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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

स्वराज्य (हिन्दी समाचारपत्र)

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स्वराज्य इलाहाबाद से निकलने वाला एक राष्ट्रवादी साप्ताहिक समाचारपत्र था। यह 1907 में उर्दू में निकलने वाला एक ऐसा अखबार था जिसने ढाई साल में ही आठ सम्पादक देखे। इसके सम्पादक जल्द बदलते रहे, क्योंकि अखबार ने अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध अपनी कलम की धार कभी भोथरी नहीं होने दी। इसके एवज में सम्पादकों को कालापानी की सजा हो गई। सात सम्पादकों को कुल मिलाकर 94 साल 9 महीने की सजा हुई। परिचय स्वदेशी आंदोलन के समय 1907 में उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के निवासी शांति नारायण भटनागर ने अपनी जमीन-जायदाद बेचकर स्वराज्य नामक साप्ताहिक अखबार निकाला। स्वराज्य अखबार के सम्पादकों को कुल 125 वर्ष के काले पानी की सजा हुई, फिर भी डिगे नहीं। स्वराज के संस्थापक भटनागर जी 'रायजादा' कहलाते थे उन्हें भी सरकार ने नहीं छोड़ा। तीन वर्षों का सश्रम कारावास हुआ। स्वराज प्रेस जब्त कर लिया गया। नया प्रेस खुला। बलिदानी सम्पादकों ने फिर कमान संभाल ली। होती लाल वर्मा को 10 वर्ष तथा बाबू राम हरि को 11 अंकों के प्रकाशन के बाद 21 वर्षों की सजा हुयी। मुंशी राम सेवक नये सम्पादक के रूप में कलेक्टर को अपना घोषणा पत्र ही दे रहे थे कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कलेक्टर ने चुनौती दी कि और भी कोई है इस तख्त पर गद्दीनशीन होने के लिये। तब आगे आये देहरादून के नन्द गोपाल चोपड़ा, जिन्हें 12 अंकों के सम्पादन के बाद 30 वर्षों की सजा दी गयी। तब एकदम से 12 नामों की सूची सम्पादक बनने के लिए आयी। सभी ने कहा हम करेंगे सम्पादन। किन्तु पंजाब के फील्ड मार्शल कहे जाने वाले लद्धा राम कपूर सम्पादक बने। उन्हें तीन सम्पादकीय लिखने पर प्रति सम्पादकीय 10 वर्ष अर्थात् कुल तीस वर्षों की सजा हुई। इसके पश्चात अमीर चन्द्र जी इसके सम्पादक बने। किन्तु यहां महत्व का विषय यह है कि हर सम्पादक के जेल जाने के बाद स्वराज में एक विज्ञापन छपता था सम्पादक चाहिए- वेतन दो सूखे ठिक्कड़ (रोटी), एक गिलास ठंडा पानी, हर सम्पादकीय लिखने पर 10 वर्ष काले पानी की कैद। फिर भी लोग डरे नहीं, दमन के सम्मुख झुके नहीं। स्वाभाविक रूप से उनकी प्रेरणा का आधार बिगड़ती व्यवस्था का अन्तर्नाद ही था।आज के मीडिया को याद है वह गौरवशाली अतीत?जून 2020 InternetArchiveBot (प्रभासाक्षी) स्वराज एक दृष्टि में प्रकाशन वर्ष - १९०७ प्रकाशक - भारतमात सोसायटी, इलाहाबाद प्रथम सम्पादक - शान्तिनारायण भटनागर, जो पहले लाहौर से प्रकाशित 'हिन्दुस्तान' का सम्पादन कर चुके थे। ध्येयवाक्य - हिन्दुस्तान के हम हैं, हिन्दुस्तान हमारा है। कुल प्रकाशित अवधि - ढाई वर्ष कुल प्रकाशित अंक - 75 कुल संपादक - 8 संपादक और उनकी सजा शांतिनारायण भटनागर - 2 वर्ष की सजा और 500 रुपए जुर्माना रामदास - अखबार नहीं चला पाए होतीलाल वर्मा - 10 वर्ष की सजा बाबू राम हरी - 21 वर्ष की सजा रामसेवक - लाहौर से आए और घोषणा पत्र दाखिले के दौरान ही गिरफ्तार कर लिए गए। नंदगोपाल - 30 वर्ष की सजा लद्दाराम - 30 वर्ष की सजा अमीर चंद बंबवाल- 1 वर्ष की सजा सभी संपादकों को कुल हुई सजा - 94 वर्ष 9 माहhttps://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/mp-news-7-editors-were-sentenced-to-94-years-in-two-and-a-half-years-on-penalties-against-british-oppression-065504-4753424.html अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ कलम चलाने पर ढाई साल में 7 संपादकों को हुई थी 94 साल की सजा 24 जुलाई 2019 https://web.archive.org/web/20190724034624/https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/mp-news-7-editors-were-sentenced-to-94-years-in-two-and-a-half-years-on-penalties-against-british-oppression-065504-4753424.html 24 जुलाई 2019 live सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दी भाषा के समाचार पत्र