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जौनपुरी (बहुविकल्पी)
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जौनपुरी का अर्थ जौनपुर से जुड़े विषय या वहाँ का कोई निवासी होता है। इसके अतिरिक्त अन्य प्रयोग इस प्रकार हैं:
जौनपुरी: जौनपुरी राग को आसावरी ठाट से उपजा हुआ राग माना गया है। इस राग में ग , ध, नी स्वर कोमल लगते हैं । आरोह में ग (गंधार ) वर्ज्य है अर्थात गाते बजाते समय आरोह में ग स्वर को छोड़ देते हैं। अवरोह में सातों स्वर प्रयोग किये जाते हैं। अतः इस राग की जाती षाडव-संपूर्ण है। जौनपुरी राग का वादी स्वर ध (धैवत )और संवादी स्वर ग (गंधार) है।
हिम्मत जौनपुरी: हिम्मत जौनपुरी राही मासूम रजा का दूसरा उपन्यास था जो मार्च १९६९ में प्रकाशित हुआ। आधा गांव की तुलना में यह जीवन चरितात्मक उपन्यास बहुत ही छोटा है। हिम्मत जौनपुरी लेखक का बचपन का साथी था और लेखक का विचार है कि दोनों का जन्म एक ही दिन पहली अगस्त सन सत्तईस को हुआ था। हिम्मत जौनपुरी एक ऐसे निहत्थे की कहानी है जो जीवन भर जीने का हक माँगता रहा, सपने बुनता रहा परन्तु आत्मा की तलाश और सपनों के संघर्ष में उलझ कर रह गया। यह बंबई के उस फिल्मी माहौल की कहानी भी है जिसकी भूल-भुलैया और चमक-दमक आदमी को भटका देती है और वह कहीं का नहीं रह जाता।
मुहम्मद जौनपुरी: सय्यद मुहम्मद जौनपुरी (उर्दू: سید محمد جونپورى) (सितम्बर 9, 1443 – अप्रेल 23, 1505 ई) ने मक्का में हिजरी वर्ष 901 में स्वयं को इमाम महदी घोषित किया। इसके कारण महदविया में उन्हे आदरपूर्वक देखा जाता है। उनका जन्म जौनपुर, उत्तरप्रदेश, भारत हुआ था तथा उन्होंने पूरे भारत, अरबी प्रायद्वीप और प्राचीन ख़ुरासान का भ्रमण किया था, जहाँ 63 वर्ष की आयु में फ़राह, अफ़ग़ानिस्तान में उनका निधन हो गया।
जौनपुरी गाँव, पुनपुन (पटना): जौनपुरी पुनपुन, पटना, बिहार स्थित एक गाँव है।