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मंजूषा कला

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अंगूठाकार|329x329पिक्सेल|सर्प महोत्सव में उपयोग की जाने वाली मंजूषा मंजूषा कला एक भारतीय कला है जो मुख्यतः बिहार के भागलपुर एवं अंग प्रदेश में लोकप्रिय है। मंजूषा मंदिर के आकार के बक्से होते हैं जिनमें आठ स्तंभ होते हैं। ये बांस, जूट और कागज से बनाये जाते हैं। मंजूषा पर हिंदू देवी-देवताओं और अन्य पात्रों के चित्र भी होते हैं। मंजूषा का उपयोग विषहरी पूजा में किया जाता है, जो सर्पों के विष को हरने वाली देवी विषहरी को समर्पित एक त्योहार है।http://www.sahapedia.org/manjusha-art-eastern-bihar Manjusha Art of Eastern Bihar Sahapedia en 2025-05-27 इस कला को जी आई टैग भी मिल चुका है। BIHAR’S ‘MANJUSHA ART’ GRANTED A GI TAG ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मंजूषा कला ७वीं शताब्दी की है और इसे बिहार की सबसे पुरानी कला रूपों में से एक माना जाता है। संस्कृत शब्द "मंजूषा" का अर्थ 'बक्सा' या "डिब्बा" है। पारंपरिक रूप से ये बांस, जूट और कागज से बने मंदिर के स्वरूप वाले पात्र थे, जो विभिन्न देवताओं और पौराणिक दृश्यों को दर्शाने वाले चित्रों से सजाए गए होते थे। इन डिब्बों ने विषहरी पूजा के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।http://manjushaart.in/ Manjusha Art Research Foundation manjushaa Manjusha Art Research Foundation en-US 2025-05-27 मंजूषा कला एक पारंपरिक लोक कला है जो भारत के अंग क्षेत्र (विशेष रूप से भागलपुर) से उत्पन्न हुई है। इस कला में घूमते हुए सांप बिहुला की प्रेम और बलिदान की कथा को दर्शाते हैं।http://manjushaart.rediffblogs.com/ The Internationally recognized famous Indian Art related to Ang region https://web.archive.org/web/20060305022925/http://manjushaart.rediffblogs.com/ 5 March 2006 25 June 2010 मंजूषा कला की विशेषताएँ मंजुषा कला एक रेखाचित्र कला है। इसमें तीन रंगों का उपयोग किया जाता है। मंजूषा में कला सीमाएँ (बॉर्डर) बहुत महत्वपूर्ण हैं। मंजूषा कला एक लोक कला है। मंजूषा आर्ट एक स्क्रॉल पेंटिंग है। मंजूषा कला पूरी तरह से बिहुला-विषहारी की लोककथाओं पर आधारित है। मंजूषा कला के प्रमुख वस्तुएँ- सांप, चंपा फूल, सूर्य, चंद्रमा, हाथी, कछुआ, मछली, मैना पक्षी, कमल फूल, कलश, तीर धनुष, शिवलिंग, वृक्ष आदि। मंजूषा कला के प्रमुख पात्र- भगवान शिव, मनसा देवी (बिश्री, बिहुला, बाला, हनुमान, चंदू सौदागर) मंजूषा कला में सीमाएँ- बेलपतर, लेहरिया, त्रिभुज, मोख और सांपों की शृंखला।https://www.manjushakala.in/manjusha-art/? Manjusha Art – मंजूषा कला www.manjushakala.in 2025-05-27 कलाकार एवं पुरस्कार चक्रवर्ती देवी को पहली बार 2012 में मंजुषा कला के क्षेत्र में सीता देवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 2013 में श्रीमती निर्मला देवी को बिहार कला पुरस्कार "सीता देवी पुरस्कार" से सम्मानित किया गया। मंजूषा कला के क्षेत्र में, स्वदेशी कला रूप "मंजूषा कला" के पुनरुद्धार की दिशा में श्री मनोज पंडित को प्रथम राज्य पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार उपेंद्र महरथी शिल्प अनुसंधान संस्थान और उद्योग विभाग, बिहार द्वारा दिया जाता है। बिहार के कला, संस्कृति और युवा मामलों के विभाग की सिफारिश पर संस्कृति मंत्रालय ने 2014 में श्री मनोज पंडित को 'मंजुषा कला गुरु पुरस्कार' से सम्मानित किया।घर सजे मंजूषा से : सृजनशीलता और निष्ठा से मनोज ने दिलाया मंजूषा कला को मुकाम 2016 में-उलूपी झा अपनी मंजुषा पेंटिंग के लिए ऑनलाइन मतदान के आधार पर केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा चुनी गई देश भर की 100 सफल महिलाओं में से एक हैं। अंजना देश-विदेश में दुर्लभ मंजूषा कला का नवजागरण कर रहीं भागलपुर की अंजना, नई पीढ़ी को सिखा रहीं यह कला इन्हें भी देखें अंगिका अंग लिपि अंग महाजनपद अंगा सन्दर्भ श्रेणी:भारतीय कला श्रेणी:हिन्दू कला