411 REFERENCE · Wikipedia
भारत में मधुमक्खी पालन
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
thumb|250px|right|मुरैना ज़िला, मध्य प्रदेश में मधुमक्खी पालन
भारत में मधुमक्खी पालन का प्राचीन वेद और बौद्ध ग्रंथों में उल्लेख किया गया हैं। मध्य प्रदेश में मध्यपाषाण काल की शिला चित्रकारी में मधु संग्रह गतिविधियों को दर्शाया गया हैं। हालांकि भारत में मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक पद्धतियां १९वीं सदी के अंत में ही शुरू हुईं, पर मधुमक्खियों को पालना और उनके युद्ध में इस्तेमाल करने के अभिलेख १९वीं शताब्दी की शुरुआत से देखे गए हैं। भारतीय स्वतंत्रता के बाद, विभिन्न ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के माध्यम से मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित किया गया। मधुमक्खी की पाँच प्रजातियाँ भारत में पाई जाती हैं जो कि प्राकृतिक शहद और मोम उत्पादन के लिए व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
इतिहास
पुरातन
मधुमक्खी, शहद और मधुमक्खी पालन का उल्लेख भारत के विभिन्न हिंदू वैदिक ग्रंथों में जैसे ऋग्वेद, अथर्व वेद, उपनिषद, भगवद गीता, मार्कण्डेय पुराण, राज निघटू, भारत संहिता, अर्थशास्त्र और अमरकोश में किया गया है। विभिन्न बौद्ध ग्रंथों जैसे विनयपिटक, अभिधम्मपिटक और जातक कहानियों में भी मधुमक्खी और शहद का उल्लेख है। वत्स्ययान के कामसूत्र में शहद का उल्लेख यौन सुख में महत्वपूर्ण कारक के रूप में किया गया हैं।घोश १९९४ xiii लोकप्रिय महाकाव्य रामायण में एक "मधुबन" (शाब्दिक अर्थ - शहद का जंगल) का वर्णन किया है जिसकी खेती सुग्रीव ने की थी। महाकाव्य महाभारत में मथुरा के निकट एक अलग मधुबन का उल्लेख किया गया है जहाँ कृष्ण और राधा मिला करते थे। भारत को "शहद और दूध की भूमि" कहा गया है। यहाँ के जंगलों का उपयोग मधुमक्खियों के पालन के लिए किया जाता था।घोश १९९४ ६
आधुनिक इतिहास
मध्यपाषाण काल और उसके बाद के काल की विभिन्न शिला चित्रकारी मध्य प्रदेश और पचमढ़ी क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इन चित्रों में मुख्य रूप से एपिस डोरसॅटा और एपिस मेलिफेरा प्रजातियों की मधुमक्खियों के छत्तेसे जंगल में मधु संग्रह गतिविधियों को दर्शाया गया हैं।क्रेन २०१३ ७३-७४
जब ब्रिटिश ने १८४२-४९ में वर्तमान ओडिशा राज्य के पूर्वी तट पर आक्रमण किया, तो कोंध जनजाति ने उनके विरुद्ध पालतू मधुमक्खियों का प्रयोग किया था। लेकिन उनकी पालन की तकनीकों के बारे में कुछ जानकारी उपलब्ध नहीं हैं।घोश १९९४ ६ भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में मणिपुर और नागालैंड के पहाड़ी इलाकों में विभिन्न जनजातियों ने मधुमक्खी पालन के लिए लकड़ी या मिट्टी के बर्तन का प्रयोग किया जाता है। किन्तु शहद को मधुकोश से निकालने के बेढंगे तरीके प्रयोग में लाये जाते थे जिसके कारण मधु में मधुमोम की मिलावट की संभावना रहती थी और इस प्रक्रिया में कई मक्खियाँ भी मर जाती थी। कुछ मणिपुरी जनजातियों द्वारा एक खोखले बांस के अंत में कील लगाकर छत्ते से मधु संग्रह की प्रक्रिया लोकप्रिय थी। खोखले बांस से शहद को एक पीपा में बहने दिया जाता था।घोश १९९४ ५-६
