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आयते ततहीर
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आयते ततहीर (آیتِ تطہیر; آية التطهير), क़ुरआन करीम में सूरा अल-अहज़ाब की आयत 33 (और कुछ औक़ात आयत 32 भी शामिल है) से हवाले है। ये आयात अज़वाजे मुतह्हरात (नबी की बीवियों) के लिए रहनुमाई फ़राहिम करती हैं, उनके दर्जात को पाक और बुलंद करती हैं, उन्हें रूहानी गंदगी से पाक करती हैं।
आयत और तर्जुमा
इरशादे हक़ तआला है:
{یَا نِسَائَ النَّبِیِّ لَسْتُنَّ کَأَحَدٍ مِّنَ النِّسَائِ إِنِ اتَّقَیْْتُنَّ فَلَا تَخْضَعْنَ بِالْقَوْلِ فَیَطْمَعَ الَّذِیْ فِیْ قَلْبِہِ مَرَضٌ وَّقُلْنَ قَوْلاً مَّعْرُوفًا ٭وَقَرْنَ فِیْ بُیُوتِکُنَّ وَلَا تَبَرَّجْنَ تَبَرُّجَ الْجَاہِلِیَّۃِ الْأُولٰی وَأَقِمْنَ الصَّلَاۃَ وَآتِیْنَ الزَّکَاۃَ وَأَطِعْنَ اللّٰہَ وَرَسُولَہُ إِنَّمَا یُرِیْدُ اللّٰہُ لِیُذْہِبَ عَنکُمُ الرِّجْسَ أَہْلَ الْبَیْْتِ وَیُطَہِّرَکُمْ تَطْہِیْرًا} [सूरा अल-अहज़ाब:32۔33]
तर्जुमा: ''32. ऐ नबी की बीवियों! तुम और मामूली औरतों की सी तो हो वही (बस) अगर तुम को परहेज़गारी मंज़ूर रहे तो (अजनबी आदमी से) बात करने में नरम नरम (लगी लिपटी) बात न करो ताकि जिसके दिल में (शहवते ज़िना का) मर्ज़ है वह (कुछ और) इरादा (न) करे 33. और (साफ़-साफ़) उनवाने शाइस्ता से बात किया करो और अपने घरों में निचली बैठी रहो और अगले ज़माने जाहिलियत की तरह अपना बनाव सिंगार न दिखाती फिरो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ा करो और (बराबर) ज़कात दिया करो और ख़ुदा और उसके रसूल की इताअत करो। ऐ (पैग़म्बर के) अहले बैत! ख़ुदा तो बस ये चाहता है कि तुमको (हर तरह की) बुराई से दूर रखे और जो पाक व पाकीज़ा दिखने का हक़ है वैसा पाक व पाकीज़ा रखे।''"Al-Ahzab [33:33] - फ़ारूक़ ख़ान & नदवी - Tanzil Quran Navigator" https://tanzil.net
समझ
अहले सुन्नत में
इमाम हकीम अपनी किताब "मुस्तदरक सहीहैन" में इब्ने जाफ़र इब्ने अबू तालिब से नक़ल करते हैं कि:
जब हबीबे ख़ुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने देखे की रहमते इलाही आने वाली है, तो फ़रमाया: "मुझे बुलाओ! मुझे बुलाओ!" सफ़िया ने पूछा: "या रसूलुल्लाह! मैं आपके लिए किसे बुलाऊं?" उसने जवाब दिया: "मेरे घर वालों को बुलाओ, यानी अली, फ़ातिमा, हसन और हुसैन (अलैहिमुस्सलाम)"। इस तरह उनको हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के क़रीब आने के लिए बुलाया गया और जब सब जमा हुए तो हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनपर चादर डाल दिया और उसके बाद में अपने हाथ उठाकर दुआ की और फ़रमाया: "ऐ अल्लाह! ये मेरे ख़ान्दान के अफ़राद हैं। मुझे और मेरी आल पर अपनी रहमतें नाज़िल फ़रमा"। इसी दौरान अल्लाह तआला ने आयत नाज़िल फ़रमाई:
"ऐ (पैग़म्बर के) अहले बैत! ख़ुदा तो बस ये चाहता है कि तुमको (हर तरह की) बुराई से दूर रखे और जो पाक व पाकीज़ा दिखने का हक़ है वैसा पाक व पाकीज़ा रखे।" (सूरा अल-अहज़ाब आयत 33)
