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गज़वा ए तायफ़
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ग़ज़वा ए तायफ़ December 630 (10 AH) ताइफ़, Mecca, Arabia *Inconclusive Muslims of Medina Citizens of Ta'if मुहम्मदAbu SufyanAliSeptember 2022Tufayl ibn Amr Unknown 12,000 10,000 12 Unknown Muhammad's campaigns
अंगूठाकार|मुहम्मद अरबी भाषा सुलेख
ग़ज़वा ए तायफ़ या ताइफ़ की घेराबंदी (अंग्रेज़ी:Siege of Ta'if) 630 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद के नेतृत्व में ताइफ़ शहर की घेराबंदी की गई, जिसे हवाज़िन और बनू सक़ीफ़ जनजातियों द्वारा नियंत्रित किया गया था, जो गज़वा ए हुनैन लड़ाई में हार गए थे यह लड़ाई उसी का भाग है।सफिउर्रहमान मुबारकपुरी पुस्तक अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी ) ग़ज़वा-ए-तायफ़ https://archive.org/details/offlinedeeniapp_20210707_1905/Ar%20Raheequl%20Makhtoom%20Seerate%20Nabi/page/853/mode/2up 13 दिसम्बर 2022 853
ताइफ़ के लोग इस घेराबंदी से बचने में कामयाब रहे, और केवल तबुक अभियान अभियान (630 ईस्वी) के बाद मुहम्मद के प्रति अपनी वफादारी की घोषणा करते हुए इस्लाम में परिवर्तित हो गए। ताइफ़ जनजाति के प्रमुखों में से एक, उरवाह बिन मसऊद इस घेराबंदी के समय नहीं था, और बाद में जिसने अपने लोगों को इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए प्रेरित किया।
ताइफ़ की घेराबंदी
इस्लामी स्रोत के अनुसार
हुनैन से भागने वाली फ़ौजें कुछ तो औतास में जा कर ठहरी थीं और कुछ ताइफ के किले में जा कर पनाह गुजीं हो गई थीं। औतास की फ़ौजें तो शिकस्त खा कर हथयार डाल देने पर मजबूर हो गई और सब गरिफ्तार हो गई। लेकिन ताइफ़ में पनाह लेने वालों से भी जंग ज़रूरी थी। इस लिये मुहम्मद ने हुनैन और औतास के अम्वाले गनीमत और कैदियों को "मकामे जिइर्राना" में जमा कर के ताइफ़ का रुख फ़रमाया।
ताइफ़ खुद एक बहुत ही महफूज़ शहर था जिस के चारों तरफ • शहर पनाह की दीवार बनी हुई थी और यहां एक बहुत ही मज़बूत किला भी था। यहां का रईसे आज़म उर्वह बिन मसऊद सकफी था अबू सुफ्यान का दामाद था। यहां सक़ीफ़ का जो खानदान आबाद था वोह इज्जत व शराफ़त में कुरैश का हम पल्ला शुमार किया जाता था। कुफ्फार की तमाम फ़ौजें साल भर का राशन ले कर ताइफ़ के कल्ए में पनाह गुज़ हो गई थीं। इस्लामी अफ़्वाज ने ताइफ़ पहुंच कर शहर का मुहासरा कर लिया मगर किले के अन्दर से कुफ्फार ने इस जोरो शोर के साथ तीरों की बारिश शुरू कर दी कि लश्करे इस्लाम इस की ताब न ला सका और मजबूरन इस को पसे पा होना पड़ा। अठ्ठारह दिनों तक शहर का मुहासरा जारी रहा मगर ताइफ़ फत्ह नहीं हो सका। मुहम्मद ने जब जंग के माहिरों से मश्वरा फ़रमाया तो हज़रते नौफ़िल बिन मुआविया ने अर्ज किया कि "या रसूलल्लाह ना जाग ज लोमड़ी अपने भट में घुस गई है। अगर कोशिश जारी रही तो पकड़ ली जाएगी लेकिन अगर छोड़ दी जाए तो भी इस से कोई अन्देशा नहीं।" येह सुन कर मुहम्मद ने मुहासरा उठा लेने का हुक्म दे दिया। ताइफ़ का मुहासरा, पुस्तक 'सीरते मुस्तफा', पृष्ट 460 https://archive.org/details/Misbahi_Library_File_No__927__/page/n209/mode/2up
