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उत्सर्जन
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1. वृक्क पिरैमिड •
2. इन्टरलोबर धमनी •
3. वृक्क-धमनिका •
4. वृक्क-शिरा •
5. वृक्क नाभि •
6. वृक्क श्रोणि •
7. मूत्रवाहिनी •
8. माइनर कैलिक्स •
9. रीनल कैप्सूल •
10. इन्फेरियर रीनल कैप्सूल •
11. सूपिरियर रीनल कैप्सूल •
12. इन्टरलोबर शिरा •
13. नेफ्रान •
14. Minor कलिसेज •
15. मेजर कैलिसेज •
16. रीनल पैपिला •
17. रीनल स्तम्भ
उपापचयी (मेटाबोलिक) क्रियायों के फलस्वरूप बने उत्सर्जी पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। सजीव कोशिकाओं के अन्दर विभिन्न प्रकार की जैव-रासायनिक क्रियाएँ होती रहती हैं। इन क्रियायों के समय कुछ बेकार एवं विषैले पदर्थ उत्पन्न होते हैं जो कोशिकाओं अथवा शरीर के लिए उपयोगी नहीं होते हैं। यदि उन्हें शरीर में इकट्ठा होने दिया जाय तो वे प्राणघातक भी हो सकते हैं। इन्हीं पदार्थों को उत्सर्जन की क्रिया में शरीर बाहर निकाल देता है। कुछ हानिकारक एवं उत्सर्जी पदार्थ कार्बन डाईऑक्साइड, अमोनिया, यूरिया, यूरिक अम्ल तथा कुछ अन्य नाइट्रोजन के यौगिक हैं। ये पदार्थ जिन विशेष अंगों द्वारा शरीर से बाहर निकाले जाते हैं उन्हें उत्सर्जन अंग कहते हैं।
पौधों एवं प्राणियों दोनों में उत्सर्जन की क्रिया होती है परन्तु पौधों में कोई विशेष उत्सर्जन-अंग या तंत्र नहीं होता है अतः पौधे अपने उत्सर्जी पदार्थ पत्तियों, छालों, फलों, बीजों के माध्यम से शरीर से निष्कासित कर देते हैं।यादव, नारायण रामनन्दन, विजय अभिनव जीवन विज्ञान मार्च २००३ निर्मल प्रकाशन कोलकाता १-४० १४ अगस्त २००९ प्राणियों में सभी उत्सर्जी पदार्थों के शरीर से बाहर निकालने की लिए उत्सर्जी अंग पाए जाते हैं। मेरूदण्डी प्राणियों में मुख्य उत्सर्जी अंग वृक्क (चित्रित) है जो गहरे लाल रंग का सेम की बीज की आकृति का होता है। वृक्क अपने लाखों वृक्क नलिकाओं के माध्यम से रक्त को छानकर शुद्ध करता है एवं छने हुए वर्ज्य पदार्थों को मूत्र के माध्यम से निष्कासित कर देता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:प्राणी विज्ञान
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श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना