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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

केंगल हनुमंतैया

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केंगल हनुमंतैया (1908 - 1980) एक दक्षिण भारतीय राजनीतिज्ञ विद्वान थे, जो मैसूर (कनार्टक) राज्य से भारत की संविधान सभा के लिए मनोनीत किए थे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने मैसूर स्टेट (कनार्टक) के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में नेतृत्व किया। प्रारंभिक जीवन हनुमंतैया का जन्म 14 फरवरी 1908 को कर्नाटक( मैसूर) राज्य के रामनगर ज़िले के पास एक छोटे से गांव लक्कप्पनहल्ली में वोक्कालिगा परिवार में हुआ था। उन्होंने 1930 में मैसूर के महाराजा कॉलेज से कला में स्नातक किया और बाद में 1932 में पूना लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की। ​​अपने कॉलेज के दिनों में, उन्हें छात्र संघ और कर्नाटक संघ के सचिव के रूप में चुना गया। स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद, वह उसी वर्ष बार काउंसिल में शामिल हो गए। राजनैतिक जीवन उस समय, स्वतंत्रता आंदोलन लगातार बढ़ रहा था और आंदोलन के केंद्र में महात्मा गांधी के नेतृत्व वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस थी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. पी. टंडन ने हनुमंतैया को बार में अपना सक्रिय अभ्यास छोड़ने और स्वतंत्रता संग्राम के लिए खुद को समर्पित करने की सलाह दी। गांधीजी की प्रेरणा और टंडन के अनुनय-विनय से हनुमंतैया स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए और तत्कालीन मैसूर कांग्रेस में सक्रिय हो गए। आंदोलन के दौरान, उन्हें 7 से अधिक बार जेल हुई।भ उन्हें सर्वसम्मति से वर्ष 1948 में मैसूर विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के विधायक दल के नेता के रूप में चुना गया था। साथ ही, वे भारत की संविधान सभा के सदस्य मनोनीत किये गए। वह भारतीय राज्यों के लिए एक आदर्श संविधान के प्रारूपण समिति का हिस्सा थे और उन्होंने संघवाद के मुद्दे पर हस्तक्षेप किया। संविधान सभा में, उन्होंने राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता के लिए तर्क दिये। 1952 में मैसूर (कनार्टक) के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत के बाद वे मैसूर राज्य के दूसरे (30 मार्च 1952 से 19 अगस्त 1956) तक मुख्यमंत्री के रूप राज्य का नेतृत्व किया। उनका मुख्यमंत्री का कार्यकाल राज्य की ग्रामीण आबादी के उत्थान और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गतिविधियों द्वारा चिह्नित किया गया था। हनुमंतैया की प्रमुख उपलब्धि उस समय भारत में सबसे बड़ा विधायिका-सह-कार्यालय भवन "विधान सौध" का निर्माण था। उनकी दूसरी प्रमुख उपलब्धि कर्नाटक का एकीकरण थी। उन्होंने एक राज्य की सीमाओं के भीतर कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को एकजुट करने में भूमिका निभाई थी। 1956 में कर्नाटक के एकीकरण से कुछ समय पहले मुख्यमंत्री के रूप में इस्तीफा देने के बाद, उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। वह 1962, 1967, 1971 के संसदीय चुनावों में बैंगलोर संसदीय सीट से लोकसभा का तीन बार प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए। तीसरी बार 1971 में संसदीय चुनाव जीतने के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार में (18 मार्च 1971 से 22 जुलाई 1972) तक रेल मंत्री के रूप कार्य किया। हालांकि, वह 1977 में जनता पार्टी की लहर में के.एस. हेगड़े से हार गए। चुनाव में हार के बाद वह सक्रिय राजनीति से दूर होने लगे, और 1 दिसंबर 1980 को उनका निधन हो गया। श्रेणी:1908 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८० में निधन श्रेणी:कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्रेणी:भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री श्रेणी:तृतीय लोकसभा का सदस्य श्रेणी:चौथी लोक सभा के सदस्य श्रेणी:५वीं लोक सभा के सदस्य श्रेणी:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ श्रेणी:कन्नड़ लोग श्रेणी:भारत के क़ानून एवं न्याय मंत्री श्रेणी:कर्नाटक के लोक सभा सदस्य श्रेणी:भारत सरकार के मंत्री श्रेणी:भारतीय संविधान सभा के सदस्य श्रेणी:भारत के रेल मंत्री