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वैष्णवदास रसजानि
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वैष्णवदास रसजानि नाभा जी कृत भक्तमाल की टीका 'भक्तिरसबोधिनी' के कर्ता प्रियादास जी के पौत्र थे, जिन्होंने इन्हें 'रसजानि' की उपाधि दी। इनके गुरु श्रीहरिजीवन जी थे। इन्होंने श्रीमद्भागवत के बारहों स्कंधों का पद्यानुवाद किया है। भागवतमाहात्म्य के अनुवाद में रचनाकाल सं. १८०२ दिया है। जयदेव के गीतगोविंद का पद्यानुवाद सं. १८१४ में पूर्ण हुआ। इनका समय संवत् १७७० से सं. १८३० के लगभग है।