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तालिबान आन्दोलन
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मई 2019
मई 2019
Flag of Taliban.svg Flag of Taliban.svg तालिबान का ध्वज
तालिबान आंदोलन (طالبان) जिसे तालिबान या तालेबान के नाम से भी जाना जाता है, एक सुन्नी इस्लामिक आधारवादी आन्दोलन है जिसकी शुरूआत 1994 में दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में हुई थी। तालिबान पश्तो भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञानार्थी (छात्र)। ऐसे छात्र, जो इस्लामिक कट्टरपंथ की विचारधारा पर यकीन करते हैं। तालिबान इस्लामिक कट्टपंथी राजनीतिक आंदोलन हैं। इसकी सदस्यता पाकिस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मिलती है। 1996 से लेकर 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबानी शासन के दौरान मुल्ला उमर देश का सर्वोच्च धार्मिक नेता था। उसने खुद को हेड ऑफ सुप्रीम काउंसिल घोषित कर रखा था। तालेबान आन्दोलन को सिर्फ पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ही मान्यता दे रखी थी।
2021 मे संयुक्त राज्य अमेरिका और नाटों ने अफगानिस्तान मे हार स्वीकार कर तालिबान से शांति समझौता कर लिया है, और शांति समझौते के साथ ही तालिबान दोबारा सत्ता मे आ गया।
तालिबान ने संपूर्ण अफगानिस्तान की सत्ता हासिल कर सभी नेताओं, जमींदारों, जागीरदारों से हाथ मिला कर शांति संधि कर ली।
तालिबान ने अफगानिस्तान के सबसे शक्तिशाली विद्रोही राज्य पंजशीर पर अधिकार कर लिया और पंजशीर प्रांत के अधिकांश इलाकों पर जमींदारी करने वाले फ़ारसी भाषी शेख एवं ताजिक जमींदारों से शांति समझौता कर उन्हें अपनी तरफ मिला लिया।
वर्ष 2021 मे तालिबान संपूर्ण अफगानिस्तान की सत्ता पर विराजमान हो गया।अफगानिस्तान को पाषाणयुग में पहुँचाने के लिए तालिबान को जिम्मेदार माना जाता है।http://www.bhaskar.com/article/INT-afghan-president-election-and-taliban-4571364-PHO.html?seq=4 संग्रहीत प्रति 5 अप्रैल 2014 https://web.archive.org/web/20140407065452/http://www.bhaskar.com/article/INT-afghan-president-election-and-taliban-4571364-PHO.html?seq=4 7 अप्रैल 2014 live
उदय
1990 की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में तालिबान का उदय माना जाता है। इस दौर में सोवियत सेना अफगानिस्तान से वापस जा रही थी। पश्तून आंदोलन के सहारे तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी जड़े जमा ली थीं। इस आंदोलन का उद्देश्य था कि लोगों को धार्मिक मदरसों में जाना चाहिए। इन मदरसों का खर्च सऊदी अरब द्वारा दिया जाता था। 1996 में तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के अधिकतर क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। 2001 के अफ़ग़ानिस्तान युद्ध के बाद यह लुप्तप्राय हो गया था पर 2004 के बाद इसने अपना गतिविधियाँ दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान में बढ़ाई हैं। फरवरी 2009 में इसने पाकिस्तान की उत्तर-पश्चिमी सरहद के करीब स्वात घाटी में पाकिस्तान सरकार के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत वे लोगों को मारना बंद करेंगे और इसके बदले उन्हें शरीयत के अनुसार काम करने की छूट मिलेगी। पश्चिमी पाकिस्तान मे तालिबान के बढ़ते दबाव के कारण पाकिस्तान से बड़ी संख्या मे लोग कनाडा, डेनमार्क, आस्ट्रेलिया, स्वीडन, फिनलैंड, नार्वे, रूस, एवं आइसलैंड जैसे पश्चिमी देशों की नागरिकता बहुत तेजी से ले रहे हैं।
