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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कल्माषपाद

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सितंबर 2014 कल्माषपाद इक्ष्वाकुवंशीय नरेश ऋतुपर्ण के पौत्र तथा सुदास (सौदास) के पुत्र थे। इनका अन्य नाम 'मित्रसह' भी था। इनकी रानी मदयती थीं जिन्हें इन्होंने वसिष्ठ की सेवा में अर्पित किया (महाभारत, शांतिपर्व २३४-३०)। कथा पौराणिक इतिवृत्त है कि एक दिन राजकुमार कल्माषपाद शिकार से लौट रहे थे। पुल के तंग रास्ते पर एक ही व्यक्ति चल सकता था। उसी मार्ग पर दूसरी ओर से ऋषि वशिष्ठ के ज्येष्ठ पुत्र शक्ति मुनि आ रहे थे। राजकुमार कल्माषपाद ने शक्ति मुनि को पहले पुल पार करने के लिए रास्ता नहीं दिया। दोनों ही हठधर्मी से अड़े रहे। बहुत देर होने पर शक्ति मुनि ने नाराज होकर कल्माषपाद को श्राप देकर कहा, 'अरे निकृष्ठ! तू राक्षस हो जा।' राजकुमार कल्माषपाद तत्काल राक्षस बन गया, लेकिन राक्षस में बदलते ही वह शक्ति मुनि सहित ऋषि वशिष्ठ के अन्य सभी पुत्रों का भी भक्षण कर गया। शाप मिलते ही विश्वामित्र ऋषि से प्रेरित किंकर नामक राक्षस ने इनके शरीर में प्रवेश किया। राक्षस-स्वभाव-युक्त होने का शाप एक तपस्वी ब्राह्मण ने भी दिया था जिसे इन्होंने अपने रसोइए को मनुष्य का मांस देने को प्रेरित किया था। राक्षस स्वभाव से युक्त होकर शक्तिमुनि तथा वसिष्ठ के अन्य पुत्रों का इन्होने भक्षण कर लिया। उस समय शक्ति मुनि की पत्नी गर्भवती थीं। उनके गर्भ में 12 वर्ष तक रहने के पश्चात पाराशर मुनि का जन्म हुआ। इसी अवस्था में इन्होंने मैथुन के लिए उद्यत एक ब्राह्मण का भक्षण कर लिया था अत: ब्राह्मणपत्नी आंगिरसी ने इन्हें अपनी पत्नी से समागम करते ही मृत्यु होने का शाप दिया। वसिष्ठ ने इनकी पत्नी के गर्भ से अश्मक नामक पुत्र उत्पन्न किया। अपनी घोर तपस्या, संयम और साधना से उन्होंने शीघ्र ही ऋषि की पदवी प्राप्त कर ली। दूसरी ओर महर्षि वशिष्ठ ने राजकुमार कल्माषपाद को भी क्षमादान देकर अपनी योग शक्ति से उन्हें राक्षस शरीर के श्राप से मुक्त कर दिया। जब ऋषि पाराशर को कल्माषपाद द्वारा राक्षस रूप में अपने पिता तथा अन्य पूर्वजों के भक्षण करने का रहस्य ज्ञात हुआ, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए और प्रतिशोध लेने पर उतारू हो गए। तब महर्षि वशिष्ठ ने अपने ऋषि पौत्र पाराशर को कहा, 'हे पुत्र पाराशर! क्षमा परम धर्म है। इसलिए तुम क्रोध और प्रतिशोध की भावना त्यागकर क्षमाशील बनो! यही ऋषितुल्य आचरण होगा।' पाराशर ने क्रोध और प्रतिशोध की भावना त्यागकर कल्माषपाद को क्षमा कर दिया। श्रेणी:पौराणिक पात्र