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चित्रांगदा नाटक

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फ़रवरी 2014 फ़रवरी 2014 चित्रांगदा नाटक महाभारत से ली हुई एक कहानी है जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने नाट्य रूप दिया। सन 1892 मे रचाई हुई एक पौराणिक नाटक है। इस नाटक में कुछ किरदारों को बदला गया है ताकि उसमें नया रूप लाया जा सके। यह नाटक के रूप में वास्तव में एक काव्य हैं। इस नाटक को रवींद्र सदन के नृतक समाज ने कोलकाता में दर्शाया था। यह मणिपुर की राजदूहिता चित्रांगदा और अर्जुन की प्रेम-लीला के साथ आधुनिक काल की औरत की कीर्ति को दर्शता है। इस नाटक का चित्रा के नाम से अंग्रेजी मे अनुवाद किया गया है। इस नाटक के मुख्य कलाकार चित्रांगदा, अर्जुन, वसंत देव और मदन देव है। यह नाटक काव्य के साथ सामाजिक इतिहास में भी अपना स्थान प्रकट करता है। यह नाटक ग्यारह दृश्यों में विभाजित है।रवीन्द्रनाथ के नाटक १ चित्रांगदा नाटक महाभारत के अनुसार चित्रांगदा अर्जुन की पत्नियों में से एक है। अर्जुन एकबार एक ब्राह्मण के गायों को बचाने के लिए अपना वचन तोड़कर युधिस्ठिर के घर में प्रवेश किया तब युधिष्ठिर पांचाली शारीरिक संबंध बना रहे थे। इस लिए अर्जुन को बारह साल का वनवास भोगना परा। अर्जुन के वनवास के दौरान जब वह जाता है तब उसकी मुलाकात चित्रांगदा से होती है। वह उससे प्रेम निवेदन करके शादी करना चाहता है। मणिपुर के राजा ने अपनी प्रजा की याचिका पर यह प्रतिज्ञा ली कि मातृवंशीय परंपरा के अनुसार चित्रांगदा के पुत्र या पुत्री मणिपुर के उत्तराधिकारी बनेंगे और असे राज्य से नहीं ले जाया जायेगा। अर्जुन ने इस प्रतिज्ञा का सम्मान करते हुऐ चित्रांगदा से शादी कि। शादी के बाद अर्जुन और चित्रांगदा के मिलन से चित्रांगदा गर्भवती हुई। जल्द ही वभ्रुवाहन नामक पुत्र का जनम हुआ जिसने मणिपुर कि राजगद्दी संभाली। लेखक परिचय श्री रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता भारत में हुआ था। वे पूरी दुनिया के लिए भारत की आध्यात्मिक विरासत की आवाज बन गए थे। भारत के लिए (विशेष रूप) से (बंगाल हेतु) वहाँ एक महान रहने वाली संस्था बन गये थे। वे विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, उपन्यासकार नाटककार, प्रबन्धकार, चित्रकार संगीतकार और दार्शनिक है।http://www.nobelprize.org/nobel_prizes/literature/laureates/1913/tagore-bio.html https://web.archive.org/web/20140119213503/http://www.nobelprize.org/nobel_prizes/literature/laureates/1913/tagore-bio.html 19 जनवरी 2014 Rabindranath Tagore - Biographical उन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। उनकी काव्यरचना गीतांजलि के उन्हें सन् 1913 में साहित्य में अतुलनीय प्रदर्शन हेतु नोबल पुरस्कार मिला।https://en.wikipedia.org/wiki/Rabindranath_Tagore https://web.archive.org/web/20140122221200/http://en.wikipedia.org/wiki/Rabindranath_Tagore 22 जनवरी 2014 Rabindranath Tagore वह भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबेल पुरस्कार विजेता हैं। उनकी दो रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बन चुकीं हैं प्रथम भारत का "जन-गन-मन" और द्वितीय बांग्लादेश का "आमार सोनार" (बांग्ला)। उनका विवाह सन् 1883 में मृणालिनी देवी के साथ हुआ। टैगोर ने करीब 2,230 गीतों की रचना की। उनकी कृतियाँ है- उपन्यास: राजर्षि (1887), चार अध्याय (1934), घरे बायरे 1916), चतुरंग (1916); कविता: चित्रा (1896), कल्पना (1900), गीतांजलि (1910), बलाका (1915); लघुकथा: समाप्ति, संस्कार, अध्यापक, त्याग, प्रायश्चित; नाटक: राजा (1910), चित्रांगदा (1892, काव्यनाट्य), डाकघर (1912),http://www.rabindranathtagore.co.in/list-of-works.htm https://web.archive.org/web/20140208034018/http://www.rabindranathtagore.co.in/list-of-works.htm 8 फ़रवरी 2014 List of works List of works Rabindranath Tagore विसर्जन (1890), वाल्मीकि-प्रतिभा (1881, गीतिनाट्य); प्रबन्ध: कालान्तर, नारी, शूद्र धर्म, चरका, आरोग्य; संस्मरण: जीवनस्मृति (1912)। रवींद्र संगीत बाँग्ला संस्कृति का अभिन्न अंग है। जीवन के अन्तिम समय 7 अगस्त 1941 के कुछ समय पहले इलाज के लिए जब उन्हें शान्तिनिकेतन से कोलकाता ले जाया जा रहा था तो उनकी नातिन ने कहा कि आपको मालूम है हमारे यहाँ नया पावर हाउस बन रहा है। उनकी कविता पारंपरिक वैष्णव लोक गीत से आकर्षित किया है और अक्सर गहरी रहस्यमय था। साहित्य का उनका शरीर गरीबों के लिए गहराई से सहानुभूति और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों की पुष्टि की है। रवीन्द्रनाथ 6 साल की उम्र में अपनी पहली कविता लिखी है और कालिदास की शास्त्रीय कविता का अध्ययन किया है। उन्होंने उपनिषद, भाषाओं और आधुनिक विज्ञान का अध्ययन किया। 1878 में वह एक बैरिस्टर बनने की आशा में इंग्लैंड की यात्रा की। 1880 में उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन छोड़ दिया और उसके पिता मृणालिनी देवी के साथ् उसकी शादी की व्यवस्था की इसलिए वह् भारत लौटे। टैगोर की शादी हो और उनके परिवार की संपत्ति की देखभाल के लिए घर लौटे। उन्होंने प्राचीन भारत की शैक्षिक परंपराओं लौटने को समर्पित, एक आश्रम में पाया गया जहां 1901 में टैगोर शांति निकेतन (पश्चिम बंगाल) ले जाया गया। बाद में इस स्कूल का विस्तार की और श्रीनिकेतन शांति का निवास का नाम दी गयी। यह परियोजना अपने जीवन भर टैगोर के दिल को प्रिय था।http://www.poetseers.org/nobel-prize-for-literature/tagore/ https://web.archive.org/web/20140220041118/http://www.poetseers.org/nobel-prize-for-literature/tagore/ 20 फ़रवरी 2014 Rabindranath Tagore (1913) सारांश चित्रांगदा मनिपुर के राजा की एक मात्र कन्या थी। एक मात्र पुत्रि होने के कारण वह अपने राज्य के लिये एक पुरुष का वेश धारण करती है। राज्य और प्रजा कि उन पर अपनी रक्छा की आशा होती है। अर्जुन बारह वर्ष के ब्रह्मचर्या को पालने के लिये वनवास के लिये जाता है। बहुत लम्बा सफर देखने के बाद वह मनिपुर पहुँचता है जो अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिये प्रसिद्घ है। एक दिन अपने शिकार पर जब उसने अर्जुन को देखा तब उसे अर्जुन से प्यार हो गया। अर्जुन भी उसके लडने के जस्बे और हिमत से बहुत प्रभावित हुआ पर इस भ्रम मै था कि वह एक लडका है। चित्रांगदा को लगा कि इस रूप (कुरुपा) मै वह कभी भी उस से प्यार नहीं करेगा। यह सोचकर वह कामावेदा (प्रेम के देव) से वरदान मांगती है कि उसे कुछ वक्त के लिये दुनिया की सबसे सुन्दर लडकी बना दे ताकि अर्जुन उसे देखते हि उस से प्यार कर ले। वह इस रूप (सुरुपा) मै उसके सामने आती है और अर्जुन उसको अपनी ओर आक्रर्षित कर लेता है करतीhttp://www.thehindu.com/features/friday-review/dance/dynamic-takes-on-tagore/article3964501.ece