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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

गीताध्यानम्

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अप्रैल 2025 अप्रैल 2025 अप्रैल 2025 गीताध्यानम् ९-श्लोकों का समूह है जिसे प्रायः भगवद्गीता के आरम्भ में जोड़ा जाता है। लेकिन यह मूल गीता का भाग नहीं है। सर्वेपल्लि राधाकृष्णन और नटराज गुरु का विचार है कि गीताध्यानम् वैष्णव तन्त्रसार से लिया गया है। स्वामी चिन्मयानन्द का विचार है कि यह मधुसूदन सरस्वती की रचना है। कुछ का विचार है कि इसकी रचना गीता के भाष्यकार श्रीधर स्वामी ने की है। गीताध्यानम् को बड़ा सम्मान प्राप्त है। गीताध्यानम् के ये ९ श्लोक निम्नलिखित हैं- पार्थाय प्रतिबोधितां भगवता नारायणेन स्वयं व्यासेन ग्रथितां पुराणमुनिना मध्येमहाभारतम् ।अद्वैतामृतवर्षिणीं भगवतीमष्टादशाध्यायिनीं अम्ब त्वामनुसंदधामि भगवद्गीते भवद्वेषिणीम् ॥ १ ॥नमोऽस्तु ते व्यास विशालबुद्धे फुल्लारविंदायतपत्रनेत्र । येन त्वया भारततैलपूर्णः प्रज्वालितो ज्ञानमयः प्रदीपः ॥ २ ॥प्रपन्नपारिजाताय तोत्रवेत्रैकपाणये । ज्ञानमुद्राय कृष्णाय गीतामृतदुहे नमः ॥ ३ ॥सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दनः । पार्थो वत्सः सुधीर्भोक्ता दुग्धं गीतामृतं महत् ॥ ४ ॥वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ५ ॥भीष्मद्रोणतटा जयद्रथजला गांधारनीलोत्पला शल्यग्राहवती कृपेण वहनी कर्णेन वेलाकुला ।अश्वत्थामविकर्णघोरमकरा दुर्योधनावर्तिनी । सोत्तीर्णा खलु पांडवै रणनदी कैवर्तकः केशवः ॥ ६ ॥पाराशर्यवचःसरोजममलं गीतार्थगन्धोत्कटं । नानाख्यानककेसरं हरिकथासद्वासनावासितम् ।लोके सज्जनषट्पदैरहरहः पेपीयमानं मुदा । भूयाद्भारतपंकजं कलिमलप्रध्वंसि नः श्रेयसे ॥ ७ ॥मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम् । यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्दमाधवम् ॥ ८ ॥यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवैः वेदैः सांगपदक्रमोपनिषदैर्गायन्ति यं सामगाः ।ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो ''यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः ॥ ९ ॥ श्रेणी:हिन्दू ग्रन्थ