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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

एकादश रुद्र

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mright|thumb|250px|व्योममण्डल का वह भाग जिसमें एकादश रुद्रों को दिखाया गया है ; ५वीं शताब्दी, कतरा केशव देव; सम्प्रति मथुरा संग्रहालय में एकादश रुद्र (ग्यारह रुद्र) शिव-रुद्र के अनुयायी हैं जो हिन्दुओं के ३३ देवताओं में से प्रमुख हैं। कभी-कभी उन्हें मरुत् (रुद्र के पुत्रगण) से अभिन्न माना जाता है जबकि कभी-कभी इन्हें बिलकुल अलग माना जाता है। वामन पुराण में रुद्रों को कश्यप और सुरभि का पुत्र बताया गया है और भगवान शंकर के ही अवतार बताए जाते हैं। एकादश रुद्र का विवरण सर्वप्रथम महाभारत में मिलता है। तत्पश्चात् अनेक पुराणों में एकादश रुद्र के नाम मिलते हैं, परन्तु सर्वत्र एकरूपता नहीं है। अनेक नामों में भिन्नता मिलती है। बहुस्वीकृत नाम इस प्रकार हैं(क)महाभारत-खिलभाग हरिवंश (हरिवंश पुराण), गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-2001ई.-1.3.51,52; (ख) अग्निपुराणम् (मूलमात्र) आनन्दाश्रम मुद्रणालय, पुणे, संस्करण-1900; तथा अग्निपुराण (हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण), गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-2002ई.-18.42,43,44; (ग)गरुड़पुराण-1.6.38,39 :- हर-रुद्र् बहुरूप त्र्यम्बक अपराजित-रुद्र् वृषाकपि शम्भु कपर्दी रैवत मृगव्याध शर्वहरिवंश तथा अग्निपुराण के पूर्वोक्त स्थलों पर इसकी बजाय 'सर्प' पाठान्तर है। कपाली एकादश रुद्र : नामान्तर विभिन्न ग्रन्थों में एकादश रुद्रों के नामों में भिन्नताएँ मिलती हैं। उनका विवरण निम्नांकित बिन्दुओं के अन्तर्गत द्रष्टव्य है:- महाभारत के अनुसार महाभारत के आदिपर्व में दो भिन्न अध्यायों में एकादश रुद्र के नाम आये है। दोनों जगह नाम और क्रम समान हैंमहाभारत (सटीक), प्रथम खण्ड, गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-1996ई., आदिपर्व-66.2,3 तथा 122.68,69 :- 1.मृगव्याध 2.सर्प 3.निऋति 4.अजैकपाद 5.अहिर्बुध्न्य 6.पिनाकी 7.दहन 8.ईश्वर 9.कपाली 10.स्थाणु 11.भव विभिन्न पुराणानुसार मत्स्यपुराण, पद्मपुराण, स्कन्दपुराण आदि पुराणों में समान रूप से एकादश रुद्रों के नाम मिलते हैं; परन्तु ये नाम महाभारत के खिल भाग हरिवंश तथा अग्निपुराण, गरुडपुराण आदि की उपरिलिखित सूची से कुछ भिन्न हैंमत्स्यपुराण-5.29,30 (गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-2004ई.); पद्मपुराण (मूलमात्र), भाग-3, आनन्दाश्रम मुद्रणालय, पुणे, संस्करण-1894,सृष्टिखण्ड-6.30,31 (पृ.781); स्कन्दपुराण-प्रभासखण्ड- अध्याय-21; तथा संक्षिप्त स्कन्द पुराण, गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-2001ई., पृ.964. :- 1.अजैकपाद 2.अहिर्बुध्न्य 3.विरूपाक्ष 4.रैवत 5.हर 6.बहुरूप 7.त्र्यम्बक 8.सावित्र 9.जयन्त 10.पिनाकी 11.अपराजित हरिवंश(1.3.49,50) तथा अग्निपुराण (18.41,42) के अनुसार दक्ष-पुत्री सुरभि ने महादेव जी से वर पाकर कश्यप जी के द्वारा ग्यारह रुद्रों को उत्पन्न किया। यहाँ अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, त्वष्टा तथा रुद्र को महादेव जी के ही प्रसाद से उत्पन्न भिन्न सन्तानों के रूप में गिना गया है। इन चारों को गरुड़पुराण में विश्वकर्मा के पुत्र कहा गया है। ऋग्वेद में अजैकपाद एवं अहिर्बुध्न्य को रुद्र से भिन्न देवता के रूप में स्थान प्राप्त है।वैदिक माइथोलाॅजी, अनुवादक-रामकुमार राय, चौखम्बा विद्याभवन, वाराणसी, संस्करण-2014ई•, पृ.137से139. पुराणों में दो परम्पराएँ चल रही हैं। एक इन दोनों को रुद्र के ही रूप मानने की, तथा दूसरी इन्हें रुद्र से भिन्न मानने की। हरिवंश में रुद्रों की संख्या सैकड़ोंहरिवंश., पूर्ववत्, 1.3.53. तथा अग्निपुराण में सैकड़ों-लाखों भी बतायी गयी है, जिनसे यह चराचर जगत् व्याप्त है।अग्नि., पूर्ववत्, 18.45. शिवपुराण के अनुसार शिवपुराण में शतरुद्रीय संहिता के अन्तर्गत एकादश रुद्रों को शिव के एक अवतार के रूप में वर्णन है। यहाँ कहा गया है कि कश्यप जी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् शिव ने कश्यप जी की पत्नी सुरभी के गर्भ से ग्यारह रुद्रों के रूप में जन्म लिया। यहाँ दिये गये नाम पूर्वोक्त सभी सूचियों से कुछ भिन्न हैंशिवपुराण, शतरुद्र संहिता-18.26.; तथा संक्षिप्त शिवपुराण, गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-2000ई•, पृ.443. :- कपाली पिंगल भीम विरूपाक्ष विलोहित शास्ता अजपाद अहिर्बुध्न्य शम्भु चण्ड भव शैवागम के अनुसार शैवागम में एकादश रुद्रों के नाम इस प्रकार बतलाये गये हैंएकादश रुद्र (शिव), गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-2014ई•, पृ.2.(इस बृहदाकार पुस्तिका में इन्हीं नामों एवं क्रम से एकादश रुद्रों के सचित्र परिचय दिये गये हैं एवं साथ-साथ उनके अवतारों की कथाएँ भी दी गयी हैं)। :- शम्भु पिनाकी गिरीश स्थाणु भर्ग सदाशिव शिव हर शर्व कपाली भव सन्दर्भ इन्हें भी देखें रुद्र श्रेणी:हिन्दू मिथक