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दार राज
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दार राज दार राज Dar Raj जागीरदार राज्य वंशानुगत जमींदारी शासन पूर्व-औपनिवेशिक एवं प्रारंभिक औपनिवेशिक काल Flag of Dar Raj 1699-1801.png दार राज का ऐतिहासिक ध्वज ध्वज Emblem (or seal) of Dar Raj دار راج.png राजकीय मुहर नान्नार, धामराई हिन्दू धर्म १६९९ १८०३ जमींदारी स्थापना भौगोलिक पुनर्गठन हरि कृष्ण मोहन दार जमींदार / महाराजा हरि कृष्ण मोहन दार संस्थापक काल (वंश स्थापना) मधुसूदन मोहन दार प्रारंभिक विस्तार वीरेंद्र मोहन दार प्रभावी स्थापना एवं सर्वोच्च शासनकाल राजा मुकुंद मोहन दार उत्तराधिकार एवं प्रशासनिक स्थिरता हर मोहन धर उन्नीसवीं शताब्दी की प्रशासनिक निरंतरता मोहिनी मोहन धर उत्तरकालीन जमींदारी युग / प्रशासनिक प्रभाव काल भारत, बांग्लादेश
दार राज (कश्मीरी: ks دار راج), जिसे धार राज के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रभावशाली जागीरदारी राज्य था। यह राज्य लगभग १६९९ से १८०३ ईस्वी तक वर्तमान जम्मू और कश्मीर तथा बांग्लादेश के क्षेत्रों में विस्तृत था।Akhtar, S. (1973). The Role of the Zamindars in Bengal (1707–1772). University of London, School of Oriental and African Studies.http://archive.org/details/dar-raj-dhar-raj-of-akhnur-and-dhaka Dar Raj (Dhar Raj) of Akhnur and Dhaka Bhattacharya Nalinikanta 1938-04-18https://books.google.co.in/books?id=m9C8EQAAQBAJ&pg=PT63 ZAMĪNDĀRS OF EARLY BAṄGĀL AND EAST PĀKISTĀN AND DECLINE OF ZAMĪNDĀR SYSTEM Badal M. N. C. 1949-06-11 Baṅgāl Granthālaya Prakāśan en
दार राजवंश के आदि संस्थापक हरि कृष्ण मोहन दार थे, जो एक कश्मीरी पंडित थे। वे श्रीनगर (जम्मू) से आकर अखनूर क्षेत्र के दार इलाके में बस गए और दार वंश की नींव रखी। किंतु उनके पौत्र महाराजा वीरेंद्र मोहन दार के शासनकाल में ही दार राज की ज़मींदारी वास्तविक रूप से विकसित हुई। इसी कारण उन्हें दार राज परिवार का प्रभावी संस्थापक माना जाता है।South Asian Architectural Review (2011). Colonial-Era Zamindar Residences in Eastern Bengal. Vol. 9(1), pp. 98-111.https://books.google.co.in/books/about/Mah%C4%81r%C4%81ja_V%C4%ABrendra_Mohan_D%C4%81r_of_Akhn.html?id=eUy3EQAAQBAJ Mahārāja Vīrendra Mohan Dār of Akhnūr Mukherjee Ramesh Chandra 1987-07-21 Nīldhôni Prokāśônā en
हरि कृष्ण के आठ संतानें थीं, जिनमें से रामहरि मोहन दार — वीरेंद्र मोहन दार के पिता — एक थे। रामहरि मोहन दार ने अपने भाई मधुसूदन दार की मृत्यु के बाद उनके पुत्र वाक़िफ अली ख़ान दार (जन्म १७५२ ईस्वी) को गोद लिया। यद्यपि वाक़िफ अली ख़ान दार जैविक रूप से मधुसूदन दार के पुत्र थे, दार राजवंश की मुख्य धारा में उनकी स्थिति दत्तक परंपरा से स्थापित हुई। दार राजवंश की औपचारिक एवं परंपरागत निरंतरता सामान्यतः महाराजा वीरेंद्र मोहन दार के काल से मानी जाती है।https://www.google.co.in/books/edition/History_of_Muslim_Civilization_in_India/ciBuAAAAMAAJ History of Muslim Civilization in India and Pakistan: A Political and Cultural History Ikram Sheikh Mohamad 1989 Institute of Islamic Culture 978-969-469-001-8 enhttps://books.google.co.in/books/about?id=3uW4EQAAQBAJ وِرینٛدر موہن دار مکھرجی رمیش 1979-12-06 بنوارا پبلشنگ ar
