिक शोर टिप्पणी nb सन्दर्भ 30em बाहरी कड़ियाँ विस्तृत वर्णक्रम का जन्म सीडीएमए - अवलोकन एवं संसाधन सीडीएमए -निदेशिका एवं जानकारी के साधन सिविल स्प्रैड स्पेक्ट्रम हिस्ट्री सीडीएमए क्या है? श्रेणी:मल्टीप्लेक्सिंग श्रेणी:मोबाइल सेवा श्रेणी:रेडियो संसाधन प्रबंधन