१८८० में पश्चिम बंगाल क्षेत्र में और १८८३-८४ के दौरान पंजाब और कुल्लू क्षेत्रों में एपिस सेराना को वैज्ञानिक तरीके से पालने के असफल प्रयास किए गए। १८८४ में भारत में पहली बार डगलस नामक डाक व तार विभाग (तत्कालीन पोस्ट एण्ड टेलीग्राफ विभाग) के एक ब्रिटिश अधिकारी द्वारा हॅण्डबुक औफ बीकिपींग पुस्तक प्रकाशित हुई थी। पहला सफल प्रयास केरल में रेवरेंड न्यूटन द्वारा किया गया था, जब उन्होंने एक विशेष रूप से बनाए गए कृत्रिम छत्ते से १९११-१७ के दौरान ग्रामीण लोगों को मधुमक्खी पालन से शहद निर्मीती का प्रशिक्षण दिया। यह छत्ता "न्यूटन हाइव" के नाम से लोकप्रिय हुआ। १९१७ में त्रवनकोर इलाकों में और १९२५ में मैसूर के क्षेत्रों में काफी मधुमक्खी पालन गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों को मद्रास क्षेत्र में १९३१ में, पंजाब में १९३३ में और उत्तर प्रदेश में १९३८ में प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। १९३८-३९ के दौरान http://beekeeperindia.com/web/ अखिल भारतीय मधुमक्खी पालन संघ का गठन किया गया और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा १९४५ में पंजाब में मधुमक्खी पालन अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया था।https://books.google.co.in/books?id=HP6PBAAAQBAJ&pg=PA14 Beekeeping for Poverty Alleviation and Livelihood Security: Vol. 1: Technological Aspects of Beekeeping Springer १४-१५ राकेश कुमार गुप्ता वीम रेब्रोक जोहान वान वीन अनूराधा गुप्ता २०१४ 9789401791991 गरीबी उन्मूलन और आजीविका सुरक्षा के लिए मधुमक्खी पालन: खंड 1: मधुमक्खी पालन के तकनीकी पहलू अंग्रेज़ी 13 जुलाई 2017 https://web.archive.org/web/20170815062409/https://books.google.co.in/books?id=HP6PBAAAQBAJ&pg=PA14 15 अगस्त 2017 live १९३१ में कोयंबतूर कृषि महाविद्यालय (वर्तमान तमिल नाडु कृषि विश्वविद्यालय) द्वारा मधुमक्खी पालन को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया।घोश १९९४ १०
स्वतंत्रता के बाद
भारत में मधुमोम और प्राकृतिक शहद का वार्षिक उत्पादन (१९९३-२०१८) स्रोत: संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठनhttp://faostat3.fao.org/browse/Q/QL/E Honey production: Browse data – FAOSTAT Domains /Production/Livestock Primary; Item: Honey, natural; Beeswax; Area: India; Year: as needed". ६ मई २०१६ २०१३ संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन, सांख्यिकी मंडल (FAOSTAT) अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20160305013333/http://faostat3.fao.org/browse/Q/QL/E 5 मार्च 2016 dead bar-chart 1000 19400 : 19400 : 19400 : 19600 : 19400 : 19400 : 19400 : 19600 : 19600 : 19600 : 19600 : 19600 : 19600 : 19600 : 19600 : 21200 : 21200 : 23000 : 23000 : 23100 : 23200 : 23399 : 23955 : 24918 : 25523 : 25895 48307 : 47437 : 56173 : 52000 : 51000 : 52121 : 56945 : 52000 : 52000 : 52000 : 52000 : 52000 : 52000 : 52000 : 51000 : 55000 : 55000 : 60000 : 60000 : 60000 : 61000 : 61938 : 62472 : 64899 : 66415 : 67442 blue: grey मधुमोम (टन में) : प्राकृतिक शहद (टन में) 1993 : 1994 : 1995 : 1996 : 1997 : 1998 : 1999 : 2000 : 2001 : 2002 : 2003 : 2004 : 2005 : 2006 : 2007 : 2008 : 2009 : 2010 : 2011 : 2012 : 2013 : 2014 : 2015 : 2016 : 2017 : 2018
