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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ज़ुहैर बिन अबी सुल्मा

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ज़ुहैर बिन अबी सुल्मा زهير بن أبي سلمى Zuhayr bin Abi Sulma, sketch, 1967.jpg 1967 में बनाया गया ज़ुहैर बिन अबी सुल्मा का एक काल्पनिक रेखाचित्र लगभग 520 ईसवी नज्द, अरबी प्रायद्वीप लगभग 609 ईसवी अरबी प्रायद्वीप कवि शास्त्रीय अरबी अरब मुअल्लक़ात, क़सीदा (प्रशंसा काव्य), हिकमत (दर्शन) ज़ुहैर की मुअल्लक़ा जाहिलिया (इस्लाम-पूर्व) काव्य परंपरा Q228566 ज़ुहैर बिन अबी सुल्मा रबीआ अल-मुज़ानी (अरबी: زهير بن أبي سلمى; जन्म लगभग 520 ईसवी – निधन 609 ईसवी) इस्लाम-पूर्व (जाहिलिया) काल के सबसे महान और प्रसिद्ध अरबी कवियों में से एक थे। वे अरबी साहित्य की सर्वोत्कृष्ट काव्य कृति 'मुअल्लक़ात' (अल-मुअल्लकात—काबा की दीवारों पर लटकाई गई सात सर्वश्रेष्ठ कविताएँ) के लेखकों में से एक हैं। ज़ुहैर की कविताएँ मुख्य रूप से अपने गहरे दर्शन (हिकमत), शांति की वकालत और नैतिक मूल्यों के लिए जानी जाती हैं। तत्कालीन अरब समाज में जहाँ कई कवि युद्ध, हिंसा और कबीलाई घमंड का महिमामंडन करते थे, ज़ुहैर ने अपने साहित्य के माध्यम से शांति और सुलह का संदेश दिया।Zuhayr https://www.infoplease.com/encyclopedia/arts/world-lit/mideast/zuhayr Infoplease 16 January 2008 जून 2026 InternetArchiveBot प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि ज़ुहैर का जन्म 'बनू मुज़ैना' कबीले में हुआ था, लेकिन उनके पिता के अपनी पत्नी के कबीले 'बनू ग़तफ़ान' में चले जाने के कारण उनका प्रारंभिक जीवन और पालन-पोषण ग़तफ़ान कबीले के बीच ही हुआ। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जिसका काव्य और साहित्य से अत्यंत गहरा संबंध था। उनके पिता एक जाने-माने कवि थे, और उनके मामा बशामा बिन अल-ग़दीर भी एक सम्मानित और बुद्धिमान कवि थे, जिनसे ज़ुहैर ने साहित्य और जीवन दर्शन के कई गुण सीखे।اليعقوبي (Al-Yaqubi) تاريخ اليعقوبي (Tarikh al-Yaqubi) 1 103 ar काव्य की यह पारिवारिक परंपरा ज़ुहैर के बाद भी जारी रही। उनकी बहनें सलमा और अल-खंसा भी कवयित्री थीं। बाद में उनके दो पुत्रों—काब बिन ज़ुहैर और बुजैर—ने भी अरबी साहित्य में महान कवि के रूप में ख्याति प्राप्त की। काब बिन ज़ुहैर तो पैगंबर मुहम्मद के समय में इस्लाम लाने वाले सबसे प्रसिद्ध कवियों में से एक बने।https://www.bartleby.com/lit-hub/library/ The Library of the World’s Best Literature Archives Collection at Bartleby.com en-US 2026-03-13 thumb|left|250px|इस्लामी कैलीग्राफी में ज़ुहैर बिन अबी सुल्मा का नाम काव्य शैली और 'हौलियात' ज़ुहैर की काव्य शैली को उनकी अत्यधिक सावधानी, सटीकता और परिष्कार के लिए पहचाना जाता है। अरबी साहित्य के इतिहास में उन्हें 'अल-हौलियात' (حوليات) के रचयिता के रूप में ख्याति प्राप्त है। 'हौल' का अरबी अर्थ 'वर्ष' (Year) होता है। ऐतिहासिक साहित्यिक स्रोतों के अनुसार, वे एक कविता को लिखने में चार महीने लगाते थे, अगले चार महीने उसे सुधारने और परिष्कृत करने में लगाते थे, और फिर अंतिम चार महीनों तक उसे केवल चुनिंदा विद्वानों के सामने प्रस्तुत करके उनकी राय लेते थे। इस प्रकार, एक पूरी कविता को आम जनता के सामने लाने में उन्हें पूरा एक वर्ष लग जाता था।