Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

मुरुद जंजीरा किला

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

साँचा:Infobox fort == परिचय == मुरुड-जंजीरा किला (मराठी: मुरुड-जंजिरा किल्ला) भारत के पश्चिमी तट पर स्थित एक प्रसिद्ध समुद्री किला है, जो महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले में मुरुड के पास समुद्र के बीच एक छोटे द्वीप पर स्थित है। यह किला अरब सागर में एकमात्र ऐसा किला है जिसे कभी भी जीता नहीं जा सका। इसका निर्माण मराठा राजा रामराव पाटिल व्दारा किया गया था, और यह आज भी अपने स्थापत्य, रणनीतिक निर्माण और अजेयता के लिए प्रसिद्ध है। == नाम का अर्थ == "जंजीरा" शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द "जज़ीरा" से हुई है, जिसका अर्थ होता है द्वीप। "मुरुड" नजदीकी तटीय कस्बे का नाम है। किले का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह एक द्वीप पर स्थित है और मुरुड से संबंधित है। == ऐतिहासिक पृष्ठभूमि == किले का इतिहास 15वीं शताब्दी में शुरू होता है जब मराठा राजा राम पाटील ने यहाँ लकड़ी का किला बनवाया था। 1489 में सिद्दी सरदार पीरम खान ने इस किले को छल से हथिया लिया और इस पर कब्ज़ा कर लिया। बाद में मलिक अंबर, जो अहमदनगर सल्तनत के प्रधानमंत्री थे, ने इस किले को पत्थर से बनवाया और इसे समुद्र में एक मजबूत किला बना दिया। इसके बाद यह किला सिद्दी वंश के अधीन रहा, जिन्होंने इसे 400 वर्षों तक नियंत्रित किया। == स्थापत्य एवं विशेषताएँ == किला पूरी तरह पत्थर से बना है और यह समुद्र की लहरों से लगातार टकराता रहता है, फिर भी यह आज भी मजबूती से खड़ा है। किले की दीवारें बहुत ऊँची और चौड़ी हैं। किले में कुल 19 बुर्ज हैं जिन पर बड़ी-बड़ी तोपें रखी गई थीं। === स्थापत्य तालिका === == तोपें और युद्ध तकनीक == किले में कुछ ऐतिहासिक तोपें मौजूद हैं जो आज भी देखी जा सकती हैं: कलाल बांगड़ – विशाल और भारी तोप जो दुश्मनों के जहाज नष्ट कर सकती थी लैंड कासम – समुद्र की दिशा में लगाई गई तोप चावड़ी – उच्च बुर्ज पर स्थित तोप == शासक और सिद्दी वंश == इस किले पर सिद्दी वंश ने कई पीढ़ियों तक राज किया। ये लोग अफ्रीकी मूल के थे और अरबी-हब्शी समुदाय से संबंधित थे। इनका शासन लगभग 400 वर्षों तक रहा। किले का रणनीतिक स्थान और समुद्री शक्ति इसे अजेय बनाते थे। === प्रमुख सिद्दी शासक === सिद्दी बुरहान सिद्दी कासिम सिद्दी सुरूर खान सिद्दी रसूल याकूत सिद्दी अहमद खान == मराठा और शिवाजी का प्रयास == छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले को जीतने के कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में उनके पुत्र संभाजी महाराज ने किले के सामने एक और किला — पद्मदुर्ग — बनवाया, लेकिन जंजीरा फिर भी अजेय रहा। == संस्कृति और कला == किले के अंदर एक दुर्लभ शिलालेख है जिसमें एक शेर को पाँच हाथियों को दबोचते हुए दिखाया गया है — यह उस समय की क्षत्रिय मराठाओ कि शक्ति का प्रतीक है। किले में सिद्दी शासकों की कब्रें, मस्जिद, और महल के अवशेष भी देखने को मिलते है == आज की स्थिति == आज मुरुड-जंजीरा किला महाराष्ट्र के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए नाव सेवा उपलब्ध है जो मुरुड तट से चलती है। किले की संरचना अभी भी बहुत हद तक सलामत है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। == वंशज और प्रवास == सिद्दी वंश के कुछ लोग आज भी दरभंगा, झंझारपुर, मुंबई, और बंगाल के कुछ हिस्सों में रहते हैं। कुछ वंशज म्यांमार और अफ्रीका तक भी प्रवास कर गए। == देखने योग्य स्थल == 19 बुर्ज और विशाल तोपें मीठे पानी के दो कुंड सुरूर खान का महल मस्जिद और मकबरे गुप्त सुरंगें और प्रवेश द्वार == संबंधित लेख == पद्मदुर्ग किला शिवाजी महाराज सिद्दी समुदाय महाराष्ट्र के किले भारतीय समुद्री किले == स्रोत == महाराष्ट्र राज्य पर्यटन विभाग की वेबसाइट: [1] "महाराष्ट्र के किले", लेखक: डॉ. विश्वनाथ दामले स्थानीय इतिहासकारों के लेख और फील्ड स्टडी == पहली बात ये समझने वाली है कि जो सिद्धि वंश के राजा खान आए == अफ्रीका देश और अरब देश से तो उनका किला कैसे हो गया ये ये इतना झूठ हमारे इतिहास को लिखा गया ताकि हमें हमारे धर्म योद्धा के बारे में कुछ पता न चल पाए और किस का छीन कर उसे अपना घर कहना क्या उचित है और फिर भी चलो मुगलों ने इसे जीता तो फिर टूट कैसे गया जब 400 साल तक उस किले पर राज किया तो तोड़ा किसने उसे खुद ही तोड़ कर चले गए क्या