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वृहत मीटरवेव रेडियो दूरबीन

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वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप 280px वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप राष्ट्रीय खगोल भौतिकी केन्द्र नारायणगाँव से १० कि.मी. पूर्व, भारत रेडियो ५० से १५०० मेगा-हर्ट्ज़ प्रथम दृष्टि - १९९५ http://www.gmrt.ncra.tifr.res.in ३० अनुवृत्तिक प्रतिक्षेपकों की सारणी ४५ मीटर ६०,७५०m२ ऑल्ट-ऍज़िमथ, पूर्णतया घुमावदार प्राथमिक (दर्पण) वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप भारत के पुणे शहर से ८० किलोमीटर उत्तर में खोडद नामक स्थान पर स्थित रेडियो दूरबीनों की विश्व की सबसे विशाल सारणी है। Ananthakrishnan S. १९९५ जीएमआरटी खगोल भौतिकी और खगोल विज्ञान जर्नल http://adsabs.harvard.edu/full/1995JApAS..16..427A,Ishwara-Chandra C H Rao A Pramesh २००५ कम तरंगदैर्य रेडियो अवलोकन जीएमआरटी चीनी खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी जर्नल http://articles.adsabs.harvard.edu/full/2005ChJAS...5...87I इसकी स्थिति १९° ५'४७.४६" उत्तरी अक्षांश रेखा तथा ७४° २'५९.०७" पूर्वी देशान्तर रेखा पर है। यह टेलिस्कोप दुनिया की सबसे संवेदनशील दूरबीनों में से एक है। इसका संचालन पुणे विश्वविद्यालय परिसर में स्थित राष्ट्रीय खगोल भौतिकी केन्द्र (एनसीआरए) करता है जो टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (टी आइ एफ़ आर) का एक हिस्सा है। इस दूरबीन के केन्द्र में वर्ग रूप से १४ डिश हैं तथा तीन भुजाओं का निर्माण १६ डिश से हुआ है, जनमें से प्रत्येक का व्यास ४५ मीटर है। इस प्रकार २५ किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह जायंट मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप ३० दूरबीनों का समूह है। इसका कोई सलग पृष्ठभाग नहीं है क्योंकि यह दूरबीन पॅराबोलिक आकार में तारों का एक जाल है। पृष्ठभाग न रखकर इसका वजन कम किया गया है और कम पावर की मोटरों को लगाकर उनकी जगह बदलने की व्यवस्था भी की गई है। सभी डिशों को अत्यन्त सूक्ष्मता पूर्वक सभी दिशाओं में घुमाया जा सकता है। इस रचना का पेटंट है और खगोलशास्त्रज्ञ डॉ॰ गोविंद स्वरूप इसके जनक हैं। वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप की विशेष और स्वाभिमानवाली बात यह है कि इसका डिश एंटीना ही नहीं बल्कि संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स भी भारत में भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।http://www.misalpav.com/node/2738 जायंट मीटरवेव्ह रेडीओ टेलिस्कोप २ जून २००९ मिसलपाव मराठी https://web.archive.org/web/20080820000301/http://www.misalpav.com/node/2738 20 अगस्त 2008 dead वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप मुख्यतः कम ऊर्जा वाली लहरों के लिए बनाया गया है। इसमें ५० मेगॅहर्टज़ से १४२० मेगॅहर्टज़ फ्रिक्वेंसी मापक है। इस स्पेक्ट्रम में जितनी लहरें हैं उनका अभ्यास हो सकता है। वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप से दुनिया का हाइड्रोजन देखा जा सकता है। बहुत करीब का यानि आकाशगंगा और बहुत दूर का मतलब अभी तक हम जितनी दूर का देख सकते हैं वहाँ का हाइड्रोजन देखने के लिए यह दूरबीन बहुत उपयुक्त साबित हुई है। इससे गुरु ग्रह के बारे में भी जाना जा सकता है क्योंकि गुरु में बहुत हाइड्रोजन भरा हुआ है और उसके तापमान को रेडिओ लहरी पर पढ़ा जा सकता है। जब तारे टूटने के बाद पल्सर की जानकारी भी वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप की सहायता से हो सकती है। एनसीआरए में छात्रों के लिए खगोल विज्ञान तथा खगोल भौतिकी में अनुसंधान की उन्नत केंद्रीयकृत सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसमें संचालित की जाने वाली प्रमुख गतिविधियों में ब्रह्माण्डविज्ञान, संस्थापित एवं प्रमात्रा गुरुत्व, गुरुत्वाकर्षण तरंग खगोल विज्ञान तथा उच्च ऊर्जा भौतिक विज्ञान सम्मिलित है।http://rojgarsamachar.gov.in/careerdetails.asp?id=253 भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में रोज़गार के अवसर - डॉ॰ सीमिन रुबाब २ जून २००९ रोजगार समाचार https://web.archive.org/web/20110926090734/http://rojgarsamachar.gov.in/careerdetails.asp?id=253 26 सितंबर 2011 dead thumb|left|अनन्त से जवाब की प्रतिक्षा मेंइसका आकार अमेरिक के वीएलए दूरबीन की ही तरह Y आकार का है। ब्रहांड के विभिन्न जगहों (सितारों, निहारिकाओं, पल्सार आदि) को देखने के लिए पूरी दुनिया के खगोलविद् इस दूरबीन का नियमित उपयोग करते हैं। भारत के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस को यह दूरबीन आमजनता के दर्शन के लिए खोल दी जाती हैं एवं इस दिन कोई भी इसके दर्शन कर सकता है। अन्य दिवसों में इस अंतर्राष्ट्रीय दूरबीन के प्रयोग के लिए लिखित अनुमति लेनी होती है। जिसे इसके प्रयोग की आवश्यकता होती है उसे एक पत्र लिखना होता है। उसमें दूरबीन से क्या देखना चाहते हैं, क्यों देखना चाहते हैं, क्या सीखना चाहते हैं, कितने समय के लिए चाहिए आदि बातों का उल्लेख करना आवश्यक होता है। एक समिति, जिसमें वृहत मीटरवेव रेडियो टेलिस्कोप और अन्य संस्थाओं के विशेषज्ञ हैं, इस विषय में निर्णय लेती है। यह पत्र दुनिया में कोई भी इंसान लिख सकता है, चाहे वह खगोलशास्त्र का पंडित हो चाहे न हो, उससे कुछ पूछा नहीं जाता। रेडिओ दूरबीन होने के कारण वहाँ मोबाईल सेवा सख्ती से बंद है। सन्दर्भ बाह्यसूत्र जीएमआरटी मुख्य पृष्ठ वाई के आकार का सरणी विज्ञान दिवस पर अनुच्छेद जीएमआरटी जाएँ विकिमैपिया पर देखें गूगल मैप में जीएमआरटी साइट श्रेणी:खगोलशास्त्र श्रेणी:टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना