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संसदीय समिति
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2014
भारतीय संसद का बहुत सा काम सभा की समितियों द्वारा निपटाया जाता है, जिन्हें संसदीय समितियां कहते हैं। संसदीय समिति से तात्पर्य उस समिति से है, जो सभा द्वारा नियुक्त या निर्वाचित की जाती है अथवा अध्यक्ष द्वारा नाम-निर्देशित की जाती है और अध्यक्ष के निदेशानुसार कार्य करती है तथा अपना प्रतिवेदन सभा को या अध्यक्ष को प्रस्तुत करती है। समिति का सचिवालय लोक सभा सचिवालय द्वारा उपलब्घ कराया जाता है।
आधुनिक युग में संसद को न केवल विभिन्न और जटिल प्रकार का, बल्कि मात्रा में भी अत्यधिक कार्य करना पड़ता है। संसद के पास इस कार्य को निपटाने के लिए सीमित समय होता है। इसलिए संसद उन सभी विधायी तथा अन्य मामलों पर, जो उसके समक्ष आते हैं, गहराई के साथ विचार नहीं कर सकती।
प्रकार
अपनी प्रकृति के अनुसार संसदीय समितियां दो प्रकार की होती हैं: स्थायी समितियां और तदर्थ समितियां। स्थायी समितियाँ स्थायी एवं नियमित समितियां हैं जिनका गठन समय-समय पर संसद के अधिनियम के उपबंधों अथवा लोक सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियम के अनुसरण में किया जाता है। इन समितियों का कार्य अनवरत प्रकृति का होता है। वित्तीय समितियां, विभागों से संबद्ध स्थायी समितियां (डीआरएससी) तथा कुछ अन्य समितियां स्थायी समितियों की श्रेणी के अंतर्गत आती हैं। तदर्थ समितियां किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए नियुक्त की जाती हैं और जब वे अपना काम समाप्त कर लेती हैं तथा अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत कर देती हैं, तब उनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। प्रमुख तदर्थ समितियां विधेयकों संबंधी प्रवर तथा संयुक्त समितियां हैं। रेल अभिसमय समिति, संसद भवन परिसर में खाद्य प्रबंधन संबंधी संयुक्त समिति इत्यादि भी तदर्थ समितियों की श्रेणी में आती हैं।
मोटे तौर पर संसदीय समितियों के निम्नलिखित श्रेणियों में रखा जाता है:
(क) लोक सेवा समिति,
(ख) नियम समिति,
(ग) विशेषाधिकार समिति, तथा
(घ) तदर्थ समिति।
संसदीय राजाभाषा समिति, १९५७
राजभाषा आयोग के 1956 के प्रतिवेदन पर विचार करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 344 के अधीन एक संसदीय राजभाषा समिति की स्थापना की गई थी। इस समिति के अध्यक्ष तत्कालीन गृह मंत्री गोविन्दवल्लभ पंत थे। यह समिति गृह मंत्री के 3.9.1957 के प्रस्ताव के आधार पर गठित की गई थी।
इस समिति ने आयोग के प्रतिवेदन पर विचार करके अपनी राय राष्ट्रपति को दी। राष्ट्रपति ने उस पर विचार करने के पश्चात् 27.4.1960 को एक आदेश निकाला। इस आदेश के अनुच्छेद 13 में यह कहा गया था-
