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411 समाचार
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संकटा देवी मंदिर लखीमपुर खीरी

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संकटा देवी मंदिर हिन्दू नवरात्रि लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश भारत संकटा देवी मंदिर, लखीमपुर खीरी शहर का पौराणिक संकटा देवी मंदिर करीब एक हजार साल से अधिक पुराना है। शहर के बीच स्थित यह मंदिर देवी भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है। शहर के चार शक्ति पीठों में संकटा देवी मंदिर का प्रमुख स्थान है। इस मंदिर में माता लक्ष्मी की प्रतिमा है। इनके नाम पर ही शहर का नाम भी लक्ष्मीपुर हुआ, जो बाद में लखीमपुर कहलाया।https://circle.page/lakhimpur_kheri/news/UP5588498 Post by वी.के सिंह - Circle App Circle App 2021-06-02 en 2 जून 2021 https://web.archive.org/web/20210602220201/https://circle.page/lakhimpur_kheri/news/UP5588498 dead मंदिर का इतिहास ऐसी किवदंती है कि इस मंदिर की स्थापना रुकमणी की इच्छा पर पशुपतिनाथ जाते समय महाभारत युद्ध के बाद श्रीकृष्ण ने की थी। उस दौरान श्रीकृष्ण ने जिन चार शक्तिपीठों की स्थापना की, उनमें यह पहला मंदिर है। कभी इस मंदिर के चारों ओर विशाल सरोवर हुआ करता था जो बाद में समाप्त हो गया। मंदिर का जीर्णोद्धार यहां के तत्कालीन महेवा स्टेट के राजाओं ने समय-समय पर कराया है। आज भी यह मंदिर राज परिवार के संरक्षण में है।https://www.patrika.com/lakhimpur-kheri-news/famous-maa-sankata-devi-temple-lakhimpur-kheri-hindi-news-1540981/ हिंदी खबर, Latest News in Hindi, हिंदी समाचार, ताजा खबर Patrika News hindi 2021-06-02 विशेषता पौराणिक मंदिर होने के कारण इसकी वास्तुकला भी एक हजार साल पुराने मंदिरों जैसी है। इसका विशाल परिसर भक्तों के बैठने के लिए पर्याप्त है। समय-समय पर भक्त यहां पर पूजा अर्चना कर आते हैं। नवरात्रि के चारों पर्व इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता हैं। इसके अतिरिक्त जनपद खीरी या उसके पास-पडोस कोई ऐसा मन्दिर नहीं है जहाँ नवरात्रों के नव दिनों तक लगातार "माँ" के जगराते का कार्यक्रम निर्बाध गति से आयोजित न होता हो इसके अतिरिक्त वर्ष भर मन्दिर में कोई न कोई आयोजन होता रहता है, अन्नप्राशन,मुंडन,उपनयन संस्कार तो यहाँ होते ही रहते हैं साथ ही वैवाहिक कार्यक्रमों का यहाँ पूर्ण विधि-विधान के साथ आयोजित होते रहते हैं, वर्ष में कई बार यहां श्रीमद्भागवत का आयोजन भी होती है। यहाँ भी पांच समय "माँ" की आरती होती है,प्रथम-मंगला आरती,द्वितीय-प्रातः आरती (श्रंगारो परांत )आठ बजे तृतीय आरती (विश्राम)रात्रि के दस बजे आरती)अपरान्ह 3 बजे ,चतुर्थ आरती सायं 7 बजे और शयन आरती रात्रि के दस बजे होने के पश्चात "माँ" शयन के लिए चली जाती हैं | सन्दर्भ __सूचीबद्ध__ __विषय_जोड़ें_कड़ी__ श्रेणी:लखीमपुर खीरी ज़िला श्रेणी:उत्तर प्रदेश में मन्दिर