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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सूनामी

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thumb|upright=1.4|हिन्द महासागर में २००४ में आये भूकम्प और सुनामी के दौरान थाईलैण्ड के क्रबी प्रान्त के आओ-नांग नामक स्थान पर लिया गया चित्र। समुद्री तूफ़ान - इसे जापानी भाषा में सुनामी (津波, suːˈnɑːmi अथवा tsuːˈnɑːmi) बोलते हैं, यानी बन्दरगाह के निकट की लहर।https://www.bbc.com/hindi/news/2011/03/110311_tsunami_history_va आधुनिक युग की पहली सुनामी आपदा दरअसल ये बहुत लम्बी और सैकड़ों किलोमीटर चौड़ाई वाली होती हैं, यानी कि लहरों के निचले हिस्सों के बीच का फ़ासला सैकड़ों किलोमीटर का होता है। परंतु जब ये तट के पास आती हैं, तो लहरों का निचला हिस्सा ज़मीन को छूने लगता है, इनकी गति कम हो जाती है और ऊँचाई बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में जब ये तट से टकराती हैं तो तबाही होती है। इनकी गति 420 किलोमीटर प्रति घण्टा तक और ऊँचाई 10 से 18 मीटर तक हो सकती है। ये लहरे खारे पानी की चलती दीवार के समान है। अक्सर समुद्री भूकम्पों की वजह से ये तूफ़ान पैदा होते हैं। यह प्रशान्त महासागर में बहुत आम हैं, पर बंगाल की खाड़ी, हिन्द महासागर व अरब सागर में नहीं। इसीलिए शायद भारतीय भाषाओं में इनके लिए विशिष्ट नाम नहीं है। प्रक्रिया thumb|200px|सूनामी का चित्रण, १९वीं शती समुद्र के भीतर अचानक जब बड़ी तेज़ हलचल होने लगती है तो उसमें तूफान उठता है जिससे ऐसी लंबी और बहुत ऊंची लहरों का रेला उठना शुरू हो जाता है जो ज़बरदस्त आवेग के साथ आगे बढ़ता है, इन्हीं लहरों के रेले को सूनामी कहते हैं। दरअसल सूनामी जापानी शब्द है जो 'सू' और 'नामी' से मिल कर बना है। सू का अर्थ है समुद्र तट औऱ नामी का अर्थ है लहरें। पहले सूनामी को समुद्र में उठने वाले ज्वार के रूप में भी लिया जाता रहा है लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल समुद्र में लहरें चाँद, सूरज और ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से उठती हैं लेकिन सूनामी लहरें इन आम लहरों से अलग होती हैं। कारण thumb|left|इंडोनेशिया के निकट सूनामी लहरों का उद्गम सूनामी लहरों के पीछे वैसे तो कई कारण होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा असरदार कारण है भूकंप। इसके अलावा ज़मीन धंसने, ज्वालामुखी फटने, किसी तरह का विस्फोट होने और कभी-कभी उल्कापात के असर से भी सूनामी लहरें उठती हैं। भूकंप जब कभी भीषण भूकंप की वजह से समुद्र की ऊपरी परत अचानक खिसक कर आगे बढ़ जाती है तो समुद्र अपनी समांतर स्थिति में ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है। उस वक़्त बनने वाली लहरें सूनामी लहरें होती हैं। इसका एक उदाहरण ये हो सकता है कि धरती की ऊपरी परत फ़ुटबॉल की परतों की तरह आपस में जुड़ी हुई है या कहें कि उस अंडे की तरह है जिसमें दरारें हों। पहले सूनामी को समुद्र में उठने वाले ज्वार के रूप में भी लिया जाता रहा है लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल समुद्र में लहरे चाँद, सूरज और ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से उठती हैं लेकिन सूनामी लहरें इन आम लहरों से अलग होती हैं। जैसे अंडे का खोल सख़्त होता है लेकिन उसके भीतर का पदार्थ लिजलिजा और गीला होता है। भूकंप के असर से ये दरारें चौड़ी होकर अंदर के पदार्थ में इतनी हलचल पैदा करती हैं कि वो तेज़ी से ऊपर की तरफ का रूख़ कर लेता है। धरती की परतें भी जब किसी भी असर से चौड़ी होती हैं तो वो खिसकती हैं जिसके कारण महाद्वीप बनते हैं। तो इस तरह ये सूनामी लहरें बनती हैं। लेकिन ये भी ज़रूरी नहीं कि हर भूकंप से सूनामी लहरें बने। इसके लिए भूकंप का केंद्र समुद्र के अंदर या उसके आसपास होना ज़रूरी है। तट आगमन पर प्रभाव जब ये सुनामी लहरें किसी भी महाद्वीप की उस परत के उथले पानी तक पहुँचती हैं जहाँ से वो दूसरे महाद्वीप से जुड़ा है और जो कि एक दरार के रूप में देखा जा सकता है। वहाँ सूनामी लहर की तेज़ी कम हो जाती है क्योंकि उस जगह दूसरा महाद्वीप भी जुड़ रहा है और वहां धरती की जुड़ी हुई परत की वजह से दरार जैसी जो जगह होती है वो पानी को अपने अंदर रास्ता देती है। लेकिन उसके बाद भीतर के पानी के साथ मिल कर जब सूनामी किनारे की तरफ़ बढ़ती है तो वह इतनी तेज़ी होती है कि 30 मीटर तक ऊपर उठ सकती है और अपने रास्ते में आने वाले पेड़, जंगल या इमारतें इत्यादि सबका सफ़ाया कर सकती है। प्रभाव सूनामी लहरें, समुद्री तट पर भीषण तरीके से हमला करती हैं और जान-माल का बुरी तरह नुक़सान कर सकती है। इनकी भविष्यवाणी करना मुश्किल है। जिस तरह वैज्ञानिक भूकंप के बारे में भविष्य वाणी नहीं कर सकते वैसे ही सूनामी के बारे में भी अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। लेकिन सूनामी के अब तक के रिकॉर्ड को देखकर और महाद्वीपों की स्थिति को देखकर वैज्ञानिक कुछ अंदाज़ा लगा सकते हैं। धरती की जो प्लेट्स या परतें जहाँ-जहाँ मिलती है वहाँ के आसपास के समुद्र में सूनामी का ख़तरा ज़्यादा होता है। जैसे आस्ट्रेलियाई परत और यूरेशियाई परत जहाँ मिलती हैं वहाँ सुमात्रा स्थित है जो कि दूसरी तरफ फिलीपीनी परत से जुड़ा हुआ है। सूनामी लहरों का कहर यहाँ भयंकर रूप में देखा जा रहा है। इन्हें भी देखें २००४ हिंद महासागर में भूकंप और सुनामी सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ि सुनामी सुनामी के बारे में जानकारी एवं बचाव के उपाय सुनामी और विज्ञान श्रेणी:प्राकृतिक आपदाएँ श्रेणी:प्राकृतिक संकट श्रेणी:महासागरीय तरंगे श्रेणी:मौसम संबंधित विपदायें श्रेणी:भूवैज्ञानिक संकट श्रेणी:समुद्र-वैज्ञानिक पारिभाषिकी