2021 मे संयुक्त राज्य अमेरिका और नाटों ने अफगानिस्तान मे हार स्वीकार कर तालिबान से शांति समझौता कर लिया है, और शांति समझौते के साथ ही तालिबान दोबारा सत्ता मे आ गया।
तालिबान ने संपूर्ण अफगानिस्तान की सत्ता हासिल सभी विद्रोही नेताओ जमींदारों, जागीरदारों से हाथ मिला कर शांति संधि कर ली।
तालिबान ने अफगानिस्तान के सबसे शक्तिशाली विद्रोही राज्य पंजशीर पर अधिकार कर लिया और पंजशीर प्रांत के अधिकांश इलाकों पर जमींदारी करने वाले फ़ारसी भाषी शेख एवं ताजिक जमींदारों से शांति समझौता कर उन्हें अपनी तरफ मिला लिया।
वर्ष 2021 मे संयुक्त राज्य अमेरिका की सेनाओं के वापसी के साथ तालिबान संपूर्ण अफगानिस्तान की सत्ता पर विराजमान हो गया। अधिकांश तालिबान विरोधी अफ़गानों ने संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता ले ली है।
कतर, रूस, चीन एवं भारत के सहयोग से तालिबान अफगानिस्तान मे शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है|
http://www.bhaskar.com/article/INT-afghan-president-election-and-taliban-4571364-PHO.html?seq=4 संग्रहीत प्रति 5 अप्रैल 2014 https://web.archive.org/web/20140407065452/http://www.bhaskar.com/article/INT-afghan-president-election-and-taliban-4571364-PHO.html?seq=4 7 अप्रैल 2014 live
सामाजिक प्रतिबंध
तालिबान ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पश्तून इलाकों में वायदा किया था कि अगर वे एक बार सत्ता आते हैं तो सुरक्षा और शांति कायम करेंगे। वे इस्लाम के साधारण शरिया कानून को लागू करेंगे। हालाँकि कुछ ही समय में तालिबान लोगों के लिए सिरदर्द साबित हुआ। शरिया कानून के तहत महिलाओं पर कई तरह की कड़ी पाबंदियां लगा दी गईं थी। सजा देने के वीभत्स तरीकों के कारण अफगानी समाज में इसका विरोध होने लगा।http://www.bhaskar.com/article/INT-afghan-president-election-and-taliban-4571364-PHO.html?seq=4 संग्रहीत प्रति 5 अप्रैल 2014 https://web.archive.org/web/20140407065452/http://www.bhaskar.com/article/INT-afghan-president-election-and-taliban-4571364-PHO.html?seq=4 7 अप्रैल 2014 live
तालिबान ने शरिया कानून के मुताबिक अफगानी पुरुषों के लिए बढ़ी हुई दाढ़ी और महिलाओं के लिए बुर्का पहनने का फरमान जारी कर दिया था।
टीवी, म्यूजिक, सिनेमा पर पाबंदी लगा दी गई। दस उम्र की उम्र के बाद लड़कियों के लिए स्कूल जाने पर मनाई थी।
वेश्यावृत्ति करने एवं कराने वाले लोगों को सरेआम मौत की सजा दी जाने लगी।
तालिबान ने 1996 में शासन में आने के बाद लिंग के आधार पर कड़े कानून बनाए। इन कानूनों ने सबसे ज्यादा महिलाओं को प्रभावित किया।
अफगानी महिला को नौकरी करने की इजाजत नहीं दी जाती थी।
लड़कियों के लिए सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के दरवाजे बंद कर दिए गए थे।
