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धार्मिक कानून
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धार्मिक कानून उन नैतिक, आचारिक तथा कानूनी नियमों का समूह है जो विभिन्न धार्मिक परंपराओं की शिक्षाओं पर आधारित होते हैं। इसके प्रमुख उदाहरण हैं—ईसाई धर्म का कैनन लॉ, यहूदी धर्म का हलाखा, इस्लाम का शरीअत तथा हिंदू कानून।लैडिस्लास ओर्सी, "टुवर्ड्स अ थियोलॉजिकल कॉन्सेप्शन ऑफ़ कैनन लॉ" (जॉर्डन हाइट, T.O.R., और डैनियल जे. वार्ड, O.S.B. की किताब "रीडिंग्स, केसेज़, मटीरियल्स इन कैनन लॉ: अ टेक्स्टबुक फ़ॉर मिनिस्टीरियल स्टूडेंट्स, रिवाइज़्ड एडिशन" (कॉलेजविले, MN: द लिटर्जिकल प्रेस, 1990) में प्रकाशित, पेज-11)
कुछ देशों में ये कानून केवल उस धर्म के अनुयायियों पर लागू होते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर इन्हें राज्य की कानूनी व्यवस्था का भी हिस्सा बनाया जाता है।
धर्म-आधारित शासन व्यवस्था में राज्य किसी विशेष धर्म को आधिकारिक मान्यता दे सकता है, जिसे राज्य धर्म कहा जाता है। यदि शासन का सर्वोच्च अधिकार धार्मिक सिद्धांतों या ईश्वर के नाम पर संचालित हो, तो उसे धर्मतंत्र कहा जाता है। इसके विपरीत,धर्मनिरपेक्ष राज्यों में सरकार किसी एक धर्म को आधिकारिक रूप से नहीं अपनाती और सामान्यतः सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार करती है।
हिंदू कानून
यह औपनिवेशिक काल में प्रचलित एक शब्द है,जिसका विकास वेद, उपनिषद, धर्मशास्त्र, पुराण, इतिहास, धर्मसूत्र, गृह्यसूत्र, अर्थशास्त्र तथा नीतिशास्त्र जैसे हिंदू ग्रंथों से हुआ है। इन ग्रंथों में धर्म, नैतिकता, सामाजिक आचरण, कर्तव्यों तथा न्याय संबंधी सिद्धांतों का वर्णन मिलता है। धर्मशास्त्र और धर्मसूत्र विशेष रूप से हिंदू विधि और आचार-संहिता के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।धर्मशास्त्र हिंदू कानून और नैतिकता ब्रिटैनिका https://www.britannica.com/topic/Dharma-shastra?utm_source=chatgpt.com Encyclopedia Britannica 17 जून 2026 en
बहाई धर्म
बहाई धर्म में धार्मिक कानूनों का आधार किताब-ए-अकदास तथा बहाउल्लाह की शिक्षाएँ हैं। बहाई कानून सामान्य सिद्धांतों और दिशा-निर्देशों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं तथा उनके पालन में व्यक्तिगत विवेक और समझ को महत्व दिया जाता है।Smith Peter बहाई धर्म का परिचय https://books.google.com/books?id=z7zdDFTzNr0C Cambridge University Press 17 जून 2026 en 7 अप्रैल 2008 कुछ प्रमुख धार्मिक कर्तव्य निम्नलिखित हैं—
प्रतिदिन अनिवार्य प्रार्थना करना।
2 मार्च से 20 मार्च तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक उन्नीस-दिवसीय उपवास रखना।
चुगली और निंदा (backbiting) से बचना, क्योंकि इन्हें सामाजिक संबंधों के लिए हानिकारक माना जाता है।
बौद्ध धर्म
बौद्ध धर्म में भिक्षुओं और भिक्षुणियों के आचरण को नियंत्रित करने के लिए पतिमोक्खा (Pāṭimokkha) नामक नियम-संहिता का पालन किया जाता है। इसमें लगभग 227 नियम और सिद्धांत शामिल हैं, जो मठवासी जीवन की अनुशासन व्यवस्था को निर्धारित करते हैं।
सन्दर्भ