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यूरेनस के वलय
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यूरेनस के वलय (Rings of Uranus) सौर मंडल के सातवें ग्रह, यूरेनस (अरुण) के चारों ओर परिक्रमा करने वाली वलयों की एक प्रणाली है। शनि के अत्यंत चौड़े और चमकीले वलयों के विपरीत, यूरेनस के वलय बहुत संकरे, धुंधले और गहरे रंग के हैं। 1977 तक वैज्ञानिकों को यह नहीं पता था कि यूरेनस के चारों ओर भी वलय मौजूद हैं। यूरेनस की वलय प्रणाली सौर मंडल में खोजी जाने वाली दूसरी वलय प्रणाली थी (शनि के बाद)।Elliot J. L. Dunham E. Mink D. The rings of Uranus https://archive.org/details/sim_nature-uk_1977-05-26_267_5609/page/328 Nature 267 5609 1977 328-330 10.1038/267328a0 "Uranus rings 'were seen in 1700s'"अगस्त 2026 InternetArchiveBot "Uranus and Neptune - Rings"
खोज का इतिहास
यूरेनस के वलयों की खोज अप्रत्याशित रूप से 10 मार्च 1977 को जेम्स एल. इलियट, एडवर्ड डब्ल्यू. डनहम और जेसिका मिंक द्वारा की गई थी। वे 'कुइपर एयरबोर्न ऑब्जर्वेटरी' का उपयोग करके यूरेनस द्वारा एक पृष्ठभूमि तारे (SAO 158687) के 'तारकीय पिधान' का अध्ययन कर रहे थे।
उन्होंने देखा कि तारे का प्रकाश ग्रह के पीछे पूरी तरह छिपने से पहले और बाद में पाँच बार झपका। इससे उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि ग्रह के चारों ओर संकीर्ण वलयों की एक प्रणाली मौजूद है जो तारे के प्रकाश को रोक रही है। बाद में 1986 में, वॉयजर 2 अंतरिक्ष यान ने यूरेनस के पास से उड़ान भरते समय इन वलयों की पहली सीधी तस्वीरें लीं और दो नए वलय खोजे। 2005 में हबल स्पेस टेलीस्कोप ने दो और बाहरी वलयों की खोज की।"Did William Herschel Discover The Rings Of Uranus In The 18th Century?"
संरचना और विशेषताएं
वर्तमान में यूरेनस के 13 ज्ञात वलय हैं।
गहरा रंग: ये वलय सौर मंडल के सबसे गहरे रंग के पदार्थों में से एक से बने हैं। इनकी परावर्तन क्षमता केवल 2% के आसपास है, जो लगभग चारकोल के समान है। माना जाता है कि ये विकिरण-संशोधित डार्क कार्बनिक पदार्थों से बने हैं।
कणों का आकार: शनि के वलयों की बारीक धूल के विपरीत, यूरेनस के मुख्य वलयों में मुख्य रूप से बड़े बोल्डर होते हैं, जिनका आकार 20 सेंटीमीटर से लेकर 20 मीटर तक होता है।
एप्सिलॉन वलय और शेफर्ड चंद्रमा
यूरेनस का सबसे चमकीला, सबसे घना और प्रमुख वलय एप्सिलॉन वलय है।
भौतिकी के नियमों के अनुसार, वलयों को अंतरिक्ष में बिखर जाना चाहिए, लेकिन एप्सिलॉन वलय बहुत संकरा है। इस वलय की संकीर्णता का कारण दो छोटे चंद्रमा हैं-कॉर्डेलिया और ओफेलिया।
इन्हें 'शेफर्ड चंद्रमा' (चरवाहे चंद्रमा) कहा जाता है। कॉर्डेलिया वलय के ठीक अंदर परिक्रमा करता है और ओफेलिया ठीक बाहर। वे अपने गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके वलय के कणों को एक झुंड की तरह एक साथ बांधे रखते हैं और उन्हें बिखरने से रोकते हैं।
98° का अक्षीय झुकाव
यूरेनस की सबसे अनूठी विशेषता इसका अक्षीय झुकाव है, जो लगभग 98° है। इसका मतलब है कि यह ग्रह अपनी कक्षा में लगभग "लेटा" हुआ है और इसके ध्रुव सूर्य की ओर इंगित करते हैं।
इस झुकाव के कारण, इसके वलय भी ऊर्ध्वाधर रूप से स्थित हैं। जब पृथ्वी और यूरेनस की कक्षाएं संरेखित होती हैं, तो इसके वलय पृथ्वी से देखने पर एक 'बुल्सआई' या तीरंदाजी के लक्ष्य की तरह दिखाई देते हैं। हाल ही में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने यूरेनस के वलयों की इसी कोण से शानदार इन्फ्रारेड तस्वीरें खींची हैं।https://webb.nasa.gov/ NASA's Webb Scores Another Ringed World With New Image of Uranus NASA
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - यूरेनस ग्रह अवलोकन
श्रेणी:सौर मंडल