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जोहान्स जेन्सेन
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योहानस विलहेल्म येनसन Johannes Vilhelm Jensen 1944.jpg 20 जनवरी, 1873 फ़ार्सो, जटलैंड, डेनमार्क 1950 11 25 1873 1 20 y ओस्टरब्रो, कोपनहेगन, डेनमार्क लेखक डेनिश डेनिश आधुनिक उपन्यास, कविता, निबन्ध लेखन Johannes Vilhelm Jensen da साहित्य में नोबेल पुरस्कार 1944
योहानस विलहेल्म येनसन (da Johannes Vilhelm Jensen no; 20 जनवरी 1873 – 25 नवंबर 1950) डेनमार्क के उपन्यासकार, कवि, निबंधकार एवं पत्रकार थे। 1944 ई० में साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता।
जीवन-परिचय
येनसन का जन्म उत्तरी जटलैंड के हिम्मरफैंड शहर में हुआ था। इनके पिता पशु-चिकित्सक थे। इन्होंने वहाँ के कैथेड्रल स्कूल से मैट्रिक पास किया और फिर डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए कोपेनहेगन गये। परिवार बड़ा होने के कारण इन्हें अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाना पड़ता था। 1893 में इन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई शुरू की और 1895 से ही कहानियाँ भी लिखने लगे थे। 1897 में इन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़ कर अपने-आपको पत्रकारिता और साहित्य-सेवा में लगा दिया।नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार, राजबहादुर सिंह, राजपाल एंड सन्ज़, नयी दिल्ली, संस्करण-2007, पृ०-150. 1898 में स्पेन-अमेरिका युद्ध में इन्हें युद्ध-संवाददाता के रूप में पेरिस की विश्व प्रदर्शनी में भेजा गया, जहाँ के नये वातावरण ने इन पर बड़ा प्रभाव डाला था।
रचनात्मक परिचय
येनसन की औपन्यासिक कृतियों में सबसे पहले कोंगैन्स फाल्ड का प्रकाशन हुआ था, जिसका अंग्रेजी अनुवाद 1933 ई० में प्रकाशित हुआ। यह डेनिश भाषा का प्रथम प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास के रूप में जाना गया। इसमें पुराना कृषक-जीवन और उसके विरोधी दृष्टिकोण का सुंदर चित्रण हुआ है। उन्होंने डेनमार्क के ग्रामीण जीवन पर बहुत अच्छा लिखा, नये मुहावरों का प्रयोग किया और यात्रा वर्णन भी लिखे।नोबेल पुरस्कार कोश, सं०-विश्वमित्र शर्मा, राजपाल एंड सन्ज़, नयी दिल्ली, संस्करण-2002, पृ०-238. उनकी रचनाओं के बारे में दि अमेरिकन स्कैंडिनेवियन रिव्यू में कहा गया था: इनके उपन्यास पुराने युग के हैं, पर वे अपने युग के समाज के दर्पण-से हैं। इसमें कथानक की ओर उतना ध्यान देने की आवश्यकता नहीं पड़ती जितना सामयिक चित्रण की ओर।नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार, पूर्ववत्, पृ०-151 पर उद्धृत।
येनसन ने अपनी आत्मकथा के रूप में अपनी अमेरिका यात्रा की कहानी भी लिखी। 76 वर्ष की उम्र में प्रकाशित पुस्तक अफ्रीका में यात्रा-वर्णन के साथ-साथ उनके पत्रकारिता और सांस्कृतिक ज्ञान का भी प्रभूत परिचय उपस्थापित हुआ है। येनसन का प्रभाव डेनिश भाषा पर विशेष रूप से पड़ा क्योंकि उन्होंने कुल मिलाकर 70 पुस्तकें लिखी और अगणित लेख लिखे। उनके अनेक विचार ऐसे हैं जिनके बारे में मतभेद की गुंजाइश है, परंतु उनकी अभिव्यक्ति की उच्च शक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार, पूर्ववत्, पृ०-151.
प्रकाशित पुस्तकें
डैन्स केयर
कोंगैन्स फाल्ड
गाथिक पुनर्जन्म
डेम वर्डेज
जुलेट
मैडम डिओरा
अफ्रीका ( सांस्कृतिक यात्रा-वर्णन)
लम्बी यात्रा
मिथ
सन्दर्भ
श्रेणी:नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार
श्रेणी:1873 में जन्मे लोग
श्रेणी:१९५० में निधन