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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पूर्ण चंद्र

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thumb|14 नवंबर 2016 का महाचंद्र धरती के केंद्र से 356511 km mi दूर था।http://sivertimes.com/super-moon-exceptional-brightest-moon-in-the-sky-of-normandy-monday-november-14/1872 'सूपर मून' नॉरमंडी के आकाश का अद्वितीय चमकीला चंद्र, सोमवार, नवंबर 14 12 नवंबर 2016 silvertimes.com 8 फरवरी 2017 27 April 2020 https://web.archive.org/web/20200427204920/http://sivertimes.com/super-moon-exceptional-brightest-moon-in-the-sky-of-normandy-monday-november-14/1872 live यह हर साल होता है।.http://astrobob.areavoices.com/2016/11/10/moongazers-delight-biggest-supermoon-in-decades-looms-large-Sunday-night/ चंद्र दर्शक को प्रसन्नता— दशक का सबसे बड़ा महाचंद्र रविवार की रात को चमका 10 नवंबर 2016 27 फरवरी 2017 27 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20200427204924/http://astrobob.areavoices.com/2016/11/10/moongazers-delight-biggest-supermoon-in-decades-looms-large-Sunday-night/ live पूर्ण चंद्र या पूर्णिमा (Full moon), चंद्रमा की वह स्थिति है जब चाँद पृथ्वी से पूर्ण रूप से प्रकाशित दिखाई पड़ता है। ऐसा तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। दूसरे शब्दों में, जब सूर्य और चंद्रमा के मध्य 180° का कोण बनता है।[3] इसका अर्थ यह है कि पृथ्वी के सम्मुख वाला चंद्रमा का गोलार्द्ध पूरी तरह से सूर्य के प्रकाश में होता है और वह एक गोलाकार तश्तरी के रूप में दिखाई देता है। पूर्ण चंद्र की घटना महीने में लगभग एक बार होती है। एक पूर्ण चंद्र और अगले पूर्ण चंद्र के बीच का समय अंतराल (पुनरावृत्ति) औसतन लगभग 29.53 दिन होता है। इसे एक 'चंद्र माह' माना जाता है। इसलिए, उन चंद्र कैलेंडरों में जिनमें प्रत्येक माह नए चाँद (अमावस्या) के दिन शुरू होता है, पूर्ण चंद्र (पूर्णिमा) माह के 14वें या 15वें दिन पड़ती है। चूंकि एक माह में केवल पूर्ण दिन होते हैं (कोई आधा दिन नहीं हो सकता), इसलिए चंद्र कैलेंडर में एक महीना 29 या 30 दिन लंबा होता है। विशेषताएँ पूर्ण चंद्र की घटना को अक्सर पूरी रात की घटना माना जाता है, हालाँकि पृथ्वी से देखा जाने वाला चाँद का आकार लगातार बढ़ता या घटता रहता है। ऐसे में, तकनीकी रूप से पूर्ण चंद्र उसी क्षण होता है जब चाँद का बढ़ना (Waxing) समाप्त होता है और घटना (Waning) शुरू होता है। धरती के किसी स्थान से पूर्ण चंद्रमा का आंशिक या आधा भाग ही दिखाई दे सकता है। कई स्थानों से तो पूर्ण चंद्र की ठीक उसी घटना का दिखाई देना संभव ही नहीं होता, क्योंकि उस विशेष समय पर वह स्थान धरती के दूसरी तरफ के गोलार्द्ध में होता है और वहाँ दिन होता है। चंद्रमा की कक्षा, पृथ्वी के कक्षीय तल से लगभग 5.145° झुकी हुई है। इसलिए चाँद आम तौर पर पूर्ण चंद्र की स्थिति में सूर्य से बिल्कुल ठीक विपरीत नहीं होता है। यही कारण है कि चंद्र ग्रहण वाली रातों को छोड़कर, पूर्ण चंद्र आमतौर पर "पूरी तरह से पूर्ण" (यानी पूर्णतया सिज़िगी अवस्था में) नहीं होता है। सन्दर्भ श्रेणी:चंद्रमा श्रेणी:भौतिकी श्रेणी:चंद्रविज्ञान