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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

नौलखा महल, उदयपुर

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अप्रैल 2025 नौलखा महल उदयपुर के गुलाब बाग के केंद्र में स्थित एक महल है, जिसे 19 वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था। यह आर्य समाज के अनुयायियों का तीर्थस्थल है। महर्षि दयानन्द 10 अगस्त, 1882 को उदयपुर आए और लगभग साढ़े छह महीने तक नवलखा महल में रहे। इस महल में ही उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश के लेखन को पूरा किया। 19 वीं शताब्दी में स्थापित यह महल अब आर्य समाज और स्वामी दयानन्द की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार का केन्द्र है। सम्प्रति इसका रखरखाव और संरक्षण आर्य समाज ट्रस्ट करता है। यहां 10 अगस्त 1882 को दयानंद सरस्वती आए थे। उन्होंने मेवाड़ साम्राज्य के 72वें शासक महाराणा सज्जन सिंह के अनुरोध पर झीलों की नगरी का दौरा किया। नवलखा महल कभी महाराणा का शाही अतिथि गृह था जिसे सन 1992 में सत्यार्थ प्रकाश न्यास को सौंप दिया गया। यहां एक यज्ञशाला भी है जहाँ वैदिक भजनों और वेदपाठों के साथ सामूहिक यज्ञों सहित यज्ञ प्रतिदिन सुबह और शाम किए जाते हैं। महल की पहली मंजिल में एक चित्र दीर्घा है जहाँ 67 तेल चित्रों में महर्षि के जीवन को, उनके आध्यात्मिक ज्ञान को चित्रित किया गया है। स्वामी दयानंद सरस्वती के लेखन कक्ष में एक 14-कोण और 14-कहानी वाला सत्यार्थ प्रकाश स्तम्भ या टॉवर भी स्थापित है। आंगन के एक तरफ एक हॉल में एक वैदिक पुस्तकालय और पढ़ने का कमरा है। सत्यार्थ प्रकाश के सभी 24 अनुवाद-इसमें संस्कृत, फ्रेंच, जर्मन, स्वाहिली, अरबी और चीनी शामिल हैं। घूमने वाले कांच के मामले सत्यार्थ प्रकाश और महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथों को बताते हैं। वर्तमान में इस नवलखा महल और स्वामी दयानंद से इसके जुड़ाव के प्रति लेकसिटी में आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से यहां पर एक हाईटेक थियेटर तैयार किया गया है। श्रेणी:राजपूत वास्तुकला