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मिल एमआई-24
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मिल एमआई-24 (Mil Mi-24) हमलावर हेलीकॉप्टर / गनशिप Mil_Mi-24_Hind.jpg मिल मॉस्को हेलीकॉप्टर प्लांट मिखाइल मिल 19 सितंबर 1969 1972 सक्रिय रूसी एयरोस्पेस बल भारतीय वायु सेना, यूक्रेनी वायु सेना, सीरिया 1969–वर्तमान 2,648+ एमआई-25 (Mi-25), एमआई-35 (Mi-35)
मिल एमआई-24 (Миль Ми-24; पूर्व सोवियत संघ द्वारा विकसित एक विशाल और भारी 'हमलावर हेलीकॉप्टर' है। यह मुख्य रूप से एक 'गनशिप' है, लेकिन इसकी सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यह 8 पूरी तरह से सुसज्जित सैनिकों को ले जाने की क्षमता भी रखता है, जो इसे पश्चिमी देशों के शुद्ध हमलावर हेलीकॉप्टरों से बिल्कुल अलग बनाता है। सोवियत पायलटों के बीच यह अपने भारी कवच के कारण "उड़ता हुआ टैंक" और अपनी छलावरण पेंटिंग के कारण "मगरमच्छ" के नाम से प्रसिद्ध था।Gordon Yefim Dexter Dmitriy Mil Mi-24 Hind Attack Helicopter https://archive.org/details/isbn_9781840372380 Airlife Publishing 2001 978-1840372380 15-20"Mi-24 Hind Krokodil"अगस्त 2026 InternetArchiveBot
विकास और 'टैंडेम कॉकपिट' डिज़ाइन
एमआई-24 का डिज़ाइन 1960 के दशक के मध्य में मिखाइल मिल के नेतृत्व में शुरू हुआ था। इसका मूल विचार एक ऐसे हवाई वाहन का निर्माण करना था जो युद्ध के मैदान में सैनिकों को तेज़ी से उतार सके और साथ ही उन्हें भारी 'क्लोज़ एयर सपोर्ट' भी प्रदान कर सके। यह एमआई-8 (Mi-8) परिवहन हेलीकॉप्टर की तकनीक पर आधारित था।"Student research report: The Soviet attack helicopter"
प्रारंभिक संस्करणों (Mi-24A) में एक चौड़ा 'ग्रीनहाउस' कॉकपिट था, लेकिन बाद के सबसे प्रसिद्ध संस्करण (Mi-24D) में इसे बदलकर एक टैंडेम कॉकपिट कर दिया गया। इसमें हथियार ऑपरेटर (गनर) आगे और थोड़ा नीचे बैठता है, जबकि पायलट उसके पीछे और थोड़ा ऊपर बैठता है। इसके धड़ के दोनों ओर छोटे पंख लगे होते हैं, जो तेज़ गति में उड़ान के दौरान लिफ्ट प्रदान करते हैं और जिन पर रॉकेट पॉड्स, बम और 'एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें' लगाई जाती हैं।"Mi-28 Replacing Mi-24"
कवच और 'उड़ता हुआ टैंक'
एमआई-24 को युद्ध के मैदान में भारी गोलीबारी का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। इसका पूरा कॉकपिट और रोटर ब्लेड्स भारी टाइटेनियम कवच से ढके हुए हैं, जो .50 कैलिबर (12.7 मिमी) की मशीनगन की गोलियों को आसानी से रोक सकते हैं। कॉकपिट के शीशे बुलेटप्रूफ होते हैं। इसी अभेद्य कवच के कारण इसे 'फ्लाइंग टैंक' कहा जाता था। हालांकि, इस भारी कवच ने इसे वज़न में काफी भारी और पैंतरेबाज़ी में थोड़ा धीमा बना दिया।Stapfer Hans-Heiri Mi-24 Hind in Action Squadron/Signal Publications 1 1988 25-30
सोवियत-अफगान युद्ध (1979–1989)
एमआई-24 ने अपनी सबसे खौफनाक और निर्णायक भूमिका 1980 के दशक के 'सोवियत-अफगान युद्ध' में निभाई। अफगान मुजाहिदीन इसके हमलों से इतने डरे हुए थे कि उन्होंने इसे "शैतान की गाड़ी" नाम दिया था। यह पहाड़ों में छिपे विद्रोहियों पर रॉकेट और भारी मशीनगन से कहर बरपाता था।
हालांकि, 1986 में जब अमेरिका ने मुजाहिदीन को 'स्टिंगर मिसाइलें' (FIM-92 Stinger - कंधे से दागी जाने वाली हीट-सीकिंग मिसाइल) प्रदान कीं, तो एमआई-24 के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो गया। गर्मी को ट्रैक करने वाली इन मिसाइलों से बचने के लिए, सोवियत संघ को बाद में अपने हेलीकॉप्टरों में इन्फ्रारेड जैमर और फ्लेयर डिस्पेंसर लगाने पड़े।
भारतीय वायु सेना और निर्यात
सोवियत संघ ने इस हेलीकॉप्टर के निर्यात संस्करण भी बनाए, जिन्हें मुख्य रूप से एमआई-25 और अपग्रेड किए गए एमआई-35 के नाम से जाना जाता है।
भारतीय वायु सेना एमआई-24/35 श्रृंखला की एक प्रमुख और पुरानी ऑपरेटर रही है। भारत में इसे "अकबर" नाम दिया गया था। भारतीय एमआई-25 गनशिप्स ने 1987 में श्रीलंका में 'भारतीय शांति रक्षा सेना' के अभियानों और बाद में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाल के वर्षों में भारत ने अमेरिका से अपाचे (AH-64E) हेलीकॉप्टर खरीदे हैं, जो धीरे-धीरे पुराने हो रहे एमआई-35 बेड़े की जगह ले रहे हैं।https://indianairforce.nic.in/ Helicopters of the IAF: Mi-35 Indian Air Force (Official Website) 24 जून 2026
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
एयरफोर्स टेक्नोलॉजी - एमआई-24 'हिन्द' का विवरण
श्रेणी:सोवियत संघ के विमान