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411 समाचार
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अहिल्या स्थान

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अहिल्या स्थान या अहियारी भारत के बिहार राज्य के दरभंगा जिले सदर अनुमंडल के अंतर्गत स्थित एक गाँव है। कमतौल रेलवे स्टेशन से उतरकर यहाँ पहुंचा जाता है। यह स्थान सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी से 40 कि॰मी॰ पूर्व में स्थित है। कहा जाता है कि ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा से इसी स्थान पर राम ने अहिल्या का उद्धार किया था। डॉ राम प्रकाश शर्मा के अनुसार "इसमें कोई संदेह नहीं है कि अहिल्या-नगरी अथवा गौतम आश्रम मिथिला में ही था। भोजपुर में राम ने ताड़का -बध किया था। वहाँ सानुज राम ने ऋषि विश्वामित्र की यज्ञ की रक्षा उत्पाती राक्षसों का अपनी शक्ति से दमन कर की थी। मिथिला राज्य में प्रवेश कर पहले राम ने अहिल्या का उद्धार किया, और तत्पश्चात वहाँ से प्राग उत्तर दिशा (ईशान कोण) में चलकर वे ऋषि विश्वामित्र के साथ विदेह नागरी जनकपुर पहुंचे।[मिथिला का इतिहास, लेखक : डॉ राम प्रकाश शर्मा, प्रकाशक : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा, पृष्ठ संख्या : 455] right|thumb| अहिल्या का उद्धार, चित्र : रवि वर्मा रामायण में वर्णित कथा के अनुसार राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिलापुरी के वन उपवन आदि देखने के लिये निकले तो उन्होंने एक उपवन में एक निर्जन स्थान देखा। राम बोले, "भगवन्! यह स्थान देखने में तो आश्रम जैसा दिखाई देता है किन्तु क्या कारण है कि यहाँ कोई ऋषि या मुनि दिखाई नहीं देते?" विश्वामित्र जी ने बताया, यह स्थान कभी महर्षि गौतम का आश्रम था। वे अपनी पत्नी के साथ यहाँ रह कर तपस्या करते थे। एक दिन जब गौतम ऋषि आश्रम के बाहर गये हुए थे तो उनकी अनुपस्थिति में इन्द्र ने गौतम ऋषि के वेश में आकर अहिल्या से सहवास की याचना की। अहिल्या ने इन्द्र को पहचान लिया और स्वीकृति दी। जब इन्द्र अपने लोक लौट रहे थे तभी अपने आश्रम को वापस आते हुए गौतम ऋषि की दृष्टि इन्द्र पर पड़ी जो उन्हीं का वेश धारण किये हुए था। क्रोधवश उन्होंने इन्द्र को शाप दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को शाप दिया कि तू हजारों वर्षों तक केवल हवा पीकर कष्ट उठाती हुई यहाँ राख में पड़ी रहे। जब राम इस वन में प्रवेश करेंगे तभी उनकी कृपा से तेरा उद्धार होगा। तभी तू अपना पूर्व शरीर धारण करके मेरे पास आ सकेगी। यह कह कर गौतम ऋषि इस आश्रम को छोड़कर हिमालय पर जाकर तपस्या करने लगे। इसलिये विश्वामित्र जी ने कहा "हे राम! अब तुम आश्रम के अन्दर जाकर अहिल्या का उद्धार करो।" विश्वामित्र जी की बात सुनकर वे दोनों भाई आश्रम के भीतर प्रविष्ट हुए। वहाँ तपस्या में निरत अहिल्या कहीं दिखाई नहीं दे रही थी, केवल उसका तेज सम्पूर्ण वातावरण में व्याप्त हो रहा था। जब अहिल्या की दृष्टि राम पर पड़ी तो उनके पवित्र दर्शन पाकर एक बार फिर सुन्दर नारी के रूप में दिखाई देने लगी। नारी रूप में अहिल्या को सम्मुख पाकर राम और लक्ष्मण ने श्रद्धापूर्वक उनके चरण स्पर्श किये।[ब्रह्म पुराण, 87] उससे उचित आदर सत्कार ग्रहण कर वे मुनिराज के साथ पुनः मिथिला पुरी को लौट आये।[वाल्मीकि रामायण, बाल कांड, सर्ग 48-4-33, 49-1.24] सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ भारत कोश में अहल्या का वर्णन अहल्या की कथा श्रेणी:बिहार में पर्यटन MP 12th Blueprint 2023 https://web.archive.org/web/20221209070022/https://www.modelpaper.co.in/2022/08/mp-board-12th-blueprint-2023-mpbse-12th.html 9 दिसंबर 2022 Bihar Board 12th Model Paper 2023 https://web.archive.org/web/20221209070013/https://www.modelpaper.co.in/2020/06/bihar-board-12th-model-paper-2021bihar.html 9 दिसंबर 2022 MP Board 10th Blueprint 2023 https://web.archive.org/web/20221209070020/https://www.gkpadmodelpaper.in/2020/12/mp-board-10th-class-blue-print-2021.html 9 दिसंबर 2022