किसी पुरुष रिश्तेदार के बिना घर से निकलने पर महिला का बहिष्कार कर दिया जाता है।
तालिबान ने सभी प्रकार के अवैध यौन संबंध को बलात्कार की श्रेणी मे माना और अवैध यौन संबंध पर मौत की सजा का कानुन लागू किया।
पुरुष डॉक्टर द्वारा चेकअप कराने पर महिला और लड़की का बहिष्कार किया जाएगा। इसके साथ महिलाओं पर नर्स और डॉक्टर्स बनने पर पाबंदी थी।
तालिबान के किसी भी आदेश का उल्लंघन करने पर महिलाओं को निर्दयता से पीटा और मारा जाएगा।
तालिबानी सजा
तालिबानी इलाकों में शरीयत का उल्लंघन करने पर बहुत ही क्रूर सजाएं दी जाती हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 97 फीसदी अफगान महिलाएं अवसाद की शिकार हैं,एवं अधिकांश अफ़गान परिवार महिलाओं को आधुनिक शिक्षा दिलाने एवं अपने स्वर्णिम भविष्य के लिए कनाडा, आस्ट्रेलिया, स्वीडेन, नार्वे, आइसलैंड, फिनलैंड, डेनमार्क एवं ग्रीनलैण्ड जैसे पश्चिमी देशों की नागरिकता ले रहे हैं।
लिन एल एमोवित्ज़ मिशेल हिस्लर विन्सेन्ट इयाकोपिनो Journal of Women's Health महिला स्वास्थय पर शोध पत्रिका en 577-587 http://doi.org/10.1089/154099903768248285 https://www.liebertpub.com/doi/pdf/10.1089/154099903768248285?download=true 12 6 ७ जुलाई २००४ 1540-9996
घर में बालिका विद्यालय चलाने वाली महिलाओं को उनके पति, बच्चों और छात्रों के सामने गोली मार दी जाती है। महिलाओं को आधुनिक शिक्षा दिलाने के लिए अफगानिस्तान के अधिकतर अमीर,मध्यवर्गीय एवं शिक्षात्मक परिवार के लोगों ने कनाडा, स्वीडेन, नार्वे, डेनमार्क एवं आस्ट्रेलिया जैसे पश्चिमी देशों की नागरिकता ले ली है।
https://feminist.org/our-work/afghan-women-and-girls/the-taliban-afghan-women/ en Taliban Reality for Women and Girls महिलाओं और बच्चियों के लिये तालिबान की सच्चाई फेमिनिस्ट मेज़ॉरिटी फाउन्डेशन
प्रेमी के साथ भागने वाली महिलाओं को भीड़ में पत्थर मारकर मौत के घाट उतार दिया जाता था।
स्कैन रोज़मैरी https://www.goodreads.com/book/show/5973498-women-of-afghanistan-in-the-post-taliban-era The women of Afghanistan under the Taliban en 28 नवम्बर 2001 मैक्फार्लैण्ड 978-0-7864-1090-3 41
गलती से बुर्का से पैर दिख जाने पर कई अधेड़ उम्र की महिलाओं को पीटा जाता था।
पुरुष डॉक्टर्स द्वारा महिला रोगी के चेकअप पर पाबंदी से कई महिलाएं मौत के मुँह में चली गई।
कई महिलाओं को घर में बंदी बनाकर रखा जाता था। इसके कारण महिलाओं में आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ने लगे।
तालिबान द्वारा कठोर शरिया शासन स्थापित होने के बाद अफगानिस्तान के अधिकांश शिक्षित एवं शिक्षात्मक लोग कनाडा, आस्ट्रेलिया, नार्वे, डेनमार्क, फिनलैंड,आइसलैंड एवं स्वीडेन जैसे पश्चिमी देशों की नागरिकता बड़ी तेजी से ले रहे हैं।
http://www.bhaskar.com/article/INT-afghan-president-election-and-taliban-4571364-PHO.html?seq=4 संग्रहीत प्रति 5 अप्रैल 2014 https://web.archive.org/web/20140407065452/http://www.bhaskar.com/article/INT-afghan-president-election-and-taliban-4571364-PHO.html?seq=4 7 अप्रैल 2014 live
सन्दर्भ
श्रेणी:जिहादी संगठन
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