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उत्कीर्णन
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right|thumb|300px|लकड़ी पर उत्कीर्ण सुन्दर दृष्य
लकड़ी, हाथीदाँत, पत्थर आदि को गढ़ छीलकर अलंकृत करने या मूर्ति बनाने को उत्कीर्णन या नक्काशी करना (अंग्रेजी में कर्विग) कहते हैं। यहाँ काष्ठ उत्कीर्णन पर प्राविधिक दृष्टिकोण से विचार किया गया है।
उत्कीर्णन के लिए लकड़ी को सावधानी से सूखने देना चाहिए। एक रीति यह है कि नई लकड़ी को बहते पानी में डाल दिया जाए, जिसमें उसका सब रस बह जाए हवादार जगह में छोड़ देना काफी होता है। शीशम, बाँझ (ओक) और लकड़ियों पर सूक्ष्म उत्कीर्णन किया जा सकता है। मोटा काम प्राय: सभी लकड़ियों पर हो सकता है। उत्कीर्णन के लिए छोटी बड़ी अनेक प्रकार की चपटी और गोल रुखानियों तथा छुरियों का प्रयोग किया जाता है। काम को पकड़ने के लिए बाँक (वाइस) भी हो तो सुविधा होती है। काठ की एक मुँगरी (हथौड़ा) भी चाहिए। कोने अँतरे में लकड़ी को चिकना करने के लिए टेढ़ी रेती भी चाहिए। बारीक काम में रुखानी को ठोंका नहीं जाता। केवल एक हाथ की गदोरी से दबाया जाता है और दूसरे हाथ की अँगुलियों से उसके अग्र को नियंत्रित किया जाता है। उत्कीर्णन सीख सकता है। नौसिखुए के लिए दस बारह औजार पर्याप्त होंगे। उत्कीर्णन के लिए बने यंत्रों को बढ़िया इस्पात का होना चाहिए और उन्हें छुरा तेज करने की सिल्ली पर तेज करे अंतिम धार चमड़े की चमोटी पर रगड़कर चढ़ानी चाहिए। अतीक्ष्ण यंत्रों से काम स्चच्छ नहीं बनता और लकड़ी के फटने या टूटने का डर रहाता है। गोल रुखानियों को नतोदार पृष्ठ की ओर से तेज करने के लिए बेलनाकार सिल्लियाँ मिलती हैं या साधारण सिल्लियाँ भी घिसकर वैसी बनाई जा सकती हैं।
यों तो थोड़ा बहुत उत्कीर्णन सभी जगह होता है, पंरतु कश्मीर की बनी अखरोट की लकड़ी की उत्कीर्ण वस्तुएँ बड़ी सुंदर होती हैं। चीन और जापान के मंदिरों में काष्ठोत्कीर्णन के आश्चर्यजनक सूक्ष्म और सुंदर उदाहरण मिलते हैं।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
काष्ठकला
बाहरी कड़ियाँ
Woodcarving Magazine
Sharpening, Honing and Polishing Gouges and Other Carving Tools by R.M Mottola
The British Woodcarvers Association
Maori Wood Carving
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