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वाल्मीकि नगर, बिहार
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वाल्मीकि नगर, बिहार
पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का बार बार आगमन इस तथ्य का गवाह है कि उन्होंने वाल्मीकि नगर को इस काबिल बना दिया है कि ग्रीष्म ऋतु में यह उनका दूसरा घर हुआ करता था।बहरहाल, वाल्मीकि नगर भारत नेपाल सीमा पर स्थित एक ऐसा खूबसूरत स्थान है जिसे आज सभी प्रकार के लोग पसंद करते हैं और अपने खाली समय में इसका भ्रमण करते हैं।
वाल्मीकि नगर पहुंचने के रास्ते
वाल्मीकि नगर पहुंचने के लिए सबसे पहले रेलवे द्वारा आपको बगहा स्टेशन (स्टेशन कोड BUG) पहुंचना होगा, जो सीधे गोरखपुर नरकटियागंज रेलखण्ड से जुड़ा हुआ है। अगर आप गोरखपुर से आते हैं तो वाया कप्तानगंज, सिसवा बाजार, पनियहवा होते हुए आ सकते हैं। ऐसे ही अगर आप पटना से आना चाहते हैं तो वाया हाजीपुर, मुज़फ्फरपुर, चकिया, मोतिहारी, बेतिया, नरकटियागंज, हरिनगर, खरपोखरा के रास्ते आ सकते हैं, ठीक इसी तरह सड़क मार्ग के द्वारा भी आप बगहा पहुंच सकते हैं। एक और रेलवे स्टेशन है वाल्मीकि नगर रोड, जो बगहा स्टेशन से अगली स्टेशन ही है, जहां एक्प्रेस ट्रेन नहीं रूकती है, जहां से भी वाल्मीकि नगर के लिए बस और अन्य गाड़ियां ले सकते हैं।सड़क मार्ग में पटना से दूरी 312-13 किलो मीटर के आस पास पड़ेगा, जो बेतिया से लौरिया होते आता है। सड़क मार्ग NH 727 मुख्य सड़क मार्ग है।
बगहा से वाल्मीकि नगर की दूरी 40 किलोमीटर की सड़क मार्ग यात्रा है, जिसमें 30 किलोमीटर घने जंगल के बीच ही चमचमाती सड़क है। इन जंगलों को ही वाल्मीकि जंगल के नाम से जाना जाता है। इन जंगलों की सड़कों पर भालू, तेंदुआ, बाघ, हिरण, बंदर, चीतल, आदि अन्य जानवरों का आने जाने सिलसिला लगा रहता है, जिसे कभी कभी देखा जा सकता है।
वाल्मीकि नगर में घूमने वाली स्थान
वाल्मीकि नगर में वाल्मीकि आश्रम है, जो नेपाल सीमा से लगा हुआ है, जहां का ऐतिहासिक महत्व है, जो रामायण के वाल्मीकि, माता सीता, लव कुश जन्म स्थल, रामायण महाकाव्य की रचना आदि की कहानियां बयां करती है।
वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व क्षेत्र के लिए लिए यह सबसे प्रसिद्ध है, जो बिहार का एक मात्र टाइगर रिजर्व क्षेत्र के नाम से अपनी गौरव बढ़ा रहा है।
गंडक बैराज, इसी नदी क्षेत्र में है, जो नेपाल भारत सीमा की मित्रता को मजबूती का अद्भुत मिशाल पेश कर रहा है, जिस पर 36 खंभे है और जो नेपाल जाने का सड़क मार्ग भी है।
त्रिवेणी संगम, इसी गण्डक अथवा नारायणी नदी पर ही है, जिसमें संगम के रूप में नारायणी नदी, सोनहा नदी और पंचनद नदी मिलती है। इन नदियों के संगम से उठाया गया जल सावन महीने में भगवान शिव को लोग अर्पित करते है।
विभिन्न मंदिर भी इस वाल्मीकि नगर में है, जिसमें जटाशंकर शिव मंदिर, नर देवी काफी प्रसिद्ध है।
पर्यटन की दृष्टि से वाल्मीकि नगर में आज कल गंडक नदी तट पर काफी सुंदर सीढ़ियां और बैठने वाले स्थान एवं पार्क का निर्माण किया गया है।