१९४७ में भारत की आजादी के बाद, मधुमक्खी पालन का महत्व जानते महात्मा गांधी ने इसे अपने ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में शामिल किया। प्रारंभ में, मधुमक्खी पालन उद्योग अखिल भारतीय खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (तत्कालीन) के अधीन था जिसे १९५६ में खादी विकास और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) में परिवर्तित किया गया था, जो बदले में उद्योग मंत्रालय के अधीन था। १९६२ में केवीआईसी ने पुणे में http://nbb.gov.in/ केन्द्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया। वाई एम सी ए और अन्य ईसाई मिशनरियों द्वारा केरल और तमिलनाडु के क्षेत्रों में रबड़ बागानों के साथ मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया गया। कर्नाटक के कुर्ग और महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में भी मधुमक्खी पालन का विकास हुआ। रामकृष्ण मिशन ने इसे पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ावा दिया। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने मधुमक्खी पालन पर अनुसंधान किया और एपिस मेलिफेरा प्रजाति को भारत में मधुमक्खी पालन हेतू बढ़ावा दिया।घोश १९९४ ११-१२
दशक १९९० के अन्तिम वर्षों में भारत में शहद की उपज काफी बढ़ी जिसमें ७०% शहद उत्पादन व्यावसाय के अनौपचारिक खंडों से आता है। शहद के प्रमुख निर्यातक के रूप में चीन, अर्जेंटीना, जर्मनी, हंगरी, मैक्सिको और स्पेन के पीछे भारत आता है। २००५ में, भारत के शहद निर्यात $२६॰४ मिलियन अमरीकी डॉलर के मूल्य पर पहुंच गया। ६६% निर्यात उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापारी देशों में होता है। यूरोपीय संघ द्वारा $६ मिलियन अमरीकी डॉलर के शहद का सेवन किया गया था जिसमें अनुमान लगाया है की जर्मनी का हिस्सा लगभग ७५% तक था। २००५ में, सऊदी अरब एकमात्र विकासशील देश था जो कि काफी हद तक ($22 लाख अमेरिकी डॉलर) भारतीय शहद का उपभोगता था। १९९६ में भारत का निर्यात काफी कम था; लगभग $१ मिलियन अमरीकी डॉलर तक।http://www.sadctrade.org/files/Honey%20Trade%20Information%20Brief.pdf Trade Information Brief – Honey SADC Trade PDF 6 May 2016 व्यापार सूचना संक्षिप्त - शहद अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20150421074707/http://www.sadctrade.org/files/Honey%20Trade%20Information%20Brief.pdf 21 अप्रैल 2015 dead
दक्षिणी भारत में तमिलनाडु के निलगिरी क्षेत्र में मधु संग्राहण करने वाली विभिन्न जनजातियों हैं। इसलिये, कोटागिरी स्थित कीस्टोन फाउंडेशन ने २००७ में मधुमक्खी पालन और तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए तमिलनाडु के उदगमंदलम में http://nilgiris.nic.in/honey_bee.html शहद और मधुमक्खी संग्रहालय शुरू किया था।Tourism – Honey & Bee Museum http://nilgiris.nic.in/honey_bee.html २५ फ़रवरी २०१५ निलगिरी जिला प्रशासन ६ मई, २०१६ पर्यटन - शहद और मधुमक्खी संग्रहालय अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20170719075340/http://nilgiris.nic.in/honey_bee.html 19 जुलाई 2017 live इस समूह ने ऊटी में २०१५ में "ए प्लेस टू बी" नामक एक जलपान गृह भी खोला जो शहद से बने व्यंजनों में माहिर है।