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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

योहीरो नांबू

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जुलाई 2026 योइचिरो नाम्बू南部 陽一郎 YoichiroNambu.jpg 18 जनवरी 1921 टोक्यो, जापान 5 जुलाई 2015 ओसाका, जापान जापानी-अमेरिकी भौतिकी शिकागो विश्वविद्यालय, उन्नत अध्ययन संस्थान टोक्यो विश्वविद्यालय सहज सममिति टूटना, प्रमात्रा रंगगतिकी, तंतु सिद्धांत भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (2008) योइचिरो नाम्बू (18 जनवरी 1921 – 5 जुलाई 2015) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात जापानी-अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी थे, जिन्हें उपपरमाण्विक भौतिकी और प्रमात्रा यांत्रिकी के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक अनुसंधानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।https://www.nobelprize.org/prizes/physics/2008/nambu/biographical/ योइचिरो नाम्बू की जीवनी नोबेल पुरस्कार समिति 3 जून 2026 वर्ष 2008 में उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान के लिए मकोतो कोबायाशी और तोशिहिदे मास्कावा के साथ संयुक्त रूप से भौतिकी के सर्वोच्च सम्मान, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।https://www.nytimes.com/2008/10/08/science/08nobel.html तीन वैज्ञानिकों ने जीता भौतिकी का नोबेल द न्यूयॉर्क टाइम्स 8 अक्टूबर 2008 3 जून 2026 यह महान सम्मान उन्हें उपपरमाण्विक भौतिकी में 'सहज सममिति टूटने' की चमत्कारी प्रक्रिया की खोज के लिए प्रदान किया गया था।नाम्बू योइचिरो कण भौतिकी में सहज सममिति भौतिकी समीक्षा पत्रिका 1960 117 648-663 उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण शोध ब्रह्मांड के मूलभूत कणों के द्रव्यमान और उनके व्यवहार को स्पष्ट रूप से समझने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।स्मिथ रॉबर्ट आधुनिक भौतिकी और कण 2010 विज्ञान शिक्षा प्रकाशन प्रारम्भिक जीवन उनका जन्म 18 जनवरी 1921 को जापान की राजधानी टोक्यो में हुआ था। जब वे केवल दो वर्ष के थे, तब टोक्यो में एक अत्यंत भयंकर भूकंप आया था, जिसके कारण उनके परिवार को अपनी सुरक्षा के लिए फुकुई नामक एक छोटे से नगर में विस्थापित होना पड़ा।डेविस पॉल नाम्बू का प्रारंभिक जीवन 2012 भौतिकी शिक्षा प्रकाशन उनके पिता एक स्थानीय विद्यालय में शिक्षक थे, जिसके कारण उनके घर में हमेशा से ही अध्ययन और ज्ञानार्जन का एक अत्यंत उत्कृष्ट वातावरण रहता था। बचपन से ही उनकी विज्ञान और गणित के अत्यंत जटिल प्रश्नों को सुलझाने में अत्यधिक रुचि थी।जॉनसन माइकल महान भौतिक विज्ञानियों का प्रारंभिक जीवन प्रायोगिक भौतिकी पत्रिका 2009 25 112-118 उनके प्रारंभिक जीवन का काफी समय द्वितीय महायुद्ध के अत्यंत संघर्षपूर्ण दौर में बीता, जिसने उन्हें जीवन में अत्यंत कठोर परिश्रम करने की प्रेरणा दी। शिक्षा अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्कृष्ट रूप से पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जापान के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान, टोक्यो विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।https://www.u-tokyo.ac.jp/en/about/history.html टोक्यो विश्वविद्यालय का इतिहास टोक्यो विश्वविद्यालय 3 जून 2026 इसी महान संस्थान से उन्होंने वर्ष 1942 में भौतिकी विषय में अपना स्नातक अत्यंत उत्कृष्ट अंकों के साथ पूर्ण किया। इसके पश्चात द्वितीय महायुद्ध के कारण उन्हें एक सैन्य अनुसंधान प्रयोगशाला में कार्य करने के लिए भेज दिया गया, जहाँ उन्होंने राडार तकनीक पर कार्य किया।टेलर रिचर्ड प्रमात्रा यांत्रिकी का ऐतिहासिक विकास नेचर भौतिकी पत्रिका 2004 15 78-85 युद्ध समाप्त होने के पश्चात वे पुनः विश्वविद्यालय लौट आए और वर्ष 1952 में भौतिकी में अपनी विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की सर्वोच्च उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की। यहाँ उन्होंने कण भौतिकी पर अपना बहुत ही महत्वपूर्ण शोध कार्य पूर्ण किया था।https://www.s.u-tokyo.ac.jp/en/overview/history.html टोक्यो विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और नोबेल विजेता टोक्यो विश्वविद्यालय विज्ञान संकाय 3 जून 2026 सम्मान विज्ञान और प्रमात्रा भौतिकी के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 2008 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।https://www.nobelprize.org/prizes/physics/2008/summary/ 2008 भौतिकी नोबेल पुरस्कार का सारांश नोबेल फाउंडेशन 3 जून 2026 नोबेल पुरस्कार के अतिरिक्त उन्हें दुनिया भर के कई अत्यंत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों द्वारा बहुत ही बड़े सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए 'राष्ट्रीय विज्ञान पदक' और 'वुल्फ पुरस्कार' जैसे सर्वोच्च सम्मानों से भी अलंकृत किया गया था।क्लार्क जेम्स नोबेल विजेताओं का इतिहास 2015 ऑक्सफोर्ड विज्ञान प्रकाशन वे 1970 में अमेरिकी नागरिक बन गए और कई दशकों तक शिकागो विश्वविद्यालय में एक पूर्णकालिक वरिष्ठ प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहे। 5 जुलाई 2015 को 94 वर्ष की अत्यंत परिपक्व आयु में ओसाका नगर में उनका शांतिपूर्ण निधन हो गया, परंतु सैद्धांतिक भौतिकी के जगत में उनका अमूल्य योगदान सदा के लिए अमर रहेगा।https://www.bbc.com/news/science-environment-20150717 महान भौतिक विज्ञानी योइचिरो नाम्बू का निधन बीबीसी समाचार 17 जुलाई 2015 3 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot इन्हें भी देखें भौतिकी में नोबेल पुरस्कार मकोतो कोबायाशी सन्दर्भ 2