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411 समाचार
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कालमिकिया

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जून 2015 कालमिकिया गणतंत्रРеспублика КалмыкияХальмг ТаңһчRepublic of Kalmykia Kalmykia in Russia.svg एलिस्ता ७६,१०० २,८९,४८१ २०१० ३.८ रायोन १३ कालमिक, रूसी thumb|230px|राजधानी एलिस्ता में स्वर्ण मंदिर thumb|230px|कालमिकिया का नक़्शा कालमिकिया (रूसी: Республика Калмыкия, रेसपूब्लिका कालमिकिया; कालमिक: Хальмг Таңһч; अंग्रेज़ी: Republic of Kalmykia) रूस का एक संघीय खंड है जो उस देश की शासन प्रणाली में गणतंत्र का दर्जा रखता है।"Всероссийская перепись населения 2010 года. Том 1" https://web.archive.org/web/20130315114013/http://www.gks.ru/free_doc/new_site/perepis2010/croc/perepis_itogi1612.htm 15 मार्च 2013 (2010 All-Russian Population Census, vol. 1). Всероссийская перепись населения 2010 года (2010 All-Russia Population Census) (in Russian). Federal State Statistics Service. 2011. Retrieved June 29, 2012. यह रूस के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है और यूरोप का इकलौता बौद्ध धर्म प्रधान इलाक़ा है।Tom Parfitt (September 21, 2006). "King of Kalmykia" https://web.archive.org/web/20121124114545/http://www.guardian.co.uk/world/2006/sep/21/russia.chess 24 नवंबर 2012 . The Guardian. Retrieved 2001-03-28. "Kalmykia is the only Buddhist region in Europe..." इतिहास कालमिक लोग मध्यकाल में इरतिश नदी के क्षेत्र से आये ओइरत लोगों के वंशज हैं जो मंगोल लोगों की सबसे पश्चिमी शाखा है। वे इरितिश क्षेत्र से आकर वोलगा नदी के निचले इलाक़े में क्यों बसे इसपर विद्वानों में मतभेद है। कुछ के अनुसार वे अपने मवेशियों के लिये चरने के मैदान ढूंढते हुए यहाँ आ गए और अन्यों के अनुसार वे ज़ुन्गार मंगोल क़बीलों के बढ़ते प्रभुत्व से बचने के लिये यहाँ आ बसे।"Caught Between the Russians and the Manchus" https://web.archive.org/web/20101214030029/http://countrystudies.us/mongolia/24.htm 14 दिसंबर 2010 . Mongolia a Country Study. GPO for the Library of Congress. Retrieved 13 फ़रवरी 2011. यहाँ आने के २५ वर्षों के अन्दर ही उन्होने रूस के त्सार (सम्राट) की अधीनता स्वीकार ली। उन्हें एक स्वशासित प्रदेश रहने दिया गया और उसके बदले वे रूस की दक्षिणी सरहद के रखवाले बन गये। साथ ही साथ उन्होने तिब्बत में दलाई लामा से और ज़ुन्गारिया में अपने मंगोल ओइरत बन्धुओं से सम्बन्ध बनाए रखे। कालमिकों की अपनी ख़ानत बनी और अयूका ख़ान (१६६९-१७२४) के शासनकाल में उनकी शक्ति चरम पर थी। अयूका ख़ान की मृत्यु के बाद रूसी साम्राज्य ने कालमिकियों पर दबाव डालना शुरु किया। उनके क्षेत्रों में रूसी लोग बसने लगे और उनपर बौद्ध धर्म छोड़कर रूसी पारम्परिक ईसाई बनने का ज़ोर डाला गया। अयूका ख़ान का पड़-पोता उबाशी ख़ान कालमिकों का अन्तिम ख़ान बना। उसके नेतृत्व में दो लाख कालमिक अपनी पूर्वजों की मातृभूमि ज़ुन्गारिया के लिये कूच कर गये, हालांकि बहुत से कालमिक उनके साथ नहीं गये। रास्ते में काज़ाख़ और किरगिज़ क़बीलों ने लौटते हुए कालमिकों पर कई हमले करके बहुतों को मार डाला या गुलाम बना लिया। कई महीनों के कठिन सफ़र के बाद केवल ९६,००० कालमिक ही मान्छु साम्राज्य की पश्चिमी सीमा पर बलख़श झील के किनारे पहुँच पाए। कालमिकिया में इसके बाद रूस की सम्राज्ञी कैथरिन ने कालमिकी ख़ानत का अन्त कर दिया। बहुत से स्थानीय कालमिक लोग अब सीधा रूसी साम्राज्य के नागरिक बन गए और उसके लिये काम करने लगे। पारम्परिक रूप से ख़ानाबदोश इस समुदाय ने पक्के घर, मंदिर और बस्तियाँ भी बनानी शुरु कर दी। १८६५ में एलिस्ता की नीव रखी गई जो आधुनिक युग में कालमिकिया की राजधानी है। सोवियत काल जब १९१७ में अक्टूबर समाजवादी क्रांति तो दोन नदी के किनारे बसने वाले कालमिकियों ने समाजवाद की विरोधी श्वेत रूसी सेना का साथ दिया। इसकी हार हुए और बहुत से दोन कालमिकियों को तुर्की भागना पड़ा। बहुत से अन्यों को मार डाला गया। दोन कालमिकियों को छोड़कर अन्य कालमिकियों को क्रांतिकारी नेता व्लादिमीर लेनिन ने अपील करी की अगर वे समाजवाद का साथ दें तो सोवियत सरकार उन्हें अपनी भूमि देगी। Isvestia, Moscow, July 24, 1919 ४ नवम्बर १९२० को उन्होने अपना वायदा पूरा किया और कालमिक स्वशासित ओब्लास्त का उदघाटन हुआ। १५ साल बाद २२ अक्टूबर १९३५ को इसका दर्जा बढ़ाकर इसे गणतंत्र बना दिया गया और इसका नाम 'कालमिक स्वशासित सोवियत समाजवादी गणतंत्र' हो गया। १९३१ में सोवियत तानाशाह जोसेफ़ स्टालिन के अपनी समूहीकरण (कलेक्टिवाइज़ेशन) की नीति के तहत बहुत से बौद्ध मठ तोड़े, धार्मिक ग्रंथ जलाए और ५०० से अधिक भेड़ो के मालिक सभी कालमिकियों को साइबेरिया भेज दिया। इस से कृषि ठप्प हुई और भुखमरी में १९३२-३३ काल में ६०,००० कालमिक मर गये। द्वितीय विश्वयुद्ध २२ जून १९४४ को जर्मन सेना ने सोवियत संघ पर आक्रमण किया और १२ अगस्त १९४२ को कालमिकिया की राजधानी, एलिस्ता, पर उनका क़ब्ज़ा हो गया। उन्होने प्रचार और ज़बरदस्ती करके बहुत से कालमिक युवकों को सोवियत-विरोधी सैनिक दस्तों में संगठित किया। इन दस्तों ने कई सोवियत सैनिकों को मारा। दिसम्बर १९४२ में पासा पलट गया और सोवियत लाल सेना का कालमिकिया पर फिर से क़ब्ज़ा हो गया। हालांकि बहुत से कालमिक सोवियत संघ के ख़िलाफ़ लड़े थे, उनकी बहुसंख्या फिर भी सोवियत संघ से वफ़ादार रही और लाल सेना में सैनिक रहे। दिसम्बर १९४३ तक ८,००० कालमिकों को सोवियत सेना में बहादुरी के तमग़े मिल चुके थे और २१ को 'सोवियत संघ का नायक' नामक सर्वोच्च पदक भी मिला था। स्टालिन सोवियत-विरोधी कालमिक दस्तों से क्रोधित हो गया और २७ दिसम्बर १९४३ में सोवियत सरकार ने कालमिक समुदाय को जर्मन सेना का पिठ्ठू होने का आपराधी घोषित कर दिया। पूरे कालमिक समुदाय को देशनिकाले का आदेश दिया गया और उन्हें ज़बरदस्ती अपने घरों से निकालकर भीषण सर्दी के मौसम में ठंडी रेल मालगाड़ियों में लादकर मध्य एशिया और साइबेरिया भेज दिया गया। बहुत से बच्चों और बुज़ुर्गों की मृत्यु हो गई। कालमिकी समाज और संस्कृति को जो हानि पहुँची वह आज तक न भर पाई है। कालमिकिया के शहरों-बस्तियों के नाम तक बदलकर रूसी कर दिये गये। १९५७ में उस समय के सोवियत नेता निकिता ख़्रुश्चेव ने उन्हें घर वापस आने की अनुमति दे दी। लेकिन जब वे वापस पहुँचे तो वहाँ रूसी लोग बसे हुए थे। १९२६ की जनगणना में कालमिक लोग इस गणतंत्र की ७५% आबादी थे जो कि १९५९ तक घटकर केवल ३५% रह गई। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ी और २०१० तक ५७% हो चुकी थी। इन्हें भी देखें रूस के गणतंत्र सन्दर्भ 2 श्रेणी:कालमिकिया श्रेणी:रूस के गणतंत्र श्रेणी:रूस के प्रशासनिक विभाग