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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बाबा राघवदास

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बाबा राघवदास (१२ दिसम्बर १८९६ - १५ जनवरी १९५८), भारत के एक सन्त तथा भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी थे। उन्हें 'पूर्वांचल का गांधी' कहा जाता है। जीवनी बाबा राघवदास का जन्म १२ दिसम्बर १८९६ को पुणे (महाराष्ट्र) में एक संभ्रान्त ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री शेशप्पा और माता का नाम श्रीमती गीता था। इनके पिता एक नामी व्यवसायी थे। बाबा राघवदास के बचपन का नाम राघवेन्द्र था। राघवेन्द्र को बचपन में ही अपने परिवार से सदा के लिए अलग होना पड़ा क्योंकि राघवेन्द्र का हरा-भरा परिवार प्लेग जैसी महामारी की गाल में समा गया। १९१३ में १७ वर्ष की अवस्था में राघवेन्द्र एक सिद्ध गुरु की खोज में अपने प्रान्त को अलविदा कर दिए और प्रयाग, काशी आदि तीर्थों में विचरण करते हुए गाजीपुर (उत्तरप्रदेश का एक जनपद) पहुँचे जहाँ उनकी भेंट मौनीबाबा नामक एक संत से हुई। मौनीबाबा ने राघवेन्द को हिन्दी सिखाई। गाजीपुर में कुछ समय बिताने के बाद राघवेन्द बरहज (देवरिया जनपद की एक तहसील) पहुँचे और वहाँ वे एक प्रसिद्ध संत योगीराज अनन्त महाप्रभु से दीक्षा लेकर उनके शिष्य बन गए। १९२१ में गाँधीजी से मिलने के बाद बाबा राघवदास स्वतंत्र भारत का सपना साकार करने के लिए स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए तथा साथ ही साथ जनसेवा भी करते रहे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस कर्मयोगी को कई बार जेल की हवा भी खानी पड़ी पर माँ भारती का यह सच्चा लाल विचलित न होते हुए पूर्ण निष्ठा के साथ अपना कर्म करता रहा। १९३१ में गाँधीजी के नमक सत्याग्रह को सफल बनाने के लिए राघवबाबा ने क्षेत्र में कई स्थानों पर जनसभाएँ की और जनता को सचेत किया। बाबा देवरियाई जनता के कितने प्रिय थे, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि १९४८ के एम.एल.ए. (विधायक) के चुनाव में वे कॉंग्रेस प्रत्याशी थे उन्होंने समाजवादी के प्रत्याशी प्रख्यात शिक्षाविद्ध, समाजसुधारक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य नरेन्द्र देव को पराजित किया। २३ डिसेंबर १९४९ के ब्रह्ममुहूर्त समय आप स्वयं श्री रामलला के प्रगट होने के साक्षी है। बाबा राघवदास ने अपना सारा जीवन जनता की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने कई सारे समाजसेवी संस्थानों की स्थापना की और बहुत सारे समाजसेवी कार्यों की अगुआई भी। १५ जनवरी १९५८ को माँ भारती का यह सपूत, जनता का सच्चा सेवक अपनों से विदा लेकर ब्रह्म में विलीन हो गया। उनकी स्मृति में पूर्वी उत्तर प्रदेश में अनेक शिक्षा संस्थाओं का नाम उनके नाम पर रखा गया है, जैसे- बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर बाबा राघवदास इण्टर कॉलेज, देवरिया बाबा राघवदास स्नात्कोत्तर महाविद्यालय, बरहज बाहरी कड़ियाँ बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे बाबा राघवदास (दैनिक जागरण) हमें माफ करना बाबा राघवदास (दैनिक जागरण) श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम