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दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, २०१६

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अप्रैल 2026 दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, २०१६ ( Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) सन २०१६ में अधिनियमित किया गया था और 19 अप्रैल, 2017 को दिव्यांगजन अधिनियम, 1995 की जगह लागू हुआ। यह अधिनियम दिव्यांगता की 21 श्रेणियों को मान्यता देता है, शिक्षा और रोजगार में आरक्षण को अनिवार्य करता है और दिव्यांगजनों के लिए पहुंच, गैर-भेदभाव और पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकारों को कानूनी उत्तरदायित्व देता है। यह एक केंद्रीकृत प्रमाणन व्यवस्था भी पेश करता है और समावेशी शिक्षा, रोजगार और सामुदायिक जीवन के अधिकारों को मजबूत करता है।दिव्यांग अधिकारों के लिए भारत की प्रतिबद्धतायह विकलांग व्यक्ति को दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या संवेदी हानि वाले व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है। वह व्यक्ति समाज में पूर्ण एवं प्रभावी भागीदारी को सीमित कर देता है। विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 को विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के अनुपालन के लिए पेश किया गया था। भारत ने 2007 में इस पर हस्ताक्षर किए और इसकी पुष्टि की। यह अधिनियम शारीरिक, बौद्धिक, मानसिक एवं संवेदी-हानि सहित २१ स्थितियों को शामिल करने के लिये दिव्यांगता के दायरे को विस्तृत करता है। केंद्र सरकार सूची में और भी प्रकार की विकलांगताएं जोड़ सकती है। इस अधिनियम में विकलांग व्यक्तियों के लिए एक राष्ट्रीय आयोग की स्थापना का भी प्रावधान है। अधिनियम विकलांग व्यक्तियों के लिए राज्य आयोगों की स्थापना का भी प्रावधान करता है। यह अनिवार्य करता है कि शैक्षणिक संस्थान एवं सरकारी संगठन दिव्यांग व्यक्तियों के लिये सीटें तथा पद आरक्षित करें, जिससे उनकी शिक्षा और रोज़गार के अवसरों तक पहुँच सुनिश्चित हो सके। अधिनियम सार्वजनिक स्थानों, परिवहन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों में बाधा मुक्त वातावरण के निर्माण पर बल देता है, जिससे दिव्यांग व्यक्तियों की अधिक भागीदारी संभव हो सके। यह सरकार को दिव्यांग व्यक्तियों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल एवं पुनर्वास के लिये योजनाएँ और कार्यक्रम तैयार करने का आदेश देता है। अधिनियम सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के लिये सार्वजनिक भवनों के लिये दिशा-निर्देश एवं मानक तैयार करने का आदेश देता है। इस अधिनियम के प्रमुख खंड ये हैं- समानता और गैर-भेदभाव का अधिकार . सार्वजनिक भवनों, परिवहन और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तक पहुंच का अधिकार शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार न्याय और कानूनी प्रतिनिधित्व तक पहुंच के विशेषाधिकार सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में भाग लेने की क्षमता विकलांग व्यक्तियों के विरुद्ध अपराधों के लिए दंड का प्रावधान दिव्यांगजन अधिकार नियम,२०२४ दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 100 की उप-धारा (1) और (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार नियम, 2017 में संशोधन किया है। नए संशोधित नियम निम्नलिखित हैं: नए नियमों के तहत, निर्दिष्ट दिव्यांगता वाले व्यक्ति UDID ​​ ​​पोर्टल के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाण पत्र और UDID ​​ ​​कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। वे अपने जिला चिकित्सा अधिकारियों या उन चिकित्सा सुविधाओं में आवेदन जमा कर सकते हैं जहाँ वे उपचार करवा रहे हैं। रंग-कोडित UDID ​​​​कार्ड : संशोधनों में रंग-कोडित यूडीआईडी ​​कार्ड भी पेश किए गए हैं, जो दिव्यांगता के विभिन्न स्तरों को दर्शाते हैं: (क) 40% से कम दिव्यांगता के लिए सफेद (ख) 40-79% के लिए पीला (ग) 80% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले लोगों के लिए नीला इसके अतिरिक्त, नए नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि चिकित्सा अधिकारियों को निदान के तीन महीने के भीतर दिव्यांगता प्रमाण पत्र और UDID ​​कार्ड जारी करना चाहिए। यदि कोई आवेदन दो साल से अधिक समय तक अनसुलझा रहता है, तो इसे निष्क्रिय माना जाएगा और आवेदकों को फिर से आवेदन करना होगा। स्थायी प्रमाण पत्र उन लोगों के लिए जारी किए जाएंगे जिनकी विकलांगता अपरिवर्तनीय है, जबकि समय-सीमित प्रमाण पत्र उन व्यक्तियों को दिए जाएंगे जिनकी स्थिति में सुधार हो सकता है। नए नियमों पर आपत्ति विकलांग अधिकार एनजीओ 'नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर द राइट्स ऑफ द डिसेबल्ड' ने RPwD नियम संशोधन के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया क्योंकि संशोधित नियमों के तहत विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने की समय सीमा एक महीने से बढ़ाकर तीन महीने कर दी गई। इसने केवल UDID ​​​​पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य बनाने तथा आवेदन के दो वर्षों तक कोई कार्रवाई न किए जाने पर पुनः आवेदन करने के प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है। सन्दर्भ श्रेणी:भारतीय कानून