13. विधि क्षेत्र में हिंदी में काम करने के लिए आवश्यक आरंभिक कदम : मानक विधि शब्दकोश तैयार करने, तथा राज्य के विधान निर्माण से संबंधित सांविधिक ग्रंथ का अधिनियमन करने, विधि शब्दावली तैयार करने की योजना बनाने और जिस संक्रमणकाल में सांविधिक ग्रंथ और साथ ही निर्णय-विधि अंशतः हिंदी और अंग्रेजी में होंगे, उस अवधि में प्रारंभिक कदम उठाने के बारे में आयोग ने जो सिफारिश की थी उन्हें समिति ने मान लिया है। साथ ही समिति ने यह सुझाव भी दिया है कि संविधियों के अनुवाद और विधि शब्दावली तथा कोशों से संबंधित संपूर्ण कार्यक्रम की समुचित योजना बनाने और उसे कार्यान्वित करने के लिए भारत की विभिन्न राष्ट्रभाषाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेषज्ञों का एक स्थायी आयोग या इस प्रकार कोई उच्चस्तरीय निकाय बनाया जाए।
समिति ने यह राय भी जाहिर की है कि राज्य सरकारों को परामर्श दिया जाए कि वे भी केंद्रीय सरकार से राय लेकर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करें। समिति के सुझाव को दृष्टि में रखकर विधि मंत्रालय (यथासंभव सब भारतीय
भाषाओं में प्रयोग के लिए) सर्वमान्य विधि शब्दावली की तैयारी और संविधियों के हिंदी में अनुवाद संबंधी पूरे काम के लिए समुचित योजना बनाने और पूरा करने के लिए विधि विशेषज्ञों वाले एक स्थायी आयोग (या अन्य समुचित अभिकरण) का निर्माण करे।
संसदीय राजाभाषा समिति के सद्स्य
श्री गोविंदवल्लभ पंत
श्री पुरुषोत्तमदास टंडन
श्री के.पी. माधवन नायर
श्री अल्लूरी सत्यनारायण राजू
डा. रघुवीर
सरदार बुध सिंह
श्री भागीरथी महापात्र
डा. ए. रामस्वामी मुदलियार
डा. पेरत नारायणन नायर
श्री प्रफुल्लचंद्र भंजदेव
सेठ गोविंददास
श्री पी.टी. थानु पिल्लै
स्वामी रामानंद तीर्थ
श्री बी.एस. मूर्ति
पंडित ठाकुरदास भार्गव
श्री हिफ्जुर्रहमान
श्री बी. भगवती
श्री यू. श्रीनिवास मल्लय्या
श्री फ्रैंक एन्थनी
श्री मथुराप्रसाद मिश्र
श्री माणिक्यलाल वर्मा
श्री भक्त दर्शन
श्रीपाद अमृत डांगे
श्री हरिश्चंद्र शर्मा
कुमारी मणिबेन वल्लभभाई पटेल
ज्ञानी गुरुमुखसिंह मुसाफिर
श्री अतुल्य घोष
श्री देवराव यशवंतराव गोहोकर
श्री हीरेन्द्रनाथ मुखर्जी
श्री प्रमथनाथ बनर्जी
इस आदेश के अनुपालन में 1961 में राजभाषा (विधायी) आयोग की स्थापना की गई। इस आयोग को निम्नलिखित कार्य सौंपे गए :
(1) यथासंभव सभी राजभाषाओं में प्रयोग के लिए प्रामाणिक विधि शब्दावली तैयार करना और उसे प्रकाशित करना,
(2) सभी केंद्रीय अधिनियमों और राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेशों और विनियमों के हिंदी में प्राधिकृत पाठ तैयार करना,
(3) किसी केंद्रीय अधिनियम या राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किसी अध्यादेश या विनियम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों, विनियमों और आदेशों के प्राधिकृत हिंदी पाठ तैयार करना,
(4) केंद्रीय अधिनियमों और राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेशों और विनियमों का राज्यों की. अपनी-अपनी राजभाषाओं में अनुवाद और किसी भी राज्य में पारित अधिनियमों और प्रख्यापित अध्यादेशों के उस सूरत में जिसमें कि ऐसे अधिनियमों या अध्यादेशों के पाठ हिन्दी से भिन्न भाषा में है, हिंदी में अनुवाद कराने का प्रबंध करना, और
(5) अन्य ऐसे कर्तव्यों का पालन करना जो समय-समय पर भारत सरकार द्वारा सौंपे जाएं।
इन्हें भी देखें
लोक लेखा समिति (भारत)
बाहरी कड़ियाँ
संसदीय समितियाँ
संसदीय समितियों के कार्य में प्रयुक्त सामान्य शब्दावली
संसदीय समितियाँ (भारत को जानें)
श्रेणी:संसद