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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ऊष्ट्रासन

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इस आसन की अंतिम अवस्था में पहुँचने के बाद हमारे शरीर की आकृति कुछ-कुछ ऊँट के समान प्रतीत होती है, इसी कारण इसे उष्ट्रासन कहते हैं। सावधानी जोर से या झटके से इस आसन को न करें। पीछे झुकते समय जंघा सीधी रखें। अंतिम स्थिति में गर्दन से लेकर घुटने तक का भाग सीधा रहेगा। वापस आते समय झटका देकर न आएँ। जिन लोगों को हर्निया की शिकायत हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। लाभ इस आसन से घुटने, ब्लडर, किडनी, छोटी आँत, लीवर, छाती, लंग्स एवं गर्दन तक का भाग एक साथ प्रभावित होता है, जिससे क‍ि उपर्युक्त अंग समूह का व्यायाम होकर उनका निरोगीपन बना रहता है। श्वास, उदर, पिंडलियों, पैरों, कंधे, कुहनियों और मेरुदंड संबंधी रोग में लाभ मिलता है। उदर संबंधी रोग, जैसे कॉस्ट्रयूपेशन, इनडाइजेशन, एसिडिटी रोग निवारण में इस आसन से सहायता मिलती है। गले संबंधी रोगों में भी यह आसन लाभदायक है। श्रेणी:योगासन