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रामजी भांगरे
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नाईक रामजी राव भांगरे thumb|right|200px| रामजी भांगरे के बेटे नाईक राघोजी राव भांगरे की प्रतिमा अहमदनगर मे सुबेदार सरदार रामजी राव भांगरे देवगांव, मराठा साम्राज्य १८३० सेल्यूलर जेल, अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह, ब्रिटिश भारत भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन वंडकरी हिन्दू कोली
रामजी राव भांगरे एक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी थे जिन्होने महाराष्ट्र मे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हथियार उठाए थे और ब्रिटिश शासन का अंत घोषित कर दिया था।https://books.google.co.in/books?id=6T-6AAAAIAAJ Fields and farmers in western India, 1850-1950 Nand Brahma 2003 Bibliomatrix enhttps://books.google.co.in/books?id=hARuAAAAMAAJ Aspects of Indian History: Professor Ram Mohan Sinha commemoration volume Mishra Jai Prakash 1991 Agam Kala Prakashan en रामजी भांगरे ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हथियार उठाने से पहले भ्रष्ट पेशवा के खिलाप विद्रोह किया था। रामजी भांगरे का जन्म महाराष्ट्र में देवगांव के एक कोली परिवार मे हुआ था। ब्रिटिश सरकार ने उनहे काले पानी की सज़ा सुनाई थी। रामजी भांगरे प्रसिद्ध क्रांतिनायक राघोजी भांगरे के पिताजी थे एवं रामजी के चाचा वालोजी भांगरे ने पेशवा के खिलाफ विद्रोह किया था जिसने लिए उनको तोफ से उड़ा दिया गया।https://books.google.co.in/books?id=dLXADwAAQBAJ&dq=ramji+bhangre&source=gbs_navlinks_s श्री त्र्यंबकेश्वर ... ज्ञात अज्ञात Nipanekar Vijay Vijay Nipanekar mrhttps://books.google.co.in/books?id=XZNuAAAAMAAJ South India in 1857 War of Independence Divekar V. D. 1993 Lokmanya Tilak Smarak Trust en 19 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20181004185935/https://books.google.co.in/books?id=XZNuAAAAMAAJ 4 अक्तूबर 2018 live
१७९८ मे नाईक रामजी राव भांगरे ने पेशवा के खिलाफ मोर्चा खोला कयोंकी पेशवा गरीब लोगों के अधिकारों का हनन करने मे व्यस्त था। भांगरे ने कोली जाती के लोगों को एक करके आवाज उठाई और कोंकण मे पेशवा की धज्जीयां उड़ा दी। भांगरे काफी तेज एवं चालाक था इस बात का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है की पेशवा सरकार भांगरे को पकड़ने में हर वार नाकाम रही जिसके चलते पेशवा को भांगरे के साथ समझोता करना पड़ा। समझोते के तहत पेशवा जनता को किसी भी प्रकार से ज्यादा कर नही लगएगा और पेशवा ने भांगरे को बतौर सुबेदार सेना मे नियुक्त किया।
अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह एवं काले पानी की सजा
१८१८ मे जब ब्रिटिश सरकार ने मराठा साम्राज्य अंत किया तो उस समय ब्रिटिश सरकार को महाराष्ट्र मे जगह जगह विद्रोह का सिमना करना पड़ा जिनमें से एक विद्रोह भांगरे के नेतृत्व मे पनप रहा था। भांगरे ने कोली लोगों का एक क्रांतिकारी समूह बनाया और ब्रिटिश सरकार को चुनौती दी। इसके बाद भांगरे एक अन्य कोली क्रांतिकारी के साथ मिल गया जिसका नाम नाईक गोवींद राव खड़े था वो भी मराठा सरकार मे रतनगढ़ किले का सुबेदार था। इसके बाद कई सालों तक भांगरे ने ब्रिटिश आधिन क्षेत्रों मे लूटपाट एवं बमबारी की लेकिन उन्हे रोकने मे ब्रिटिश सरकार असमर्थ रही। १८२९ मे भांगरे के नेतृत्व में विद्रोह ने व्यापक रुप ले लिया।https://books.google.co.in/books?id=j7sMAAAAIAAJ&pg=PA416&dq=ramji+bhangria&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjf64XypvToAhUz7XMBHdfnCc0Q6AEIHTAA#v=onepage&q=ramji%20bhangria&f=false Gazetteer of the Bombay Presidency ... State) Bombay (India : 1884 Printed at the Government Central Press enhttps://books.google.co.in/books?id=lYSd-3yL9h0C&pg=PA333&dq=ramji+bhangria&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjf64XypvToAhUz7XMBHdfnCc0Q6AEILDAC#v=onepage&q=ramji%20bhangria&f=false The Castes and Tribes of H.E.H. the Nizam's Dominions Hassan Syed Siraj ul 1989 Asian Educational Services 978-81-206-0488-9 en 19 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20190331154217/https://books.google.co.in/books?id=lYSd-3yL9h0C#v=onepage&q=ramji%20bhangria&f=false 31 मार्च 2019 live
१८२९ मे ब्रिटिश सरकार ने भांगरे को मार गिराने के लिए केप्टन मैकिंटोश के नेतृत्व में पश्चिमी घाट से अंग्रेजी सेना भेजी लेकिन नाकाम शमी हाथ लगी। इसके बाद केप्टन ने स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाने की कोशिश की परंतु कोई भी भांगरे के बारे में गुप्त जानकारी नही दे रहा था परन्तु कुछ समय बाद महाराष्ट्र के कुछ लालची चीतपावन ब्राह्मण अंग्रेजों के साथ मिल गए जिससे अंग्रेजों को काफी मदद मिली। जानकारी मिलने के बाद कैप्टन ने भीवंडी और कोंकण मे सेना तैनात कर दी साथ ही अहमदनगर, पूणे और मालेगांव से ब्रिटिश सेना ने क्रांतिकारीयों पर आक्रमण कर दिया लेकिन नाईक रामजी राव भांगरे बच कर निकल गया।https://books.google.co.in/books?id=sDluAAAAMAAJ Heritage of Tansa Valley Sharma Arun Kumar 2004-01-01 Bharatiya Kala Prakashan 978-81-8090-029-7 en
इसके बाद भांगरे के साथ और भी क्रांतिकारी लोग मिल गए जो रामा किरवा के नेतृत्व में थे साथ ही कुछ भील जाती के लोग भी मिल गए जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ भड़के हुए थे। भांगरे और शक्तीसाली क्रांतिकारी सेना के साथ मिलकर भांगरे ने पश्चिमी घाट मे जैसे ब्रिटिश शासन को तोड़ के रख दिया था। विद्रोह के प्रकोप को देखते हुए फिर से ब्रिटिश सरकार ने अत्यधिक बल के साथ कैप्टन ल्युकिन, लैफ्टेनेंट ल्योड़ एवं लैफ्टेनेंट फोर्गस के नेतृत्व मे ब्रिटिश सेना भेजी जहां कुछ समय लड़ाई के पश्चात विद्रोहियों पर काबू पा लिया गया और नाईक रामजी राव भांगरे को बंंदी बनाकर काले पानी की सजा के लिए अंडमान निकोबार द्वीप पर मोजूद सेल्यूलर जेल भेज दिया गया।
संदर्भ