http://www.thehindu.com/news/national/a-buzzworthy-effort/article7747583.ece A buzzworthy effort द हिन्दू १० अक्तूबर २०१५ ६ मई, २०१६ शोनाली मुतलली अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20170815070421/http://www.thehindu.com/news/national/a-buzzworthy-effort/article7747583.ece 15 अगस्त 2017 live
मधुमक्खियों के प्रकार
व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण ऐसी पाच मधुमक्खीयों की प्रजातियां भारत में हैं; एपिस डोरसॅटा (रॉक बी), एपिस सेराना इन्डिका (इंडियन हाइव बी), एपिस फ्लोरिया (ड्वार्फ बी), एपिस मेलिफेरा (यूरोपीय या इतालवी मधुमक्खी) और टेट्रागोनुला इरिडीपेनिस (डॅमर या स्टींगलेस बी)। एपिस डोरसॅटा मधुमक्खियां आक्रामक होती हैं और इनका पालन नहीं हो सकता। इसलिये जंगल से इनका शहद लिया जाता है। एपिस फ्लोरिया से शहद भी जंगल से लिया जात है क्योंकि ये घुमन्तु प्रजाति हैं और बहुत कम उपज देती हैं। समशीतोष्ण क्षेत्र की मूल निवासी एपिस सेराना और एपिस मेलिफेरा कृत्रिम मधुमक्खी बक्से में संवर्धन करने के लिए योग्य हैं। टेट्रागोनुला इरिडीपेनिस मधुमक्खियों का पालन किया जा सकता है और ये विभिन्न फसलों के परागण में महत्वपूर्ण कारक हैं लेकिन शहद की कम उपज देती हैं।http://agritech.tnau.ac.in/farm_enterprises/fe_api_typesofhoneybee.html Types of honey bee तमिल नाडु कृषि विश्वविद्यालय 4 May 2016 मधुमक्खियों के प्रकार अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20160515073936/http://agritech.tnau.ac.in/farm_enterprises/fe_api_typesofhoneybee.html 15 मई 2016 dead
+प्रति छत्ता प्रति वर्ष औसत शहद उपज मधुमक्खी उपज एपिस डोरसॅटा 36 kg एपिस सेराना इन्डिका 6 kg to 8 kg एपिस फ्लोरिया 500 g एपिस मेलिफेरा 25 kg to 40 kg टेट्रागोनुला इरिडीपेनिस 100 g
व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण पाच मधुमक्खीयों की प्रजातियां center 120 150 File:Apis dorsata-small.jpg एपिस डोरसॅटा File:Apis indica.jpg एपिस सेराना इन्डिका File:BBee002.jpg एपिस फ्लोरिया File:Apis mellifera flying2.jpg एपिस मेलिफेरा File:Smallbee.JPG टेट्रागोनुला इरिडीपेनिस
सन्दर्भ
ग्रन्थसूची
harv इथेल क्रेन The World History of Beekeeping and Honey Hunting https://books.google.co.in/books?id=WVh3AAAAQBAJ&pg=PA494 रूटलेज २०१३ 9781136746697 मधुमक्खी पालन और शहद की खोज का विश्व इतिहास अंग्रेज़ी 13 जुलाई 2017 https://web.archive.org/web/20171217035050/https://books.google.co.in/books?id=WVh3AAAAQBAJ&pg=PA494 17 दिसंबर 2017 live
harv जी॰ के॰ घोश Beekeeping in India https://books.google.co.in/books?id=MGRo1OTyUT8C&printsec=frontcover १९९४ एपीएच प्रकाशन 9788170246442 भारत में मधुमक्खी पालन अंग्रेज़ी 13 जुलाई 2017 https://web.archive.org/web/20171217040310/https://books.google.co.in/books?id=MGRo1OTyUT8C&printsec=frontcover 17 दिसंबर 2017 live
श्रेणी:मधुमक्खी पालन
श्रेणी:भारत में कृषि