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क्लासिक कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट
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क्लासिक कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट (Classical Kuiper belt object), जिन्हें खगोल विज्ञान की भाषा में क्यूबीवानो भी कहा जाता है, वरुण ग्रह की कक्षा के पार स्थित 'कुइपर बेल्ट' के वे खगोलीय पिंड हैं जिनकी कक्षाएं बहुत कम उत्केंद्रित होती हैं।"Classical Kuiper Belt Objects"अगस्त 2026 InternetArchiveBot
इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये 'प्लूटिनो' जैसे अन्य कुइपर बेल्ट पिंडों के विपरीत, वरुण ग्रह के साथ किसी भी प्रकार के कक्षीय अनुनाद में नहीं होते हैं। इसका अर्थ है कि इनकी कक्षाएं वरुण के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से काफी हद तक मुक्त और स्वतंत्र होती हैं। ये सूर्य से लगभग 40 से 50 खगोलीय इकाई की दूरी पर परिक्रमा करते हैं।Jewitt David C. Morbidelli Alessandro Rauer Heike Trans-Neptunian Objects and Comets Springer 2008 978-3540719571 45-50
'क्यूबीवानो' नाम की उत्पत्ति
इन पिंडों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वैकल्पिक शब्द "क्यूबीवानो" इसके खोज के इतिहास से जुड़ा है। 1930 में प्लूटो की खोज के बाद, दशकों तक कुइपर बेल्ट का कोई अन्य पिंड नहीं खोजा जा सका था।
अंततः 1992 में, खगोलशास्त्री डेविड जेविट और जेन लू ने वरुण के पार एक नया पिंड खोजा, जिसे अस्थायी रूप से 1992 QB1 (बाद में इसका नाम 15760 एल्बियन रखा गया) नाम दिया गया। चूँकि यह नए प्रकार के पिंडों (जो वरुण के साथ अनुनाद में नहीं थे) का पहला उदाहरण था, इसलिए खगोलविदों ने इसके पदनाम "QB1" (क्यू-बी-वन) के आधार पर इस पूरे वर्ग का नाम ही 'क्यूबीवानो' रख दिया।Jewitt David Luu Jane Discovery of the candidate Kuiper belt object 1992 QB1 https://archive.org/details/sim_nature-uk_1993-04-22_362_6422/page/730 Nature 362 6422 1993 730-732 10.1038/362730a0
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कक्षीय विशेषताएँ और दो मुख्य आबादियाँ
खगोलीय गतिशीलता के आधार पर, क्लासिक कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट्स को दो अलग-अलग 'आबादियों' में विभाजित किया जाता है, जिनके गुण एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं:
ठंडी आबादी: 'ठंडी' आबादी का अर्थ यहाँ तापमान से नहीं, बल्कि कक्षीय गतिशीलता से है। इन पिंडों की कक्षाएँ लगभग पूरी तरह से गोलाकार होती हैं और सौर मंडल के तल के सापेक्ष इनका झुकाव बहुत कम (लगभग 5° से कम) होता है। ये सौर मंडल के सबसे प्राचीन और 'अछूते' पिंड माने जाते हैं, जिनका निर्माण ठीक उसी स्थान पर हुआ था जहाँ वे आज हैं। इनका रंग विशिष्ट रूप से लाल होता है।
गर्म आबादी: इन पिंडों की कक्षाओं का झुकाव बहुत अधिक (30° तक) होता है और इनकी कक्षाएं थोड़ी अधिक अंडाकार होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन पिंडों का निर्माण मूल रूप से सूर्य के करीब हुआ था, लेकिन अरबों साल पहले वरुण के बाहर की ओर 'प्रवासन' के दौरान उसके शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण द्वारा इन्हें बाहर की ओर धकेल दिया गया। इनका रंग आमतौर पर हल्का नीला या स्लेटी होता है।Brown Michael E. The Kuiper Belt Annual Review of Earth and Planetary Sciences 40 2012 467-494 10.1146/annurev-earth-042711-105352
ज़्यादातर क्लासिक कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट चट्टान, 'जल बर्फ', और जमे हुए मीथेन तथा अमोनिया के मिश्रण से बने होते हैं। क्योंकि ये सूर्य से बहुत दूर हैं, इसलिए इनकी सतह का तापमान -220 °C (50 केल्विन) के आसपास रहता है।"The Solar System Beyond The Planets"
इस वर्ग के कुछ सबसे प्रमुख खगोलीय पिंड निम्नलिखित हैं:
मेकमेक: यह एक 'बौना ग्रह' है और क्यूबीवानो वर्ग का सबसे बड़ा ज्ञात पिंड है।
क्वाओआर: 2002 में खोजा गया यह एक विशाल पिंड है जिसका अपना एक छोटा चंद्रमा 'वेयवाट' भी है।
15760 एल्बियन: 1992 में खोजा गया पहला क्यूबीवानो, जिसने सौर मंडल के इस पूरे नए क्षेत्र को परिभाषित किया।Barucci M. Antonietta Boehnhardt Hermann Cruikshank Dale P. Morbidelli Alessandro The Solar System Beyond Neptune https://archive.org/details/solarsystembeyon0000unse University of Arizona Press 2008 978-0816527557 143-150https://science.nasa.gov/solar-system/kuiper-belt/ Kuiper Belt - NASA Science NASA"MPEC 2010-B62: Distant Minor Planets (2010 FEB. 13.0 TT)"
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - कुइपर बेल्ट और बाह्य सौर मंडल अन्वेषण
श्रेणी:क्षुद्रग्रह
श्रेणी:बौने ग्रह
श्रेणी:खगोल विज्ञान
श्रेणी:सौर मंडल