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बंधु सिंह
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अमर शहीद बन्धू सिंह Amar Shahid Bandhu Singh.jpg 10 मई 2010 को उनकी 178वीं जयंती पर विशेष आवरण जारी किया गया 1833 5 1 y डुमरी रियासत, गोरखपुर, ब्रिटिश भारत 12 अगस्त 1858 गोरखपुर, ब्रिटिश भारत फांसी द्वारा मृत्यु शहीद बन्धू सिंह स्मारक, गोरखपुर भारतीय बाबू बन्धू सिंह, राजा साहब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी बाबू शिवप्रसाद सिंह
बन्धू सिंह (1 मई 1833 - 12 अगस्त 1858) एक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध का नेतृत्व किया। 12 अगस्त 1858 को गोरखपुर के अली नगर चौराहे पर ब्रिटिश शासन द्वारा उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई।Amin Shahid Event, Metaphor, Memory: Chauri Chaura, 1922-1992 1995 University of California Press 137–140 9780520087804 https://books.google.com/books?id=pbYwDwAAQBAJ&q=bandhu+singh+1857http://www.gorakhpurcityinfo.com/Gorakhpur-Resource/Tarkulhadevi.aspx https://web.archive.org/web/20130328004157/http://www.gorakhpurcityinfo.com/Gorakhpur-Resource/Tarkulhadevi.aspx 2013-03-28 Tarkulhadevi: Mata Tarkulha Devi Gorakhpur City Information
https://www.hindustantimes.com/lucknow/animal-sacrifice-at-this-temple-has-a-martyr-connection/story-zN850vVwQ8kX0pWym1u5QK.html Animal sacrifice at this temple has a martyr connection Abdul Jadid Gorakhpur Hindustan Times 8 April 2017
Thematizations of the Goddess in South Asian Cinema Utkarsh Chaubey Bandhu Singh ki Faansi: Maa Tarkulha Devi: The Goddess of a "Forgotten" Hero Anway Mukhopadhyay Shouvik Narayan Hore 2022 Cambridge Scholars Publishing
जीवन परिचय
बन्धू सिंह का जन्म 1 मई 1833 को गोरखपुर के डुमरी रियासत में हुआ था। वे माता तरकुलहा देवी के भक्त थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और कई ब्रिटिश अधिकारियों को पराजित किया।
स्वतंत्रता संग्राम
उन्होंने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ा। वे जंगलों में रहकर ब्रिटिश अधिकारियों पर अचानक आक्रमण करते और उनकी हत्या कर तरकुलहा देवी के मंदिर में बलिदान के रूप में उनके सिर चढ़ाते थे। उनकी रणनीति ने ब्रिटिशों को भयभीत कर दिया।
गिरफ्तारी और फांसी
अंततः ब्रिटिश सेना ने गद्दार सूरत सिंह (एक पंजाबी जागीरदार, खालसा सेना में एक सैन्य अधिकारी) की मदद से उन्हें पकड़ लिया। 12 अगस्त 1858 को उन्हें गोरखपुर के अली नगर चौराहे पर सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई। कहा जाता है कि छह बार प्रयास करने के बाद भी फांसी सफल नहीं हुई, लेकिन सातवीं बार यह संभव हो सका।
स्मारक एवं विरासत
गोरखपुर में उनका एक स्मारक "शहीद बन्धू सिंह स्मारक" स्थापित किया गया है।
तरकुलहा देवी मंदिर में भी उनकी याद में एक स्मारक बना हुआ है।
हर साल नवरात्रि के दौरान "तरकुलहा मेला" आयोजित किया जाता है।
उनके नाम पर कई संस्थान और पार्क बनाए गए हैं, जैसे शहीद बन्धू सिंह पी.जी. कॉलेज और शहीद बन्धू सिंह स्टेडियम।https://www.jagran.com/uttar-pradesh/gorakhpur-city-national-sports-events-will-soon-be-held-in-mmmut-stadium-21217051.html एमएमएमयूटी स्टेडियम में जल्द होंगे राष्ट्रीय खेल आयोजन दैनिक जागरण 25 फ़रवरी 2025 25 फ़रवरी 2025
इन्हें भी देखें
१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
तरकुलहा देवी मंदिर
सन्दर्भ
श्रेणी:शहीद
श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी
श्रेणी:उत्तर प्रदेश के लोग
श्रेणी:गोरखपुर के लोग
श्रेणी:भारतीय क्रांतिकारी