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411 समाचार
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पूर्व-प्राथमिक विद्यालय

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पूर्व-प्राथमिक विद्यालय, जिसे प्लेस्कूल, नर्सरी या किंडरगार्टन भी कहा जाता है, बच्चों की औपचारिक शिक्षा की शुरुआत से पहले का एक प्रारंभिक और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। यह मुख्य रूप से 3 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए डिज़ाइन किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को घर के सुरक्षित माहौल से बाहर निकालकर स्कूल के नए वातावरण के अनुकूल बनाना और उनमें सीखने की बुनियादी ललक पैदा करना है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इसे बच्चे के मानसिक और सामाजिक विकास की नींव माना जाता है।एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का महत्व और इतिहास इतिहास और पृष्ठभूमि पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की अवधारणा का इतिहास काफी पुराना है। जर्मन शिक्षाविद फ्रेडरिक फ्रोबेल को आधुनिक किंडरगार्टन प्रणाली का जनक माना जाता है, जिन्होंने 1837 में पहला किंडरगार्टन खोला था। उनका मानना था कि बच्चों को पौधों की तरह प्यार और स्वतंत्रता के माहौल में विकसित होने देना चाहिए। इसके बाद 20वीं शताब्दी की शुरुआत में इटली की प्रसिद्ध चिकित्सक और शिक्षाविद मारिया मोंटेसरी ने 'मोंटेसरी पद्धति' का विकास किया, जिसने बच्चों की आत्म-प्रेरित शिक्षा पर जोर दिया। आज दुनिया भर में इन प्रणालियों को पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का मुख्य आधार माना जाता है। मुख्य उद्देश्य और गतिविधियाँ खेल-खेल में शिक्षा: इस चरण में बच्चों पर परीक्षाओं या रटने वाली पढ़ाई का कोई दबाव नहीं होता है। उन्हें रंग-बिरंगे खिलौनों, आकृतियों और पहेलियों के माध्यम से बुनियादी गणितीय और तार्किक कौशल सिखाए जाते हैं। रचनात्मकता और कल्पनाशीलता: बच्चों को संगीत, नृत्य, कविता पाठ और कहानी सुनाने जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाता है। चित्रकारी और मिट्टी के खिलौने बनाने से उनकी रचनात्मक सोच का विकास होता है। भाषा कौशल: बातचीत, नए शब्दों के प्रयोग और कहानियों के माध्यम से बच्चों की सुनने और बोलने की क्षमता में तेजी से सुधार होता है। प्रारंभिक शिक्षा के प्रमुख लाभ लघु|दाएँ|220px|चित्रकारी के माध्यम से कलात्मक कौशल का विकास। 1. सामाजिक और संवेगात्मक विकास: पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में बच्चे अपने हमउम्र साथियों के साथ मिलना-जुलना सीखते हैं। वे अपनी चीजें साझा करना, दूसरों की मदद करना और अपनी बारी का इंतजार करना सीखते हैं, जिससे उनमें सहानुभूति की भावना विकसित होती है।यूनेस्को: प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का वैश्विक महत्व 2. शारीरिक और मोटर कौशल का विकास: विभिन्न प्रकार के शारीरिक खेलों, जैसे दौड़ना, कूदना, कागज काटना और मोती पिरोना, से बच्चों की छोटी और बड़ी मांसपेशियों का बेहतर विकास होता है। 3. आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास: यहाँ बच्चे छोटे-छोटे कार्य खुद करना सीखते हैं, जैसे अपने जूते के फीते बांधना, टिफिन खोलना और अपने खिलौने सही जगह पर रखना। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आत्मनिर्भर बनते हैं। 4. प्राथमिक शिक्षा के लिए सुगम परिवर्तन: जो बच्चे पूर्व-प्राथमिक विद्यालय जाते हैं, उन्हें प्राथमिक विद्यालय की पहली कक्षा के कठोर नियमों और लंबे समय तक बैठने की आदत में ढलने में कोई कठिनाई नहीं होती है। विभिन्न शिक्षण पद्धतियाँ दुनिया भर के पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों में मुख्य रूप से निम्नलिखित शिक्षण पद्धतियों का उपयोग किया जाता है: मोंटेसरी पद्धति: इसमें बच्चों को अपनी गति से सीखने की स्वतंत्रता दी जाती है और शिक्षक केवल एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। प्ले-वे पद्धति: इसमें पूरी तरह से खेलों और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का ज्ञानवर्धन किया जाता है। रेगियो एमिलिया पद्धति: यह पद्धति बच्चों की खोजबीन करने की प्रवृत्ति और उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इन्हें भी देखें शिक्षा विद्यालय सन्दर्भ