411 REFERENCE · Wikipedia
शम्भू सिंह
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
महाराणा शंभू सिंहजी HH महाराणा सर श्री शंभू सिंहजी Maharana Shambhu Singh throwing a javelin, By Tara, Mewar 1866.jpg HH महाराणा सर श्री शंभू सिंहजी महाराणा का चित्र भाला फेंकते हुए, 1866 उदयपुर के महाराणा 1866–74 HH महाराणा सर श्री स्वरूप सिंहजी महाराणा सर श्री सज्जन सिंहजी 1847 12 22 y 1874 10 7 1847 12 22 yes बागोर के महाराज शार्दुल सिंहजी रानी राठौड़जी (बिकावतजी) नंद कँवरजी
बीकानेर के महाराजा डूंगर सिंहजी की बुआ रानी चौहानजी इँद्र कँवरजी
गढ़ी-बांसवाड़ा के राव रतन सिंहजी की पुत्री
रानी झालीजी दौलत कँवरजी बड़ी सादड़ी-मेवाड़ के राज राणा कीर्ति सिंहजी द्वितीय की पुत्री HH महारानीजी सा चौहानजी इंद्र कंवरजी पुत्री राव रतन सिंहजी चौहान गढ़ी-बांसवाड़ा
HH महारानीजी सा झालीजी दौलत कंवरजी पुत्री राज राणा कीर्ति सिंहजी द्वितीय बड़ी सादड़ी-मेवाड़
HH महाराजधिराज महाराणा सर श्री शंभु सिंहजी''' ( 1847 - 1874 ई . ) मेवाड, राजस्थान के सूर्यवंशी के शासक थे। महाराणा स्वरूप सिंहजी के कोई पुत्र नहीं होने के कारण उन्होंने अपने भाई के पौत्र शंभु सिंहजी को दत्तक पुत्र के रूप में गोद लिया जो 17 नवम्बर , 1861 को मेवाड़ के राजसिंहासन पर बैठे ।
महाराणा की अवयस्कता के कारण पॉलिटिकल एजेंट मेजर टेलर की अध्यक्षता में रीजेंसी कौंसिल ( पंचसरदारी ) का गठन कर शासन प्रबंध किया जाने लगा । इनके काल में सती प्रथा व दास प्रथा , बच्चों के क्रय - विक्रय आदि कुप्रथाओं पर कठोर प्रतिबंध लगाये गये एवं ' शंभु पलटन ' नाम से नई सेना का गठन किया गया । इनके काल में पॉलिटिकल एजेंट के एक आदेश से शहर की महाजन जनता भड़क गई और 1 जनवरी , 1864 को चंपालाल की अध्यक्षता में महाजन लोगों ने शहर में हड़ताल कर हजारों लोग पॉलिटिकल एजेंट की कोठी पर इकट्ठे हो गये । यह हड़ताल कई दिन रही । इनके शासन काल में एक ओर तो भयंकर अकाल पड़ा तथा दूसरी ओर हैजा महामारी फैल गई । हजारों लोग मारे गये । इन्होंने अकाल पीड़ितों की बहुत सहायता की व खैरातखाना खोल दिया । अंग्रेजी सरकार ने इन्हें GCSI ( Grand Commandor of The Star of India ) का खिताब देने की सूचना दी तो इन्होंने कहा कि उदयपुर के महाराजा तो प्राचीन समय से ही ' हिन्दुआ सूरज ' कहलाते हैं , अतः उन्हें स्टार की जरूरत नहीं है । परन्तु बाद में पॉलिटिकल एजंट के समझाने पर ये राजी हो गये । 16 जुलाई , 1874 को महाराणा का निधन हो गया । इनके साथ किसी भी रानी को सती नहीं होने दिया गया । मेवाड़ में यह पहले शासक थे जिनके साथ कोई सती नहीं हुई ।
श्रेणी:मेवाड़ के शासक