अबू सुफयान बिन हर्ब
सुन्नी सूत्र ताइफ की घेराबंदी के बारे में निम्नलिखित बताते हैं:
अबू सुफयान बिन हर्ब ने ताइफ की घेराबंदी में अपनी पहली आंख खो दी। उसने मुहम्मद को अल्लाह के लिए अपने नुकसान के बारे में बताया जिस पर मुहम्मद ने कहा "आप क्या पसंद करेंगे: स्वर्ग में एक आंख या क्या मैं अल्लाह से प्रार्थना करूंगा कि वह इसे वापस लाए?" इस पर अबू सुफियान ने कहा कि वह स्वर्ग में अपनी आंख रखना पसंद करेगा। यर्मोक का युद्ध में उसने अपनी दूसरी आंख खो दीSahaba.net :: Stories of the Companions – An Eye Now or an Eye in Heaven? https://web.archive.org/web/20120204104932/http://www.sahaba.net/modules.php?name=News&file=article&sid=62 2012-02-04
परिणाम
इस घेराबंदी से पहले इन्हीं से गज़वा ए हुनैन में
मुसलमान बहुत सामान पर कब्जा करने में सक्षम थे।जिसका प्रयोग उन्होंने संगठन को मजबूत करने में किया और अपने सैनिकों में बांटाडॉक्टर किशोरी प्रसाद साहु तै फ के विरूद्ध सफलता पुस्तक: इस्लाम - उद्भव और विकास' Islam - The Origin and Development(Hindi) 1979 पैग़म्बर मुहम्मद का जीवन और कार्य , अध्याय २ प्रष्ठ 56 https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.402127/page/n73/mode/2up
हालांकि यह घेराबंदी असफल रही, बाद में निरस्त्रीकरण के लिए सहमत हुए आखिरकार बनू सक़ीफ़ ने मुहम्मद के अनुरोध पर सहमति व्यक्त की, इसलिए उन्होंने फिर आत्मसमर्पण कर दिया और मुसलमानों को अपने शहर में आने दिया।
सराया और ग़ज़वात
अरबी शब्द ग़ज़वा Ghazwa https://en.wiktionary.org/wiki/ghazwa इस्लाम के पैग़ंबर के उन अभियानों को कहते हैं जिन मुहिम या लड़ाईयों में उन्होंने शरीक होकर नेतृत्व किया,इसका बहुवचन है गज़वात, जिन मुहिम में किसी सहाबा को ज़िम्मेदार बनाकर भेजा और स्वयं नेतृत्व करते रहे उन अभियानों को सरियाह(सरिय्या) या सिरया कहते हैं, इसका बहुवचन सराया है सफिउर्रहमान मुबारकपुरी अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी ) सराया और ग़ज़वात (झगडे और लड़ाईयां) https://archive.org/details/islamicproapp_20210711_0831/Ar%20Raheequl%20Makhtoom%20Seerate%20Nabi/page/397/mode/2up www.archive.org 13 दिसम्बर 2022 397 siryah https://en.wiktionary.org/wiki/siryah#English
ग़ज़वात और सराया की तफसील, पुस्तक: मर्दाने अरब, पृष्ट ६२] https://archive.org/details/mardane-arab-hindi-volume-no.-1/page/n32/mode/1up
इन्हें भी देखें
सुलह हुदैबिया
अबू सुफयान बिन हर्ब
ग़ज़वा ए सफ़वान
मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ
मुहम्मद के अभियानों की सूची
गुलामी पर इस्लाम के विचार
सन्दर्भ
श्रेणी:मुहम्मद
श्रेणी:इस्लाम का इतिहास
श्रेणी:अरब इतिहास
बाहरी कड़ियाँ
अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी ), पैगंबर की जीवनी (प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित पुस्तक), हिंदी (Pdf)
Ghazwat Un Nabi By Professor Noor Bakhsh (Urdu Pdf