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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

गोविन्द शंकर कुरुप

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G.shankarakurup.jpg 200px गोविन्द शंकर कुरुप की स्मृति में जारी डाकटिकट 3 जून 1901 नायतोट्ट, केरल, भारत 1978 2 2 1901 6 3 y वप्पलास्सेरी, अंगमाली, एर्नाकुलम केरल, भारत गोविन्द शंकर कुरुप विश्व दर्शनम्, ओट्टकुष़ल या ओटक्कुष़ल मलयालम पद्म भूषणज्ञानपीठ पुरस्कारसाहित्य अकादमी पुरस्कारकेरल साहित्य अकादमी पुरस्कार भारतीय गद्य एवं पद्य गोविन्द शंकर कुरुप या जी शंकर कुरुप (५ जून १९०१-२ फरवरी १९७८)lastश्रोत्रिय डॉ॰ प्रभाकर ज्ञानपीठ पुरस्कार 2005 भारतीय ज्ञानपीठ नई दिल्ली 81-263-1140-1 18 4 दिसंबर 2008 मलयालम भाषा के प्रसिद्ध कवि हैं। उनका जन्म केरल के एक गाँव नायतोट्ट में हुआ था। ३ साल की उम्र से उनकी शिक्षा आरंभ हुई। ८ वर्ष तक की आयु में वे 'अमर कोश' 'सिद्धरुपम' 'श्रीरामोदन्तम' आदि ग्रन्थ कंठस्थ कर चुके थे और रघुवंश महाकाव्य के कई श्लोक पढ चुके थे। ११ वर्ष की आयु में महाकवि कुंजिकुट्टन के गाँव आगमन पर वे कविता की ओर उन्मुख हुये। तिरुविल्वमला में अध्यापन कार्य करते हुये अँग्रेजी भाषा तथा साहित्य का अध्ययन किया। अँग्रेजी साहित्य इनको गीति के आलोक की ओर ले गया। उनकी प्रसिद्ध रचना ओटक्कुष़ल http://www.pustak.org/bs/home.php?bookid=567 ओटक्कुषल् ६ दिसंबर 2008 पीएचपी भारतीय साहित्य संग्रह https://web.archive.org/web/20100613125852/http://pustak.org/bs/home.php?bookid=567 13 जून 2010 dead अर्थात बाँसुरी भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले साहित्य के सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञानपीठ द्वारा सम्मानित हुई। http://www.bbc.co.uk/hindi/news/story/2007/04/070407_askus_hercules.shtml पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार किसे दिया गया था दिसंबर 2008 पीएचपी बीबीसी https://web.archive.org/web/20070822064717/http://www.bbc.co.uk/hindi/news/story/2007/04/070407_askus_hercules.shtml 22 अगस्त 2007 live इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह विश्वदर्शनम् के लिये उन्हें सन् 1963 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp अकादमी पुरस्कार साहित्य अकादमी 11 सितंबर 2016 https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp 15 सितंबर 2016 dead जीवन परिचय नायतोट्ट के सरलजीवी वातावरण में गोविन्द शंकर कुरुप का जन्म शंकर वारियर के घर में हुआ। उनकी माता का नाम लक्ष्मीकुट्टी अम्मा था। बचपन में ही पिता का देहांत हो जाने के कारण उनका लालन-पालन मामा ने किया। उनके मामा ज्योतिषी और पंडित थे जिसके कारण संस्कृत पढ़ने में उनकी सहज रुचि रही और उन्हें संस्कृत काव्य परंपरा के सुदृढ़ संस्कार मिले। आगे की पढ़ाई के लिए वे पेरुमपावूर के मिडिल स्कूल में पढ़ने गए। सातवीं कक्षा के बाद वे मूवाट्टुपुपा मलयालम हाई स्कूल में पढ़ने आए। यहाँ के दो अध्यापकों श्री आर.सी. शर्मा और श्री एस.