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नथाराम शर्मा गौड़
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नथाराम शर्मा गौड़ yes 1874 01 14 दरियापुर, हाथरस, ब्रिटिश राज (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत) yes 1943 12 7 1874 01 14 आगरा, ब्रिटिश राज (वर्तमान आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) लेखक, कलाकार हिंदी भारतीय अमर सिंह राठौड़, सुल्ताना डाकू, ऊदल का ब्याह, संगीत हरीशचंद्र, वीरांगना वीरमती
नथाराम शर्मा गौड़ (१८७४ - १९४३) उत्तर प्रदेश, भारत में हाथरस के इंदरमन अखाड़े के नौटंकी (उत्तर भारत के ओपेरा थियेटर) नाटकों के लेखक और कलाकार थे।https://www.oxfordreference.com/view/10.1093/oi/authority.20110803100223779 Oxford reference 5 August 2020Pande Mrinal 2013-01-11 History Nautanki nation https://www.livemint.com/Leisure/pfmuo0p8BncY0GKchwnTTJ/History--Nautanki-nation.html 2020-08-05 Livemint en नौटंकी नाटक जीवन से बड़ा था। बॉलीवुड फालतू के कार्यक्रमों के पूर्ववर्ती, यह लावण्य, चकाचौंध और शुद्ध कल्पना से भरी दुनिया थी। गीत, नृत्य, रोमांस और मेलोड्रामा ने कई लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस शैली में किए जाने वाले लोकप्रिय नाटक राजा हरीश्चंद्र जैसे ऐतिहासिक शख्सियतों से भरे हुए थे, जिन्होंने अपनी बात रखने के लिए धन, राज्य, पत्नी और बच्चे को त्याग दिया था।
इनकी नौटंकी अमर सिंह राठौड़ का प्रदर्शन ब्रजभाषा के द्वितीय चलचित्र जमुना किनारे में किया गया था।
आरंभिक जीवन
नथाराम का जन्म 14 जनवरी 1874 को हाथरस जिले के दरियापुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह बेहद गरीब परिवार से थे। वह एक बच्चे के रूप में हाथरस आए, अपने अंधे पिता, भगीरथमल का मार्गदर्शन करते हुए और भिक्षा के लिए गाते हुए।https://www.jagran.com/uttar-pradesh/aligarh-city-natharam-of-hathras-played-the-role-of-a-dancer-all-over-the-world-17773309.html हाथरस के नथाराम ने दुनियाभर में बजाया स्वांग का डंका 5 August 2020 उनकी मधुर आवाज और आकर्षक चेहरे ने हाथरस के इंदरमन अखाड़े के शिष्यों में से एक चिरंजीलाल का ध्यान आकर्षित किया। नथाराम को अखाड़े ने गोद लिया था, जहां उन्होंने पढ़ने और लिखने के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत और नृत्य सीखा। नथाराम ने बहुत ही कम समय में कला में महारत हासिल कर ली और अपनी टोली के एक स्टार बन गए। बाद में उन्होंने अपनी सेना बनाई और 'श्याम' प्रिंटिंग प्रेस शुरू की। नाथराम ने उत्तरी अमेरिका, इंडोनेशिया, मॉरीशस और म्यांमार में अपने नाटकों का प्रदर्शन किया। रंगून में कई लोगों ने नथाराम के नाटकों को समझने के एकमात्र उद्देश्य से हिंदी सीखी।
कार्य्य
उन्होंने १८९७ और १९४० के बीच ११३ नाटक लिखे।https://publishing.cdlib.org/ucpressebooks/view?docId=ft9v19p2qq&chunk.id=d0e3269&toc.id=d0e3269&brand=ucpress Natharam and the Indarman Akhara of Hathras: 1892-1920 5 August 2020
सन्दर्भ