https://web.archive.org/web/20140202234325/http://www.thehindu.com/features/friday-review/dance/dynamic-takes-on-tagore/article3964501.ece 2 फ़रवरी 2014 Dynamic take on Tagore उसके पास सब कुछ् है पर वह चाहती है कि अर्जुन उसके वास्तविक रूप मै उस से प्यार करे। कुछ समय बाद राज्य में लुटेरे हमला करने आते है, तब अर्जुन को पता चलता है कि इस राज्य की रक्शक एक स्त्रि है जो बहुत विधवान योधा है और सोचता है एसि परिस्थिती मै वो काहा है। चित्रांगदा कि प्रशंसा से वह प्रभावित होता है और उस से मिलना चहता है क्युंकि उसने किसी स्त्रि को अपने समान युध-निति मै श्रेष्ठ होते हुये नही सुना। चित्रांगदा अपनि सचाई बताने से पेहले वक्त् रहते अपने राज्य को बचा देति है। जब वह अर्जुन के सामने अपने वास्तविक रूप मै आति है और अर्जुन को सारी सचाई बताति। वह अर्जुन से कहती है कि वो चित्रांगदा है, कोइ देवि या रानी नहिं बल्कि एक सामान्य नारी है। यदि वह उसे अपने कठिन वक्त का साती, सुख-दुख की सहचारी बनाओ तभी तुम मेरा परिचय पा सकोगे। यह स्वर अर्जुन को पोराणिक नहीं बलकि एक आधुनिक नारी के स्वर लगे। तब अर्जुन उसके सोंद्रय से ज्यादा उसके गुनो से प्यार करता हैं और उस से शादि करता है। अर्जुन को चित्रांगदा की बातो से आत्म ज्ञन होता है। कुछ वक्त बद उनहे बाब्रुवाहाना के पुत्र क लाभ होता है।https://en.wikipedia.org/wiki/Chitr%C4%81ngad%C4%81 https://web.archive.org/web/20140405073835/http://en.wikipedia.org/wiki/Chitr%C4%81ngad%C4%81 5 अप्रैल 2014 Chitrāngadā पात्र परीचय अर्जुन अर्जुन महाभारत के बेहतरीन तीरंदाज और एक अद्वितीय योद्धा माना जाता था। अर्जुन नारायण, कृष्ण के अवतार के साथ, द्वापर युग में धर्म की स्थापना की जो नारा, का एक अवतार था। उन्होंने एक अपराजित नायक माना जाता था, जिसका हार कभी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौरवों की हार सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह द्रोण का छात्र था। अर्जुन कई बार शादी की, द्रौपदी, सुभद्रा, उलूपी और चित्रांगदा। उनके बच्चों है श्रुतकीर्ती, अभिमन्यु, बब्रुवाहाना और इरावन थे। वह शिकार करते समय चित्रांगदा को देखा और प्यार में फस गयी। वह देखने के लिया बहुत सुन्दर लगती थी। चित्रांगदा चित्रांगदा मणिपुर के राजकुमारी थी। मणिपुर के राजा को पुत्र-लाभ नहीं होने से अपनी एक ही पुत्री को ही योद्धा बनना पड़ा। वह देखने में उतनी सुन्दर नहीं थी। महाभारत की इस कहानी में चित्रांगदा अर्जुन से मिलती है और उससे प्यार होता है। ब्रह्मचर्य होने से अर्जुन ने उसे मना कर दिया। आपमानित राजकुमरी उसे आकर्षण करने के लिये वह भगवान की मदद से खूब-सूरत युवती बनना चाहती है। चित्रांगदा उच्च आत्म सम्मान की एक औरत है जिसके द्वारा कुशलता और धैर्य से देश को बचा देती है।http://www.thehindu.com/features/friday-review/dance/dynamic-takes-on-tagore/article3964501.ece https://web.archive.org/web/20140202234325/http://www.thehindu.com/features/friday-review/dance/dynamic-takes-on-tagore/article3964501.ece 2 फ़रवरी 2014 Dynamic take on Tagore आलोचना चित्रांगदा एक महिला को उसके दो परस्पर विरोधी खुद (कुरुप और सुरुप) से अलग करवा चुकी है। पहले चित्रांगदा की अपरिवर्तनीय पहचान का प्रतीक है। उसके जीवन की यात्रा, प्यार के लिए उसके शिकार की कहानी, उसकी उदासी और उसे अपनी शर्तों पर निर्णायक 'उद्धार' बयान की गयी है। अन्य दो, दो अलग शैलियों (कुरुप और सुरुप) में अधिनियमित उसका बाहरी स्वयं हैं। सन्दर्भ