एन. नायर का उनके ऊपर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने कोचीन राज्य की पंडित परीक्षा पास की, बांग्ला और मलयालम के साहित्य का अध्ययन किया। उनकी पहली कविता 'आत्मपोषिणी' नामक मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुई और जल्दी ही उनका पहला कविता संग्रह 'साहित्य कौतुमकम' प्रकाशित हुआ। इस समय वे तिरुविल्वामला हाई स्कूल में अध्यापक हो गए। १९२१ से १९२५ तक श्री शंकर कुरुप तिरुविल्वामला रहे। १९२५ में वे चालाकुटि हाई स्कूल आ गए। इसी वर्ष साहित्य कौतुकम का दूसरा भाग प्रकाशित हुआ। उनकी प्रतिभा और प्रसिद्धि चारों ओर फैलने लगी थी। १९३१ में नाले (आगामी कल) शीर्षक कविता से वे जन-जन में पहचाने गए। १९३७ से १९५६ तक वे महाराजा कॉलेज एर्णाकुलम में प्राध्यापक के पद पर कार्य करते रहे। प्राध्यापकी से अवकाश लेने के बाद वे आकाशवाणी के सलाहकार बने। १९६५ में ज्ञानपीठ के बाद उन्हें १९६७ में सोवियतलैंड नेहरू पुरस्कार प्राप्त हुआ। गोविंद शंकर कुरुप को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन १९६८ में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था, तथा उसी वर्ष राष्ट्रपति ने उन्हें राज्य सभा का सदस्य भी मनोनीत किया जिस पर वे १९६८ से १९७२ तक बने रहे। १९७८ में उनकी मृत्यु के समय केरल में राजकीय अवकाश की घोषणा की गई। प्रकाशित कृतियाँ कविता संग्रह - साहित्य कौतुकम् - चार खंड (१९२३-१९२९), सूर्यकांति (१९३२), नवातिथि (१९३५), पूजा पुष्पमा (१९४४), निमिषम् (१९४५), चेंकतिरुकल् मुत्तुकल् (१९४५), वनगायकन् (१९४७), इतलुकल् (१९४८), ओटक्कुष़ल्(१९५०), पथिकंटे पाट्टु (१९५१), अंतर्दाह (१९५५), वेल्लिल्प्परवकल् (१९५५), विश्वदर्शनम् (१९६०), जीवन संगीतम् (१९६४), मून्नरुवियुम् ओरु पुष़युम् (१९६४), पाथेयम् (१९६१), जीयुहे तेरंजेटुत्त कवितकल् (१९७२), मधुरम् सौम्यम् दीप्तम्, वेलिच्चत्तिंटे दूतम्, सान्ध्यरागम्। निबंध संग्रह - गद्योपहारम् (१९४०), लेखमाल (१९४३), राक्कुयिलुकल्, मुत्तुम् चिप्पियुम (१९५९), जी. युटे नोटबुक, जी युटे गद्य लेखनंगल्। नाटक - इरुट्टिनु मुन्पु (१९३५), सान्ध्य (१९४४), आगस्ट १५ (१९५६)। बाल साहित्य - इलम् चंचुकल् (१९५४), ओलप्पीप्पि (१९४४), राधाराणि, जीयुटे बालकवितकाल्। आत्मकथा - ओम्मर्युटे ओलंगलिल् (दो खंड) अनुवाद - अनुवादों में से तीन बांग्ला में से हैं, दो संस्कृत से, एक अंग्रेज़ी के माध्यम से फ़ारसी कृति का और एक इसी माध्यम से दो फ़्रेंच कृतियों के। बांग्ला कृतियाँ हैं- गीतांजलि, एकोत्तरशती, टागोर। संस्कृत की कृतियाँ हैं- मध्यम व्यायोग और मेघदूत, फारसी की रुबाइयात ए उमर ख़ैयाम http://kakesh.com/2007/anuwad_other_language/ उमर की रुबाइयों के अनुवाद भारतीय भाषाओं में ६ दिसंबर 2008 काकेश की कतरनें https://web.archive.org/web/20090512012959/http://kakesh.com/2007/anuwad_other_language/ 12 मई 2009 dead और फ़्रेंच कृतियों के अंग्रेजी नाम हैं- द ओल्ड मैन हू डज़ नॉट वांट टु डाय, तथा द चाइल्ड व्हिच डज़ नॉट वॉन्ट टु बी बॉर्न। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ संस्कृत साहित्य में गहन रुचि थी शंकर कुरूप की (प्रभासाक्षी) An overview of the major genres of modern Malayalam literature G. Sankara Kurup's Jnanpith Award Acceptance Speech The Poet's commentary on his work श्रेणी:१९६८ पद्म भूषण श्रेणी:मलयालम साहित्यकार श्रेणी:ज्ञानपीठ सम्मानित श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना श्रेणी:1901 में जन्मे लोग श्रेणी:१९७८ में निधन श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत मलयालम भाषा के साहित्यकार श्रेणी: भारतीय लेखक श्रेणी:भारतीय साहित्यकार