411 REFERENCE · Wikipedia
पाँच महान महाकाव्य
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
250px|thumb|शिलप्पदिकारम पर टिप्पणी
पाँच महान महाकाव्य (ஐம்பெரும்காப்பியங்கள் ऐम्पेरुम्काप्पियंगल) तमिल साहित्यिक परंपरा के अनुसार पाँच तमिल महाकाव्य हैं। ये पाँचों महाकाव्य शिलप्पदिकारम, मणिमेकलई, जीवक चिन्तामणि, वलैयापति और कुण्डलकेसि हैं।मुखर्जी 1999 277
तमिल साहित्य के पाँच महान महाकाव्यों में से तीन का श्रेय तमिल जैनियों को दिया जाता है, जबकि दो का श्रेय तमिल बौद्धों को दिया जाता है। जीवक चिन्तामणि, शिलप्पदिकारम और वलैयापति तमिल जैनियों द्वारा लिखे गए थे, जबकि मणिमेकलई और कुण्डलकेसि बौद्धों द्वारा लिखे गए थे। ऐम्पेरुमकप्पियम (शाब्दिक रूप से पाँच बड़े महाकाव्य) का पहला उल्लेख मयिलैनथर की नन्नूल की टिप्पणी में मिलता है, हालांकि मयिलैनथर ने उनके शीर्षकों का उल्लेख नहीं किया है। शीर्षकों का पहली बार उल्लेख 18वीं सदी के अंत और 19वीं सदी के प्रारंभ के साहित्यिक रचना थिरुथानिकायुला में किया गया था। 17वीं सदी की कविता तमिल विदु थूथु जैसी रचनाओं में महान महाकाव्यों का उल्लेख पँचकाव्यों के रूप में किया गया है।ज्वेलेबिल 1992 73पूर्णलिंगम पिल्लई 1994 115 इनमें से अंतिम दो, वलैयापति और कुण्डलकेसि मौजूद नहीं हैं।शिशिर कुमार दास A history of Indian literature, 500–1399: from courtly to the popular 2005 साहित्य अकादमी, चेन्नई 81-260-2171-3 80 https://books.google.co.in/books?id=BC3l1AbPM8sC&redir_esc=y 16 जुलाई 2024 en
ये पाँच महाकाव्य 5वीं से 10वीं शताब्दी की अवधि में लिखे गए थे और उस अवधि में तमिल लोगों के समाज, धर्म, संस्कृति और शैक्षणिक जीवन के बारे में ऐतिहासिक जानकारी प्रदान करते हैं। जीवक चिन्तामणि ने तमिल साहित्य में विरुथा पा नामक लंबे छंदों की शुरुआत की थी।अमरेश दत्ता The Encyclopaedia of Indian Literature (Volume One) (A to Devo), Volume 1 2004 साहित्य अकादमी नई दिल्ली 9788126018031 720 https://books.google.com/books?id=ObFCT5_taSgC 16 जुलाई 2024 en शिलप्पदिकारम ने एकालाप का उपयोग किया, जो संगम साहित्य से अपनाई गई शैली है।
संग्रह
क्रम नाम Author समय 1 शिलप्पदिकारम इलांगो अडिगल (तमिल पुलावर) 5वीं या 6वीं शताब्दी ई 2 मणिमेकलईसीतलै सतनार (तमिल पुलावर)6वीं या 7वीं शताब्दी 3 जीवक चिन्तामणितिरुतक्कदेवर (तमिल पुलावर)10वीं शताब्दी की शुरुआत 4 वलैयापति एक अज्ञात पुलावर 10वीं शताब्दी 5 कुण्डलकेसि नातकुत्तनार् लगभग 10वीं शताब्दी
पाँच लघु तमिल महाकाव्य
पाँच महान महाकाव्यों के समान, तमिल साहित्यिक परंपरा पाँच और कृतियों को ऐंचिरुकप्पियांगल (ஐஞ்சிறுகாப்பியங்கள்) या पाँच लघु महाकाव्यों के रूप में वर्गीकृत करती है। ये पाँच लघु तमिल महाकाव्य नीलाकेशी, नाग कुमार काव्यम, उदयन कुमार काव्यम, यशोधरा काव्यम और कुलमणि हैं।परमेश्वरानंद स्वामी Encyclopaedic Dictionary of Purāṇas 2001 सरूप एंड संस 81-7625-226-3 1151 https://books.google.com/books?id=FdIkaccgneAC&pg=PA1151 16 जुलाई 2024 en
सन्दर्भ
स्रोत ग्रंथ
* अ डिक्शनरी ऑफ़ इंडियन लिटरेचर : बिगिनिंग्स-1850 मुखर्जी सुजीत 1999 ओरिएंट लाँगमैन लिमिटेड नई दिल्ली https://books.google.com/books?id=YCJrUfVtZxoC 81-250-1453-5 en
* ज्वेलेबिल कामिल कंपैनियन स्टडीज़ टू द हिस्ट्री ऑफ़ तमिल लिटरेचर Kamil Zvelebil 1992 ब्रिल https://books.google.com/books?id=qAPtq49DZfoC 978-90-04-09365-2 en
* पूर्णलिंगम पिल्लई एम. एस. तमिल लिटरेचर 1994 115 एशियन एजुकेशनल सर्विसेज़ 81-206-0955-7 https://books.google.com/books?id=QIeqvcai5XQC&pg=PA115 en
श्रेणी:तमिल साहित्य
श्रेणी:भारतीय साहित्य