https://shamela.ws/book/10548/667 ص156 - كتاب تاريخ آداب العرب - زهير بن أبي سلمى - المكتبة الشاملة shamela.ws ar 2026-03-13 इस कठोर प्रक्रिया के कारण उनकी कविताओं में शब्दों का चयन अत्यंत उत्कृष्ट और त्रुटिहीन होता था। उनकी कविताओं में अलंकारों का संतुलित उपयोग मिलता है और वे अनावश्यक अतिशयोक्ति (exaggeration) या झूठी प्रशंसा से हमेशा बचते थे।https://poetsgate.com/poet.php?pt=35 الشاعر زهير بن ابي سلمى بوابة الشعراء ar 2026-03-13 मुअल्लक़ा और दाहिस का युद्ध ज़ुहैर की सबसे प्रसिद्ध रचना उनकी 'मुअल्लक़ा' (The Poem of Zuhair) है। इस उत्कृष्ट कविता की रचना उन्होंने 'दाहिस और अल-ग़बरा के युद्ध' के ऐतिहासिक संदर्भ में की थी। यह युद्ध 'अब्स' और 'धुबयान' कबीलों के बीच एक घुड़दौड़ के विवाद को लेकर कई दशकों तक चला था, जिसने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। जब बनू मुरा कबीले के दो उदार और शांतिप्रिय सरदारों—हारिम बिन सिनान और अल-हारिस बिन औफ़—ने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति से हर्जाना (रक्त-मूल्य) देकर इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त करवाया, तो ज़ुहैर ने उनकी प्रशंसा में यह अमर कविता लिखी।https://sourcebooks.fordham.edu/source/640hangedpoems.asp#The%20Poem%20of%20Zuhair The Poem of Zuhair sourcebooks.fordham.edu 2026-03-13 इस मुअल्लक़ा में उन्होंने युद्ध की विभीषिका का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया है। उन्होंने युद्ध को एक ऐसी चक्की के समान बताया है जो निर्दोष इंसानों को पीस डालती है, और एक ऐसी आग के रूप में चित्रित किया है जो सब कुछ भस्म कर देती है। प्रसिद्ध ब्रिटिश प्राच्यविद (Orientalist) ए. जे. आर्बेरी ने अपनी पुस्तक 'द सेवन ओड्स' में ज़ुहैर की इस कविता का विस्तार से अंग्रेजी अनुवाद और विश्लेषण प्रस्तुत किया है।Arberry A. J. 1957 The Seven Odes https://archive.org/details/bwb_KV-541-660 London Allen & Unwin विरासत और साहित्यिक महत्व ज़ुहैर की कविताओं का प्रभाव इस्लाम के आगमन के बाद भी बहुत गहरा रहा। इस्लामी खलीफा उमर इब्न अल-खत्ताब ज़ुहैर को कवियों का सिरमौर मानते थे। खलीफा उमर ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा था कि ज़ुहैर की कविता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे कभी भी अस्पष्ट शब्दों का उपयोग नहीं करते थे, उन्होंने कभी वह नहीं कहा जो उन्होंने नहीं किया, और वे केवल उसी व्यक्ति की प्रशंसा करते थे जो वास्तव में उसका हकदार होता था।البغدادي (Al-Baghdadi) خزانة الأدب (Khizanat al-Adab) 2 293 ar आधुनिक काल में भी वैश्विक कला और संस्कृति में उनके साहित्य का विशेष संदर्भ दिया जाता है। उदाहरण के लिए, 2019 के वेनिस बिएननेल (Venice Biennale) कला प्रदर्शनी में सऊदी अरब के पवेलियन में ऐतिहासिक अरबी कला और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हुए ज़ुहैर के साहित्यिक योगदान का उल्लेख किया गया था।https://www.labiennale.org/en/art/2019/national-participations/saudi-arabia Biennale Arte 2019 Saudi Arabia 2019-05-02 La Biennale di Venezia en 2026-03-13 सन्दर्भ श्रेणी:अरब कवि श्रेणी:छठी सदी के कवि श्रेणी:मुअल्लक़ात के कवि श्रेणी:2026 विकि लव्ज़ रमजान प्रतियोगिता के लेख