वीरेंद्र मोहन दार के पुत्र राजा मुकुंद मोहन दार की अनेक संतानें थीं। उनमें से एक राय बहादुर हरा मोहन धर थे, जो मिडल टेम्पल के बैरिस्टर थे। हरा मोहन धर की संतानों में मोहिनी मोहन धर शामिल थे — जो मयूरभंज राज्य के पूर्व दीवान एवं न्यायाधीश थे — इसके अतिरिक्त ज्योतिंद्र धर, सरला धर और कादंबिनी धर भी थे।https://books.google.co.in/books?id=EiYLAQAAIAAJ&q=mohini+Mohan+Dhar Orissa District Gazetteers: Mayurbhanj 1967 Superintendent, Orissa Government Press enhttps://www.google.co.in/books/edition/Kalik%C4%81t%C4%81ra_itibr̥tta_o_anyānya_racanā/N8ktAAAAIAAJ Kalikātāra itibr̥tta o anyānya racanā Datta Prāṇakr̥shṇa 1991 Pustaka Bipaṇi bn 978-81-85471-02-0
मोहिनी मोहन धर की चार संतानों में धीरेंद्र मोहन धर, एक बैरिस्टर, तथा सत्येंद्र मोहन धर CIE, ICS शामिल थे, जो भारतीय सिविल सेवा के अधिकारी थे। धीरेंद्र मोहन धर का विवाह अमियाबाला से हुआ, जो पियारी चरण सरकार की पौत्री और हाटखोला राज परिवार की वंशज थीं। उनके दो बच्चे थे — चित्तजीत धर और प्रीतिलता धर।https://www.google.co.in/books/edition/International_Guide_to_Art_Research_Mate/uL8YAAAAYAAJ International Guide to Art Research Materials: Indian languages & literature Sinha Biswajit 2001 Eastern Book Linkers en 978-81-7854-007-8http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.266332 Kolikata - Darpan Parba 1 Mitra Radharaman 1952
महाराजा वीरेंद्र मोहन दार के शासनकाल में दार राज की ज़मींदारी अखनूर के दार क्षेत्र के आधे से अधिक भाग में विस्तृत थी। साथ ही वर्तमान बांग्लादेश के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों एकड़ भूमि उनके अधिकार में थी, जिनमें धामराई, नान्नार, रोयाइल, शरीफबाग, डेमरा, आशुलिया, जलसिन, चर तालिबाड़ी और राजराजेश्वर प्रमुख थे। इन क्षेत्रों के कुछ भाग वर्तमान पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश में सम्मिलित हैं।https://www.google.co.in/books/edition/Gharera_kathā_o_yugasāhitya/fqqwUYy7ThQC Gharera kathā o yugasāhitya Sen Dinesh Chandra 1969 Jijñāsā bn
१८०१ ईस्वी में पद्मा नदी के भीषण कटाव के कारण राजराजेश्वर के चर तालिबाड़ी में स्थित चर दार राजबाड़ी को छोड़ दिया गया। इसके बाद महाराजा वीरेंद्र मोहन दार ने धामराई उपज़िला के नान्नार ग्राम में नया दार राजबाड़ी स्थापित किया, जो आगे चलकर दार राजवंश का मुख्य निवास एवं प्रशासनिक केंद्र बना।https://www.google.co.in/books/edition/Dhākāra_itihāsa/I8tIAQAAMAAJ Dhākāra itihāsa Rāẏa Yatīndramohana 1913 S.M. Rāẏa bn
शासक एवं ज़मींदारों की सूची
+ दार राज के शासक एवं ज़मींदारों की सूची क्रमांक चित्र नाम उपाधि ज़मींदारी कार्यकाल वंशगत संबंध टिप्पणी १ 80px विरेंद्र मोहन दार महाराजा १८०१–१८२९ दार राजवंश के प्रभावी संस्थापक इनके शासनकाल से दार राज की औपचारिक एवं सांस्कृतिक परंपरा प्रारंभ होती है २ 80px मुकुंद मोहन दार राजा १८२९–१८५६ विरेंद्र मोहन दार के पुत्र लिंकन्स इन के बैरिस्टर; फ़ारसी भाषा के विद्वान ३ 80px हर मोहन धर राय बहादुर १८५६–१८९८ मुकुंद मोहन दार के पुत्र मिडिल टेम्पल के बैरिस्टर ४ 80pxमोहिनी मोहन धर दीवान एवं न्यायाधीश १८९८–१९२० हर मोहन धर के पुत्र मयूरभंज राज्य के पूर्व दीवान एवं न्यायाधीश
संदर्भ