411 REFERENCE · Wikipedia
द काउंटरफीटर्स
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
द काउंटरफीटर्स Les faux monnayeurs 1925.jpg आंद्रे जीद फ्रांसीसी फ्रांस नैतिकता, पाखंड, साहित्य की प्रकृति, युवावस्था का विद्रोह आधुनिकतावादी उपन्यास एडिशंस गैलीमार्ड 432 (मूल संस्करण)
द काउंटरफीटर्स (The Counterfeiters, Les Faux-monnayeurs) फ्रांसीसी लेखक और नोबेल पुरस्कार विजेता आंद्रे जीद द्वारा रचित एक जटिल और अत्यधिक प्रभावशाली आधुनिकतावादी उपन्यास है, जिसे 1925 में प्रकाशित किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि जीद ने अपने पूरे करियर में कई कथा साहित्य लिखे थे, लेकिन यह एकमात्र ऐसी कृति थी जिसे उन्होंने स्वयं आधिकारिक तौर पर एक "उपन्यास" का दर्जा दिया था। यह पुस्तक प्रथम विश्व युद्ध के बाद के पेरिस में मध्यमवर्गीय परिवारों के नैतिक पतन, पाखंड और युवाओं के विद्रोह की कहानी कहती है।Sheridan Alan André Gide: A Life in the Present https://archive.org/details/andregidelifeinp00sher Harvard University Press 1999 978-0674035270 380-395"Andre Gide Is Dead, Noted Novelist, 81; Winner of Nobel Prize in 1947 Was Considered Greatest Man of Letters in France of Era Wrote Variety of Works Sought Artistic and Intellectual Liberty--'Counterfeiters' and 'Symphony Pastorale' by Him Quest for "Authentic Life""Journal des faux-monnayeurs
कथानक और बहुस्वरता
उपन्यास में कोई एक स्पष्ट नायक या एक रैखिक कहानी नहीं है। इसके बजाय, जीद ने बहुस्वरता का उपयोग किया है, जहाँ कई परस्पर जुड़ी हुई कहानियाँ एक साथ चलती हैं।
कहानी मुख्य रूप से तीन किशोरों-बर्नार्ड, ओलिवियर, और विंसेंट-तथा उनके परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है।"Gide and the Fantasts: The Nature of Reality and Freedom"
बर्नार्ड को एक पत्र मिलता है जिससे उसे पता चलता है कि वह एक नाजायज़ संतान है। वह अपने परिवार के पाखंड से घृणा करते हुए घर छोड़ देता है। वह ओलिवियर के चाचा, एडौर्ड, जो एक लेखक हैं, का सचिव बन जाता है। इस बीच, युवा लड़के एक परिष्कृत लेकिन भ्रष्ट साहित्यकार, पासवेंट, के प्रभाव में आते हैं, और अंततः कहानी बोरिस नामक एक युवा स्कूली छात्र की दुखद आत्महत्या पर समाप्त होती है, जिसे उसके सहपाठियों द्वारा उकसाया जाता है।Walker David H. André Gide https://archive.org/details/storytalk0000free_i3x1 Macmillan 1990 978-0333453889 110-120
'जालीसाज़ी' का रूपक
पुस्तक का शीर्षक, "द काउंटरफीटर्स" (नकली मुद्रा बनाने वाले), एक दोहरे रूपक के रूप में कार्य करता है:
शाब्दिक जालीसाज़ी: उपन्यास में स्कूली लड़कों का एक गिरोह है जो सचमुच नकली सोने के सिक्कों का उपयोग करके अर्थव्यवस्था को धोखा दे रहा है।
दार्शनिक और नैतिक जालीसाज़ी: जीद के लिए, असली जालीसाज़ वे लोग हैं जो समाज में झूठी भावनाएं, नकली नैतिकता और पाखंडी रिश्ते बनाए रखते हैं। उपन्यास के लगभग सभी पात्र अपनी वास्तविक भावनाओं को छिपाते हैं और समाज द्वारा स्वीकार्य एक "मुखौटा" पहनते हैं। बर्नार्ड का विद्रोह इसी नकली नैतिकता की खोज और उसके प्रति घृणा का प्रतीक है।Holdheim William W. The Counterfeiters and the Theory of the Novel Theory and Practice of the Novel 1968 55-70
'मीज़-एन-अबीम' तकनीक
'द काउंटरफीटर्स' की सबसे बड़ी साहित्यिक उपलब्धि इसकी मीज़-एन-अबीम तकनीक है।
उपन्यास का एक मुख्य पात्र, एडौर्ड, एक उपन्यासकार है जो एक किताब लिख रहा है। दिलचस्प बात यह है कि एडौर्ड जिस किताब को लिख रहा है, उसका नाम भी "द काउंटरफीटर्स" ही है, और उसमें भी वही घटनाएँ हो रही हैं जो मुख्य उपन्यास में हो रही हैं। एडौर्ड अक्सर अपनी डायरी में लिखता है कि उसे वास्तविकता को कथा में बदलने में कितनी मुश्किल हो रही है। इस तकनीक के माध्यम से, आंद्रे जीद पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि साहित्य क्या है, यथार्थवाद क्या है, और एक लेखक वास्तविकता को कैसे 'जाली' बनाता है। यह आत्म-प्रतिबिंब इसे एक 'मेटा-उपन्यास' बनाता है।
साहित्यिक प्रभाव और 'द जर्नल'
उपन्यास के प्रकाशन के एक साल बाद, जीद ने द जर्नल ऑफ द काउंटरफीटर्स (1926) प्रकाशित किया, जो उस डायरी का संकलन था जिसे उन्होंने इस उपन्यास को लिखते समय बनाए रखा था।
इस उपन्यास ने साहित्य में पारंपरिक कथा संरचना को तोड़ दिया। इसकी बहुस्वरता, बिना निष्कर्ष के समाप्त होने वाली कहानियाँ, और लेखक के हस्तक्षेप ने ज्यां-पॉल सार्त्र और अल्बेयर कामू भविष्य के अस्तित्ववादी लेखकों को गहराई से प्रभावित किया।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
इंटरनेट आर्काइव पर द काउंटरफीटर्स