इस हदीस को नक़ल करने के बाद हकीम कहते हैं कि हदीस अपने मसदर के एतिबार से सहीह है।"The Verse of Purification in Sunni Sources | Verse of Purification in the Light of Quran & Hadith | Al-Islam.org" https://al-islam.org/verse-purification-light-quran-hadith-sayyid-murtadha-al-askari/verse-purification-sunni-sources
हालांकि, अहले सुन्नत में अहले बैत (नबी के ख़ान्दान) सिर्फ़ खुद नबी, अली, फ़ातिमा, हसन और हुसैन (जैसा कि आम तौर पर अहले तशय्युअ में) पर मुश्तमिल नहीं है, इसमें आप की दूसरी बीवियों और सहाबाए किराम भी शामिल हैं।
अहले तशय्युअ में
अबू जाफ़र (अ.स.) की एक मशहूर रिवायत है:
उन्होंने अपने पिता इमाम सज्जाद (अ.स.) से रिवायत किया कि उन्होंने मुक़द्दसा आयत के बारे में फ़रमाया:
"और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दो और तुम खुद भी उसके पाबन्द रहो..." (सूरा ताहा आयत 132)
ये अली, फ़ातिमा, हसन और हुसैन (अ.स.) के लिए नाज़िल हुई थी। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर सुबह फ़ातिमा (अ.स.) के दरवाज़े पर तशरीफ़ लाते और फ़रमाते: "सलाम हो, ऐ अहले बैत, तुमपर अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हो। दुआएं! अल्लाह तुमपर रहम फ़रमाए।"
"ऐ (पैग़म्बर के) अहले बैत! ख़ुदा तो बस ये चाहता है कि तुमको (हर तरह की) बुराई से दूर रखे और जो पाक व पाकीज़ा दिखने का हक़ है वैसा पाक व पाकीज़ा रखे।"
मज़ीद बराँ, तफ़सीर फ़ुरात में आस आयत की तफ़सीर है, "और अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म दो और तुम खुद भी उसके पाबन्द रहो", मंदर्जा ज़ील है:
अल्लाह तआला ने यक़ीनी तौर पर हर घर के लोगों के लिए ऊपर का हुक्म दिया है। अलबत्ता ये ज़रूरी था कि आपके घर वालों को आम लोगों पर फ़ज़ीलत दिखाई जाए। इसलिए जब ये आयत नाज़िल हुई तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर रोज़ सुबह की नमाज़ से पहले अली, फ़ातिमा, हसन और हुसैन (अलैहिमुस्सलाम) के दरवाज़े पर तशरीफ़ लाते और फ़रमाते: “तुम पर सलामती हो और अल्लाह की रहमत हो।”
"आप पर भी सलाम हो, या रसूलुल्लाह" - अली, फ़ातिमा, हसन और हुसैन (अ.स.) ने जवाब दिया। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दरवाज़े पर दस्तक दी और फ़रमाया: "दुआएं! दुआएं! अल्लाह तुम पर रहम करे। ऐ (पैग़म्बर के) अहले बैत! ख़ुदा तो बस ये चाहता है कि तुमको (हर तरह की) बुराई से दूर रखे और जो पाक व पाकीज़ा दिखने का हक़ है वैसा पाक व पाकीज़ा रखे।"
उन्होंने अपने आख़िरी दिनों तक यह मशक़ जारी रखी।"The Verse of Purification in Shia Sources | Verse of Purification in the Light of Quran & Hadith | Al-Islam.org" https://al-islam.org/verse-purification-light-quran-hadith-sayyid-murtadha-al-askari/verse-purification-shia-sources
हालांकि, अहले सुन्नत के बरअक्स, अहले तशय्युअ अली के अलावा पहले तीन ख़ुलाफ़ा और फ़ातिमा के अलावा नबी की बीवियों (अज़वाजे मुतह्हरात) को जायज़ नहीं मानता।
सन्दर्भ
श्रेणी:क़ुरआन की आयतें