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मैं जब तक आई बहार
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जुलाई 2026 जब मैं आई बहार गगन गिल राजकमल प्रकाशन 2018 हिंदी भारत हिंदी साहित्य (काव्य) काव्य मुद्रित
जब मैं आई बहार एक हिंदी कविता संग्रह है। जिसको कवयित्री गगन गिल के द्वारा लिखा गया है। जिससे इनको 2024 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।..:: Welcome to Sahitya Akademi ::.. https://sahitya-akademi.gov.in/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp sahitya-akademi.gov.in 14 जून 2026
इसका प्रथम प्रकाशन वर्ष 2018 में हुआ। यह मनुष्य, अस्तित्व, स्मृति, एकांत, प्रेम, दुःख, आध्यात्मिकता तथा समय जैसे विषयों को गहन संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है। संग्रह की कविताएँ आत्मानुभूति और सामाजिक यथार्थ के बीच सेतु का कार्य करती हैं।
विषयवस्तु
इस संग्रह की कविताओं में मानव जीवन की जटिलताओं, आत्मचिंतन, वेदना, करुणा और आशा का सशक्त चित्रण मिलता है। इनकी काव्य-दृष्टि व्यक्तिगत अनुभवों को व्यापक मानवीय संदर्भों से जोड़ती है। संग्रह में स्त्री-अनुभव, आध्यात्मिक प्रश्नों और बदलते सामाजिक परिवेश की अभिव्यक्ति भी दिखाई देती है। कविताएँ पाठक को अपने भीतर झाँकने और जीवन के गहरे अर्थों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं।
कभी कभी अपना सच” कविता में कवयित्री अपनी सहानुभूतिपूर्ण अभिव्यक्ति में उपदेशात्मक लहजा नहीं अपनातीं; बल्कि सत्य की अनूठी आवाज़ नैतिक दिवालियापन के प्रतिध्वनि कक्ष के विरुद्ध खड़ी हैGhosh Sudeep Main Jab Tak Aai Baahar by Gagan Gill https://bangalorereview.com/2025/10/main-jab-tak-aai-baahar-by-gagan-gill/ The Bangalore Review 14 जून 2026 12 अक्टूबर 2025
विशेषता
मुक्त छंद का प्रभावी प्रयोग।
गहन प्रतीक और बिंब योजना।
आत्मसंवाद और दार्शनिक चिंतन की प्रधानता।
सरल किन्तु अर्थगर्भित भाषा।
स्त्री-अनुभव और मानवीय संवेदना का सशक्त प्रस्तुतीकरण।
गगन गिल की कविता में मौन, स्मृति और आध्यात्मिक खोज के स्वर प्रमुख हैं।
इनकी कविताओं की भाषा बहुत अनूठी और प्रतीकात्मक है। Gill Gagan Main Jab Tak Aayi Bahar https://books.google.com/books/about/Main_Jab_Tak_Aayi_Bahar.html?id=x-AxEQAAQBAJ Rajkamal Prakashan 14 जून 2026 en 18 दिसम्बर 2024
महत्व
यह संग्रह केवल कविताओं का मात्र संकलन नहीं है, बल्कि आधुनिक मनुष्य के आंतरिक संघर्ष, अकेलेपन, करुणा, स्मृति और अस्तित्वगत प्रश्नों का संवेदनशील दस्तावेज़ भी है। इन्होंने इस काव्य संग्रह में व्यक्ति के भीतरी संसार और बाहरी सामाजिक यथार्थ के बीच के संबंधों को अत्यंत सूक्ष्मता से व्यक्त किया गया है।
इन्होंन इस काव्य संग्रह में डूबने को निद्वंद भाव से स्वीकार किया है —
यह डूबना हर ओर है, चाहे प्रेम में हो, जीवन में, चाहे शोक में-
“तू मेरे भीतर है
शोक की जगह पर”,
“शोक मत कर
पिता ने कहा
अब शोक ही तेरा पिता है.”dev arun गगन गिल का काव्य-संसार: सुदीप्ति https://samalochan.com/gagan-gill-4/ समालोचन 15 जून 2026 11 मई 2023
इन्हें भी देखें
लोग भूल गए है
कल सुनना मुझे
मैं वक़्त के हूँ सामने
चुका भी हूँ नहीं मैं
ताप के ताये हुए दिन
हिमतरंगिनी
कल सुनना मुझे
उतना वह सूरज है
चुका भी हूँ नहीं मैं
सन्दर्भ
श्रेणी:कविता संग्रह
श्रेणी:कविताएँ