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411 समाचार
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गैर-त्रित्ववाद

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गैर-त्रित्ववाद ईसाई धर्म के अंतर्गत उन धार्मिक समूहों और विचारधाराओं को संदर्भित करता है जो पारंपरिक 'त्रित्व' के सिद्धांत को स्वीकार नहीं करते हैं। त्रित्ववाद के अनुसार ईश्वर एक ही सार में तीन सह-शाश्वत और सह-समान व्यक्तियों-पिता, पुत्र (यीशु मसीह) और पवित्र आत्मा-का अविभाज्य रूप है।Olson, Roger E.; Hall, Christopher Alan (2002). The Trinity. Wm. B. Eerdmans. ISBN 978-0-8028-4827-7. इसके विपरीत, गैर-त्रित्ववादी समूह ईश्वर के इस स्वरूप को गैर-बाइबलीय मानते हैं। इतिहास और आधिकारिक निर्णय ईसाई इतिहास में चौथी शताब्दी के दौरान हुए कलीसियाई सम्मेलनों, जैसे निकिया की प्रथम परिषद (325 ईस्वी) और कॉन्सटेंटिनोपल की प्रथम परिषद (381 ईस्वी) में त्रित्ववाद को आधिकारिक ईसाई मत घोषित कर दिया गया था।Lohse, Bernhard (1966). A Short History of Christian Doctrine. Fortress Press. ISBN 978-1-4514-0423-4.Geanakoplos, Deno John (1989). Constantinople and the West. Univ of Wisconsin Press. ISBN 978-0-299-11884-6. इसके बाद शुरुआती गैर-त्रित्ववादी विचारों (जैसे एरियनवाद) को दबा दिया गया और उनके ग्रंथों को नष्ट कर दिया गया। प्रमुख वैचारिक वर्गीकरण गैर-त्रित्ववादी दर्शन में ईश्वर और यीशु मसीह के संबंध को लेकर मुख्य रूप से तीन दृष्टिकोण पाए जाते हैं: एकेश्वरवाद / अधीनतावाद: इस मत के अनुसार केवल 'पिता' ही एकमात्र सर्वोच्च और सर्वशक्तिमान ईश्वर हैं। यीशु मसीह उनके आज्ञाकारी पुत्र, संदेशवाहक या उनकी सर्वोच्च रचना हैं, लेकिन वे पिता के समान अनादि या सर्वशक्तिमान नहीं हैं।von Harnack, Adolf (1894). History of Dogma. Christian Classics Ethereal Library. मोडालिज़्म: इस विचारधारा के अनुसार ईश्वर तीन अलग-अलग व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक ही परमात्मा ने इतिहास के विभिन्न कालखंडों और मानव उद्धार के लिए स्वयं को तीन अलग-अलग रूपों या 'मोड्स' (सृष्टि में पिता, क्रूस पर पुत्र और कलीसिया में पवित्र आत्मा) में प्रकट किया है।Bernard, David K. (1991). Oneness and Trinity A.D. 100–300. Word Aflame Press. सामाजिक त्रित्ववाद / त्रेश्वरवाद: इसके अंतर्गत माना जाता है कि पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा तीन पूरी तरह से अलग और स्वतंत्र दिव्य अस्तित्व हैं, जो भौतिक सार में एक नहीं हैं, बल्कि केवल अपने उद्देश्य, इच्छा और योजना में पूरी तरह एक हैं।Holland, Jeffrey R. (2007). "The Only True God and Jesus Christ Whom He Hath Sent". The Church of Jesus Christ of Latter-day Saints. विरोध के मुख्य बिंदु गैर-त्रित्ववादी विद्वानों का मुख्य तर्क यह है कि संपूर्ण बाइबल में 'त्रित्व' शब्द का प्रत्यक्ष उल्लेख कहीं नहीं मिलता।Davis, Stephen T. (2002). The Trinity: An Interdisciplinary Symposium. Oxford University Press. ISBN 978-0-19-924612-0. वे दावा करते हैं कि यह अवधारणा मूल ईसाई शिक्षाओं का हिस्सा नहीं थी, बल्कि चौथी शताब्दी में ग्रीक दार्शनिक सिद्धांतों (विशेष रूप से प्लेटोवाद और अरस्तू के दर्शन) के प्रभाव और राजनीतिक दबाव के कारण कलीसिया पर थोपी गई थी।Beatrice, P.F. (2002). "The Word 'Homoousios' from Hellenism to Christianity". Church History, Cambridge University Press.Barclay, William (1998). The Apostles' Creed. Westminster John Knox Press. ISBN 978-0-664-25826-9. सन्दर्भ