411 REFERENCE · Wikipedia
अनसूया
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
दिसम्बर 2012
right|thumb|300px|पोरबन्दर के मन्दिर में त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, शंकर) को भोजन कराती सती अनसूया की मूर्ति
अनसूया प्रजापति कर्दम और देवहूति की 9 कन्याओं में से एक तथा अत्रि मुनि की पत्नी थीं। उनकी पति-भक्ति अर्थात् सतीत्व का तेज इतना अधिक था के उसके कारण आकाशमार्ग से जाते देवों को उसके प्रताप का अनुभव होता था। इसी कारण उन्हें 'सती अनसूया' भी कहा जाता है।
अनसूया ने श्रीराम, सीता और लक्ष्मण का अपने आश्रम में स्वागत किया था। उन्होंने सीता को उपदेश दिया था और उन्हें अखंड सौंदर्य की एक ओषधि भी दी थी। सतियों में उनकी गणना सबसे पहले होती है। कालिदास के 'शाकुंतलम्' में अनसूया नाम की शकुंतला की एक सखी भी कही गई है।
कथा
एक बार ब्रह्मा, विष्णु व महेश उनकी सतीत्व की परीक्षा करने की सोची, जो की अपने आप में एक रोचक कथा है।
पतिव्रता देवियों में अनसूया का स्थान सबसे ऊँचा है। वे अत्रि-ऋषि की पत्नी थीं। उनके संबंध में बहुत सी लोकोत्तर कथाएँ शास्त्रों में सुनी जाती हैं। आश्रम में गये तो श्रीअनसूयाजी ने सीताजी को पातिव्रतधर्म की विस्तारपूर्वक शिक्षा दी थी। उनके संबंध में एक बड़ी रोचक कथा है। एक बार ब्रह्माणी, लक्ष्मी और गौरी में यह विवाद छिड़ा कि सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता कौन है? अंत में तय यही हुआ कि अत्रि पत्नी श्रीअनसूया ही इस समय सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता हैं। इस बात की परीक्षा लेने के लिये त्रिमूर्ती ब्रह्मा, विष्णु व शंकर ब्राह्मण के वेश में अत्रि-आश्रम पहुँचे। अनसूया ने अतिथियों का बड़े आदर से स्वागत किया। जब भोजन का समय हुआ तो तीनों ने अनसूयाजी से कहा कि हम अपने सभी वस्त्र उतार कर नग्न होकर भोजन करेंगे। सती बड़े धर्म-संकट में पड़ गयी और भय के कारण उनकी पुरी शरीर पसिना युक्त होगया । फिर अनसूया भगवान को स्मरण करके कहने लगी "यदि मैंने पति के समान कभी किसी दूसरे पुरुष को न देखा हो, यदि मैंने किसी भी देवता को पति के समान न माना हो, यदि मैं सदा मन, वचन और कर्म से पति की आराधना में ही लगी रही हूँ तो मेरे इस सतीत्व के प्रभाव से ये तीनों शिशु हो जाँय। फिर तीनों देव नन्हे बच्चे होगए। श्रीअनसूयाजी फिर उन तीनौ शिशु को खानपान कराने लगी ।।
इन्हें भी देखें
सती अनसूइया मन्दिर, उत्तराखण्ड
सन्दर्भ
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]
Shiv